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मुरादाबाद में मां शारदा समूह का कमाल, सजावटी झूमर-झालर बनाकर महिलाएं हर महीने कमा रहीं 15 हजार रुपयेसक्सेस स्टोरी
22 अग॰ 2026, 2:05 pm (68 दिन पहले)· 3

मुरादाबाद में मां शारदा समूह का कमाल, सजावटी झूमर-झालर बनाकर महिलाएं हर महीने कमा रहीं 15 हजार रुपये

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में मां शारदा समूह की 10 महिलाएं सजावटी झूमर और झालर बनाकर हर महीने 12,000 से 15,000 रुपये कमा रही हैं और आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं।

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले में महिलाओं का एक समूह अपने पारंपरिक घरेलू जीवन से आगे निकलकर आर्थिक आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रहा है। स्थानीय स्तर पर गठित मां शारदा समूह की महिलाएं आकर्षक झूमर और झालर बनाकर बाजार में अपनी खास पहचान बना चुकी हैं। सजावटी वस्तुओं के इस कारोबार के जरिए ये महिलाएं हर महीने शानदार कमाई कर रही हैं। हस्तकला और टीम वर्क के जरिए शुरू किए गए इस प्रयास ने न केवल उनकी वित्तीय स्थिति को मजबूती दी है, बल्कि पूरे इलाके में महिला सशक्तिकरण का एक सफल संदेश भी पहुंचाया है।

मां शारदा समूह का गठन और काम का विभाजन

मुरादाबाद में संचालित इस पहल की रीढ़ 'मां शारदा समूह' है, जिसमें कुल 10 महिलाएं एक साथ संगठित होकर कार्य कर रही हैं। समूह की अध्यक्ष रजनी के अनुसार, इस पूरे काम को सुचारू रूप से चलाने के लिए सदस्यों के बीच जिम्मेदारियों का बंटवारा किया गया है। निर्माण प्रक्रिया में सबसे पहले बाजार से गुणवत्तापूर्ण सजावटी फूल और अन्य कच्ची सामग्री खरीदी जाती है। इसके बाद समूह की कुछ महिलाएं फूलों को व्यवस्थित कर सुंदर डिजाइन तैयार करती हैं, वहीं अन्य महिलाएं उसमें झूमर और झालरों की माला पिरोने का काम संभालती हैं। यह उत्पाद छोटे से लेकर बड़े, हर आकार में तैयार किए जाते हैं, जिससे हर तरह के ग्राहकों की पसंद को पूरा किया जा सके।

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सावन और त्योहारों में बढ़ती मांग

इन हस्तनिर्मित झूमर और झालरों को ग्राहकों द्वारा खूब पसंद किया जा रहा है। हालांकि पूरे साल इनकी बिक्री बनी रहती है, लेकिन सावन के पवित्र महीने में इनकी मांग अत्यधिक बढ़ जाती है। सावन के दौरान धार्मिक आयोजनों और घरों की सजावट के लिए लोग इन झूमरों को विशेष रूप से खरीदते हैं। सजावट की सुंदरता और बारीकी के कारण मुरादाबाद मंडल के साथ-साथ आसपास के जिलों से भी ग्राहक इनके मुरीद बन चुके हैं।

बिक्री का मॉडल और घर-घर से ऑर्डर

समूह अपनी बिक्री बढ़ाने के लिए विभिन्न स्थानों और मेलों में प्रदर्शनी स्टॉल लगाता है। स्टॉल पर आने वाले लोग इन सजावटी झालरों को देखकर इतने प्रभावित होते हैं कि वे सीधे संपर्क नंबर नोट कर लेते हैं। इसके बाद ग्राहक फोन करके नए-नए ऑर्डर दर्ज कराते हैं। कई ग्राहक ऐसे भी हैं जो सीधे महिलाओं के घर पहुंचकर अपनी पसंद का झूमर खरीदकर ले जाते हैं। प्रत्यक्ष बिक्री और फोन ऑर्डर के इस संयोजन ने इनके व्यापार को काफी सहज और विस्तृत बना दिया है।

कमाई और आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम

इस कुटीर उद्योग का सबसे सुखद पहलू महिलाओं की व्यक्तिगत आर्थिक प्रगति है। मां शारदा समूह की प्रत्येक महिला सदस्य इस काम से हर महीने 12,000 रुपये से 15,000 रुपये तक का मुनाफा कमा रही है। इस नियमित आमदनी ने उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति को सुधारने में बड़ी भूमिका निभाई है। समूह अब पूरी तरह से आत्मनिर्भर बन चुका है और आसपास की अन्य महिलाओं को भी इस तरह के स्वरोजगार से जोड़ने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रहा है।

सवाल-जवाब

मुरादाबाद का मां शारदा समूह क्या काम करता है?
यह 10 महिलाओं का एक समूह है जो फूलों और सजावटी सामग्रियों से विभिन्न आकारों के सुंदर झूमर और झालर बनाता है।
समूह की प्रत्येक महिला सदस्य को इससे कितनी कमाई होती है?
इस कुटीर उद्योग से समूह की हर महिला सदस्य प्रतिमाह 12,000 रुपये से 15,000 रुपये तक कमा लेती है।
मां शारदा समूह की अध्यक्ष का नाम क्या है?
इस समूह की अध्यक्ष रजनी हैं, जो अन्य सदस्यों के साथ मिलकर उत्पादन और बिक्री का प्रबंधन करती हैं।
इन झूमरों और झालरों की सबसे ज्यादा मांग कब होती है?
इन सजावटी झूमरों की मांग पूरे साल रहती है, लेकिन सावन के महीने में और त्यौहारों पर इनकी मांग सबसे अधिक होती है।
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