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फैक्ट्री छोड़ खेत थामा, अब सुरेंद्र राम कमाते हैं भिंडी से रोज 3,000 से ज्यादासक्सेस स्टोरी
21 जून 2026, 2:23 pm (130 दिन पहले)· 2

फैक्ट्री छोड़ खेत थामा, अब सुरेंद्र राम कमाते हैं भिंडी से रोज 3,000 से ज्यादा

बिहार के छपरा जिले के गरखा प्रखंड के सुरेंद्र राम पहले पंजाब और दिल्ली की फैक्ट्रियों में काम करते थे, लेकिन मेहनत के बाद भी परिवार का खर्च नहीं चलता था। अब वे एक एकड़ में सेमरीज भिंडी उगाकर रोजाना करीब 5 क्विंटल उत्पादन से 3,000 रुपये से ज्यादा कमा रहे हैं।

बिहार के सारण जिले में किसानों की एक नई पीढ़ी पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर नगदी फसलों की तरफ तेजी से रुख कर रही है। गरखा प्रखंड के सुरेंद्र राम इसी बदलाव की एक जीती-जागती मिसाल हैं। उन्होंने ग्रेजुएशन तक पढ़ाई की, लेकिन डिग्री मिलने के बाद भी नौकरी नहीं मिली। रोजगार की तलाश में वे पंजाब और दिल्ली निकल गए और वहां फैक्ट्री में काम करने लगे। घंटों की मेहनत के बावजूद हालत यह थी कि परिवार का खर्च ठीक से नहीं चल पाता था।

गांव लौटना बन गया जिंदगी का सबसे अहम फैसला

जब शहरी जिंदगी ने उम्मीद के मुताबिक साथ नहीं दिया, तो सुरेंद्र राम ने बाहर रहने की बजाय अपने गांव लौटने और खेती को अपनाने का फैसला किया। यह कदम उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ। आज वे छपरा जिले के उन किसानों में गिने जाते हैं जो हरी सब्जियों की खेती से बेहतरीन कमाई कर रहे हैं। खेती की इस आमदनी से न सिर्फ घर का खर्च चल रहा है, बल्कि बच्चों की पढ़ाई-लिखाई का बोझ भी आसानी से उठाया जा रहा है।

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एक एकड़, सेमरीज किस्म और रोज 5 क्विंटल उत्पादन

TrendKia से बातचीत में सुरेंद्र राम ने बताया कि उन्होंने फिलहाल एक एकड़ जमीन पर सेमरीज वैरायटी की भिंडी लगाई है। यह किस्म उत्पादन के मामले में काफी बेहतर साबित हो रही है। वे हर दिन लगभग 5 क्विंटल भिंडी तोड़कर बाजार में बेचते हैं, जिससे रोजाना 3,000 रुपये से ज्यादा की आमदनी होती है। भिंडी के साथ-साथ उन्होंने बैंगन, मिर्च, नेनुआ और लौकी की खेती भी की है, जिससे एक ही खेत से कई सब्जियों के जरिए कमाई का रास्ता खुला हुआ है।

रोज 3 से 4 घंटे खेत में, और कमाई हर रोज पक्की

सुरेंद्र राम की दिनचर्या बेहद सीधी है। वे रोजाना 3 से 4 घंटे खेत में काम करते हैं, भिंडी तोड़ते हैं और उसे बाजार पहुंचाते हैं। उनका साफ कहना है कि फैक्ट्री में 8 घंटे खटने से कहीं बेहतर है कि खेत में 4 से 5 घंटे की मेहनत की जाए, क्योंकि यहां आय ज्यादा है। नगदी फसलों में पारंपरिक खेती के मुकाबले कहीं ज्यादा लाभ होता है और भिंडी इस मामले में सबसे आगे है।

सारण जिले में तेज हो रहा है सब्जी खेती का चलन

सुरेंद्र राम की यह सफलता सिर्फ एक व्यक्ति की कहानी नहीं है। सारण जिले के कई इलाकों में बड़े पैमाने पर किसान हरी सब्जियों की खेती अपना रहे हैं। पारंपरिक फसलों की जगह नगदी फसलें उगाने का यह रुझान तेजी से बढ़ रहा है, क्योंकि इससे आमदनी में लगातार और टिकाऊ बढ़ोतरी हो रही है।

भिंडी की खेती क्यों है सबसे फायदेमंद चुनाव

सुरेंद्र राम के मुताबिक, कम लागत में ज्यादा मुनाफा देने वाली सब्जियों में भिंडी सबसे ऊपर है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे पूरे साल उगाया जा सकता है, जिससे किसानों को हर मौसम में आमदनी का मौका मिलता रहता है। नियमित तुड़ाई की वजह से बाजार से पैसा हर दिन आता है, जो दूसरी फसलों के मुकाबले एक बड़ा फायदा है। उनकी सलाह है कि अगर किसान बड़े पैमाने पर भिंडी की खेती करें तो आय में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।

सवाल-जवाब

सुरेंद्र राम कौन हैं और वे कहां के रहने वाले हैं?
सुरेंद्र राम बिहार के छपरा जिले के गरखा प्रखंड के किसान हैं, जो पहले पंजाब और दिल्ली में फैक्ट्री में काम करते थे।
उन्होंने खेती को अपनाने का फैसला क्यों किया?
ग्रेजुएशन के बाद नौकरी नहीं मिली और फैक्ट्री में काम करने के बावजूद परिवार का खर्च नहीं चल पा रहा था, इसलिए वे गांव लौटे और खेती शुरू की।
सुरेंद्र राम रोज कितनी भिंडी तोड़कर बेचते हैं?
वे प्रतिदिन लगभग 5 क्विंटल भिंडी की तुड़ाई करके बाजार में बेचते हैं।
भिंडी की खेती से उन्हें रोज कितनी कमाई होती है?
सुरेंद्र राम भिंडी बेचकर रोजाना 3,000 रुपये से अधिक कमाते हैं।
उन्होंने कितनी जमीन पर भिंडी लगाई है और कौन सी किस्म उगाते हैं?
उन्होंने एक एकड़ जमीन पर सेमरीज वैरायटी की भिंडी की खेती की है।
क्या वे केवल भिंडी उगाते हैं या कोई और सब्जियां भी हैं?
भिंडी के अलावा उन्होंने बैंगन, मिर्च, नेनुआ और लौकी की भी खेती की है।
वे खेत में रोज कितने घंटे काम करते हैं?
सुरेंद्र राम रोजाना 3 से 4 घंटे खेत में काम करते हैं।
भिंडी को इतना फायदेमंद फसल क्यों माना जाता है?
भिंडी की नियमित तुड़ाई से किसान को हर दिन आमदनी होती है, इसे सालभर उगाया जा सकता है और लागत कम होने के बावजूद मुनाफा ज्यादा होता है।
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