ब्रिटिश टेनिस खिलाड़ी टोबी सैमुअल के लिए पिछले कुछ महीने किसी सपने के सच होने जैसे रहे हैं। पिछले 12 महीनों के दौरान विश्व रैंकिंग में शीर्ष 100 में जगह बनाने वाले इस 23 वर्षीय खिलाड़ी को अब इस सप्ताहांत इक्वाडोर के खिलाफ होने वाले मुकाबले के लिए ग्रेट ब्रिटेन की डेविस कप टीम में शामिल कर लिया गया है। पिछले महीने जब टीम की घोषणा हुई, तो उन्हें पांचवें सदस्य के रूप में चुना गया था। इस प्रतिष्ठित राष्ट्रीय टीम में उनके साथ आर्थर फेरी, कैमरन नॉरी, हेनरी पैटन और लॉयड ग्लासपूल भी शामिल हैं। अपने देश की जर्सी पहनने का अवसर मिलने पर सैमुअल ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए इस मुकाम को अवास्तविक बताया है।
न्यू यॉर्क की सड़कों पर मिली चयन की खुशखबरी
विंचेस्टर के रहने वाले और बाथ में ट्रेनिंग लेने वाले सैमुअल हाल ही में यूएस ओपन में अपना पहला मुकाबला खेल रहे थे। जब उन्हें राष्ट्रीय टीम में चयन की सूचना मिली, तब वह न्यू यॉर्क शहर में घूम रहे थे। टीम के कप्तान लियोन स्मिथ ने फोन करके उन्हें बधाई दी और बताया कि उन्हें डेविस कप स्क्वॉड में शामिल कर लिया गया है। सैमुअल के अनुसार, वह उनके टेनिस जीवन के सबसे बेहतरीन पलों में से एक था, क्योंकि प्रत्येक ब्रिटिश टेनिस खिलाड़ी अपने देश का प्रतिनिधित्व करने और उसके लिए खेलने की ख्वाहिश रखता है। महज आठ या नौ महीने पहले वह केवल कुछ चैलेंजर टूर्नामेंट्स में खेलने की उम्मीद कर रहे थे, और अब सीधे डेविस कप टीम में पहुंच जाना उनके लिए एक चौंकाने वाला सफर रहा है।
ग्रैंड स्लैम मुकाबलों में मजबूत प्रदर्शन
यह पूरा साल सैमुअल के लिए कई नई उपलब्धियों से भरा रहा है। पिछले महीने अपने यूएस ओपन पदार्पण पर उन्होंने टॉमस मचाक के खिलाफ शानदार जीत दर्ज करते हुए किसी ग्रैंड स्लैम के मुख्य ड्रॉ में अपनी पहली विजय हासिल की थी। हालांकि, अगले दौर में उन्हें 18वीं वरीयता प्राप्त जिरी लेहेका के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा था। इससे पहले उन्होंने फ्रेंच ओपन में भी अपनी छाप छोड़ी, जहां वह क्वालिफाइंग के तीन कड़े दौर जीतकर मुख्य ड्रॉ में पहुंचे थे। वहां पहले ही दौर में उनका सामना दुनिया के आठवें नंबर के खिलाड़ी एलेक्स डी मिनौर से हुआ, जिसमें उन्हें शिकस्त झेलनी पड़ी।
विंबलडन का रोमांच और मानसिक मजबूती
फ्रेंच ओपन के कुछ ही हफ्तों बाद सैमुअल को विंबलडन में वाइल्डकार्ड प्रवेश मिला। वहां उन्होंने चेक गणराज्य के 15वीं वरीयता प्राप्त और फ्रेंच ओपन सेमीफाइनलिस्ट याकूब मेनसिक को कड़ी टक्कर दी और मुकाबला पूरे पांच सेटों तक खींच लिया। बड़े टूर्नामेंटों में शीर्ष खिलाड़ियों का सामना करने के शुरुआती अनुभव को याद करते हुए सैमुअल ने बताया कि लॉकर रूम में दिग्गजों को देखना और उनके खिलाफ कोर्ट पर उतरना पहले काफी घबराहट भरा था, यहां तक कि शुरू में कोर्ट पर उनके हाथ-पैर भी कांपते थे। लेकिन दो या तीन बड़े मैचों के बाद वह इस माहौल के आदी हो गए और कोर्ट पर शांत रहने लगे, जिसने उन्हें खेल में गहराई तक टिके रहने में मदद की।
लंबी अवधि के मैच और नई तकनीकी ताकत
चैलेंजर टूर से टेनिस के शीर्ष स्तर पर कदम रखने से सैमुअल को शारीरिक और मानसिक दोनों स्तरों पर काफी कुछ सीखने को मिला है। चैलेंजर टूर के मुकाबले तीन सेटों के होते हैं, जबकि बड़े टूर्नामेंटों में उन्हें लगातार पांच सेटों के कड़े मुकाबलों का सामना करना पड़ा है। तीन, चार या पांच घंटे तक कोर्ट पर लगातार जूझना उनके लिए एक बिल्कुल नया अनुभव रहा है। इस दौरान उन्होंने अपनी तकनीक पर भी गहरा काम किया है। सैमुअल का मानना है कि उनकी सर्विस और फोरहैंड पहले भी अच्छे थे, लेकिन वे प्रतिद्वंद्वी खिलाड़ियों को डराते नहीं थे। अब ये दोनों पहलू उनके सबसे बड़े हथियार बन चुके हैं, जिनके दम पर वह मैच अपने नाम करने में सफल हो रहे हैं।



















