यूएस ओपन फाइनल में हार के बाद आर्यना सबालेंका ने तोड़ा रैकेट, कैमरामैन पर फूटा गुस्साब्रिक्स शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की नाविकों के लिए विशेष आपातकालीन नेटवर्क बनाने की मांगमूलांक 2 वालों का आज चमकेगा भाग्य, करियर और रिश्तों में मिलेंगे सकारात्मक बदलावगौरव खन्ना से 10 करोड़ एलिमनी मांगने पर क्या बोलीं आकांक्षा चमोला? तलाक और ट्रोल्स पर तोड़ी चुप्पीबिहार के चर्चित आईपीएस अधिकारी भानु प्रताप सिंह का पारिवारिक कलह पहुंचा थाने, राजस्थान के भरतपुर में पत्नी ने काटी रातमूलांक 5 राशिफल 13 सितंबर 2026: रिश्तों में बढ़ेगा अपनापन और कामकाज में मिलेगी सफलतागणेश चतुर्थी पर सज गए देश के पांच प्रमुख गजानन धाम, इन खास मंदिरों में उमड़ती है भारी भीड़अजमेर के खोड़ा गणेश मंदिर का है अनोखा इतिहास, तालाब के पास ऐसे प्रकट हुई थी प्रतिमामोती डूंगरी गणेश मंदिर के लिए जयपुर ट्रैफिक पुलिस ने जारी की नई गाइडलाइन, गणेश चतुर्थी पर कई रास्ते रहेंगे बंदयूएस ओपन फाइनल में हार के बाद छलका आर्यना सबालेंका का दर्द, एलीना रबाकिना के खिलाफ गंवाया ताज
राजस्थान से अकेली महिला, 3 प्रयासों के बाद SAI नेशनल कुश्ती कोच बनीं भारती बिजारणियांसक्सेस स्टोरी
31 जुल॰ 2026, 5:29 pm (44 दिन पहले)· 0

राजस्थान से अकेली महिला, 3 प्रयासों के बाद SAI नेशनल कुश्ती कोच बनीं भारती बिजारणियां

सीकर के मालाकाली गांव की पहलवान भारती बिजारणियां ने तीसरे प्रयास में SAI नेशनल कुश्ती कोच चयन परीक्षा पास की। वह पूरे राजस्थान से चुनी गई एकमात्र महिला खिलाड़ी हैं।

स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) ने नेशनल कुश्ती कोच पद के लिए अंतिम चयन सूची जारी कर दी है, जिसमें राजस्थान के सीकर जिले की पहलवान भारती बिजारणियां ने ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है। सीकर क्षेत्र के रींगस अंतर्गत मालाकाली गांव की रहने वाली भारती पूरे राजस्थान राज्य से चुनी जाने वाली एकमात्र महिला खिलाड़ी बनी हैं। कई वर्षों के कठिन अभ्यास और राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतने के बाद अब वह देश की भावी महिला पहलवानों को तराशने की जिम्मेदारी संभालेंगी।

तीन बार दी परीक्षा, असफलता के बाद भी नहीं छोड़ा सपना

भारती बिजारणियां के लिए राष्ट्रीय स्तर पर कोच पद तक पहुंचने की राह आसान नहीं थी। उन्होंने स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया की नेशनल कोच चयन परीक्षा में कुल तीन बार हिस्सा लिया। शुरुआती दो प्रयासों में उन्हें असफलता का सामना करना पड़ा था, परंतु उन्होंने अपनी कमियों को दूर करते हुए नियमित अभ्यास जारी रखा। तीसरे प्रयास में उन्होंने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए सफलता हासिल की। भारती का मानना है कि असफलता से निराश होने के बजाय निरंतर प्रयास और अटूट आत्मविश्वास बनाए रखना ही सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है।

ये भी पढ़ें

10 महीने का कड़ा प्रशिक्षण और लखनऊ में स्थायी नियुक्ति

राष्ट्रीय कुश्ती कोच बनने की प्रक्रिया के तहत भारती को अब एशिया के सबसे बड़े खेल प्रशिक्षण केंद्र में 10 महीने की विस्तृत ट्रेनिंग दी जाएगी। इस कठिन प्रशिक्षण कार्यक्रम को पूरा करने के पश्चात उनकी स्थायी तैनाती उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित राष्ट्रीय अकादमी में की जाएगी। लखनऊ की इस अकादमी में देश भर से आने वाली प्रतिभाशाली महिला पहलवानों को अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं, ओलंपिक और एशियाई खेलों के लिए तैयार करने की कमान भारती के हाथों में होगी।

जिस अखाड़े में बहाया था पसीना, वहीं संभालेंगी कोचिंग की कमान

भारती की इस सफलता का सबसे प्रेरणादायक पहलू यह है कि वह उसी प्रशिक्षण केंद्र में मुख्य कोच के रूप में वापसी कर रही हैं, जहां उन्होंने कभी स्वयं एक एथलीट के रूप में घंटों पसीना बहाया था। सीकर के रींगस स्थित एक कॉलेज में पढ़ाई के दौरान उन्होंने अंतर-कॉलेज और राष्ट्रीय स्तर की कुश्ती प्रतियोगिताओं में भाग लेना शुरू किया था। इसी दौर में उनके करियर को एक नया मोड़ मिला, जिसमें उनके परिवार ने हर कदम पर उनका मार्गदर्शन और समर्थन किया।

गांव की पगडंडियों से राष्ट्रीय मंच तक का सफर

मालाकाली गांव से आने वाली भारती बचपन से ही अच्छी शारीरिक बनावट और खेल के प्रति रुझान रखती थीं। स्थानीय लोगों और खेल प्रेमियों की सलाह पर उन्होंने कुश्ती के मैट पर कदम रखा था। विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्पर्धाओं में भारत के लिए कई पदक जीतने वाली भारती अब सीकर जिले की पहली महिला पहलवान बन गई हैं जिन्हें नेशनल कुश्ती कोच के पद पर नियुक्त किया गया है। उनकी यह उपलब्धि ग्रामीण भारत की अन्य बेटियों के लिए भी खेलों में आगे बढ़ने की नई राह प्रशस्त करेगी।

सवाल-जवाब

भारती बिजारणियां किस पद पर चुनी गई हैं?
भारती बिजारणियां का चयन स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) द्वारा नेशनल कुश्ती कोच के पद पर हुआ है।
भारती बिजारणियां राजस्थान के किस जिले से संबंध रखती हैं?
भारती राजस्थान के सीकर जिले में स्थित रींगस क्षेत्र के मालाकाली गांव की रहने वाली हैं।
उन्हें चयन परीक्षा में कितनी बार प्रयास करना पड़ा?
उन्होंने नेशनल कोच चयन परीक्षा में तीन बार प्रयास किया, जिसमें शुरुआती दो असफलताओं के बाद तीसरे प्रयास में सफलता मिली।
कोच बनने के बाद उनकी पहली नियुक्ति कहां होगी?
10 महीने की राष्ट्रीय ट्रेनिंग पूरी करने के बाद उन्हें उत्तर प्रदेश के लखनऊ स्थित स्थायी अकादमी में पदस्थ किया जाएगा।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR