घरों में ब्रॉडबैंड लगवाते समय ज्यादातर लोग इस बात पर ध्यान नहीं देते कि डिवाइस को कमरे के किस कोने में रखा जा रहा है। केबल और उलझे तारों को छुपाने की होड़ में बहुत से उपभोक्ता अपने वाईफाई राउटर को सीधे टेलीविजन के पीछे, उसके नीचे वाले रैक पर या दीवार पर टंगे टीवी के बिल्कुल नजदीक फिट करवा देते हैं। पहली नजर में यह व्यवस्था काफी साफ-सुथरी और व्यवस्थित नजर आती है, लेकिन यही छोटी सी चूक पूरे घर के इंटरनेट नेटवर्क का संतुलन बिगाड़ देती है। इसके चलते डाउनलोडिंग और अपलोडिंग की रफ्तार अचानक गिर जाती है, ऑनलाइन गेमिंग में देरी होने लगती है और नेटफ्लिक्स जैसे स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर वीडियो बार-बार बफर करने लगते हैं।
इलेक्ट्रॉनिक दखल और कमजोर सिग्नलों का वैज्ञानिक गणित
वाईफाई राउटर पूरे घर में इंटरनेट पहुंचाने के लिए हवा में रेडियो तरंगें प्रसारित करता है। वहीं दूसरी तरफ, आधुनिक स्मार्ट टीवी केवल एक साधारण डिस्प्ले नहीं है, बल्कि उसमें जटिल इलेक्ट्रॉनिक सर्किट्स, धातु से बने आंतरिक कंपोनेंट्स और वायरलेस कनेक्टिविटी के लिए खुद का इन-बिल्ट वाईफाई मॉड्यूल भी मौजूद रहता है। जब दो सक्रिय इलेक्ट्रॉनिक उपकरण एक-दूसरे के बेहद नजदीक आते हैं, तो उनके भीतर चलने वाली विद्युत तरंगें और धातु के ढांचे आपस में टकराते हैं। तकनीकी शब्दावली में इस स्थिति को इलेक्ट्रोमैग्नेटिक इंटरफेरेंस कहा जाता है।
इस आपसी दखल का सीधा असर डेटा ट्रांसमिशन की गुणवत्ता पर पड़ता है। घरों में सबसे ज्यादा 2.4 गीगाहर्ट्ज फ्रीक्वेंसी बैंड वाले राउटर इस्तेमाल होते हैं, जिनकी रेडियो तरंगें टीवी से निकलने वाली इलेक्ट्रॉनिक तरंगों से जल्दी बाधित हो जाती हैं। जैसे ही दोनों डिवाइसेज के बीच यह व्यवधान पैदा होता है, सिग्नल की ताकत तेजी से घटने लगती है और पूरे कमरे में इंटरनेट की रफ्तार अस्थिर हो जाती है।
कम से कम 1 से 2 मीटर की दूरी तय करना क्यों है जरूरी
नेटवर्क के जानकारों का मानना है कि वाईफाई राउटर और टेलीविजन के बीच कम से कम 1 से 2 मीटर का स्पष्ट शारीरिक फासला होना चाहिए। यदि आपके कमरे का आकार बड़ा है और जगह की कोई कमी नहीं है, तो इस दूरी को 3 मीटर या उससे ज्यादा रखना इंटरनेट की क्षमता के लिहाज से कहीं बेहतर साबित होता है।
राउटर को टीवी के ठीक पीछे छिपाने, उसके ऊपर लटकाने या नीचे मेटल कैबिनेट में बंद करके रखने की आदत से पूरी तरह बचना चाहिए। धातु की सतहें और मोटी दीवारें रेडियो तरंगों को आगे बढ़ने से रोकती हैं या उन्हें सोख लेती हैं। वाईफाई की रेंज को घर के हर कमरे तक बराबर पहुंचाने का सबसे कारगर तरीका यह है कि उसे लिविंग रूम या घर के केंद्रीय हिस्से में थोड़ी ऊंचाई पर किसी खुली लकड़ी की टेबल या शेल्फ पर स्थापित किया जाए।
पास रखने से डिवाइस पर दबाव और स्पीड में आधी गिरावट
टीवी के करीब सटाकर रखे गए राउटर से इंटरनेट की सामान्य स्पीड लगभग आधी रह सकती है। इसका नतीजा यह होता है कि जरूरी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कॉल बीच में ही कटने लगते हैं, फाइल्स डाउनलोड होने में सामान्य से दोगुना वक्त लगता है और टीवी स्क्रीन पर लोड होने वाले कंटेंट रुक-रुक कर चलते हैं।
रोचक बात यह भी है कि स्मार्ट टीवी खुद भी उसी वाईफाई नेटवर्क पर काम करने की कोशिश करती है, लेकिन राउटर के हद से ज्यादा पास होने के कारण उसका खुद का रिसीवर भी जाम होने लगता है। लंबे समय तक लगातार ऐसा दखल रहने पर राउटर को कमजोर पड़ रहे सिग्नलों की भरपाई के लिए अतिरिक्त प्रोसेसिंग ताकत लगानी पड़ती है। इससे हार्डवेयर पर गैर-जरूरी दबाव पड़ता है और डिवाइस तेजी से गर्म होने लगता है, जिससे उसकी उम्र भी घट सकती है।
सिग्नल की मजबूती बढ़ाने के कुछ आसान और जरूरी कदम
घर में इंटरनेट का बेहतर अनुभव पाने के लिए राउटर को चारों तरफ से खुली और हवादार जगह पर रखना चाहिए। टीवी के अलावा माइक्रोवेव ओवन, कॉर्डलेस फोन और ब्लूटूथ स्पीकर्स जैसे उपकरणों से भी इसे पर्याप्त दूरी पर रखें, क्योंकि ये उपकरण भी रेडियो फ्रीक्वेंसी में भारी रुकावट पैदा करते हैं।
अगर आपके राउटर और कनेक्ट होने वाले गैजेट्स में डुअल-बैंड की सुविधा है, तो 2.4 गीगाहर्ट्ज की जगह 5 गीगाहर्ट्ज बैंड का विकल्प चुनें। इस बैंड पर बाहरी इलेक्ट्रॉनिक दखल बहुत कम होता है और डेटा ट्रांसफर काफी तेज गति से होता है। इसके साथ ही राउटर के एंटीना की दिशा को सही रखें, हफ्ते में कम से कम एक बार डिवाइस को रीस्टार्ट करें और उसके सिस्टम फर्मवेयर को हमेशा अपडेटेड रखें। बड़े मकानों में कवरेज बढ़ाने के लिए मेश सिस्टम या वाईफाई एक्सटेंडर लगाए जा सकते हैं, पर बुनियादी राउटर की सही लोकेशन तय करना ही सबसे किफायती समाधान है।



















