हांगकांग ओपन के टेनिस कोर्ट पर एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला, जब 17 साल की ब्रिटिश खिलाड़ी मीका स्टोजसावलेविक ने पूर्व ऑस्ट्रेलियन ओपन विजेता सोफिया केनिन को हराकर अपने करियर की पहली डब्ल्यूटीए टूर मुख्य ड्रॉ जीत हासिल की। मुकाबले की शुरुआत से ठीक एक घंटा पहले उन्हें जानकारी मिली थी कि वह लकी लूजर के रूप में मुख्य मुकाबले में खेलने उतर रही हैं। इस बेहद कम समय की सूचना के बावजूद उन्होंने कोर्ट पर शानदार आत्मविश्वास दिखाया और दुनिया की पूर्व शीर्ष खिलाड़ियों में शामिल प्रतिद्वंद्वी को चौंका दिया।
क्वालीफाइंग की निराशा के बाद लकी लूजर के रूप में मिला मौका
ब्रिटिश किशोरी हांगकांग ओपन के प्रारंभिक क्वालीफाइंग दौर में हारकर टूर्नामेंट से बाहर होने की कगार पर पहुंच चुकी थीं। हालांकि, ड्रॉ में जगह खाली होने के चलते उन्हें लकी लूजर के तौर पर मुख्य ड्रॉ में शामिल होने का अवसर मिल गया। जब उन्हें मैच खेलने की पुष्टि हुई, तब मुकाबला शुरू होने में केवल साठ मिनट का समय बचा था। मानसिक तौर पर तत्काल तैयार होकर वह सीधे कोर्ट पर उतरीं और बिना किसी दबाव के अपनी योजना को लागू किया।
स्टोजसावलेविक ने मैच के बाद बताया कि उन्हें मुकाबले में उतरने की खबर सिर्फ एक घंटे पहले ही मिली थी। उनका कहना था कि वह बस कोर्ट पर गईं और खुलकर अपने शॉट्स लगाए। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि सोफिया केनिन एक ग्रैंड स्लैम चैंपियन रही हैं और यह मुकाबला कभी भी आसान नहीं होने वाला था, लेकिन उन्हें अपने खेल पर पूरा भरोसा था और अंत में यह रणनीति पूरी तरह कारगर साबित हुई।
तीन सेटों तक चला कड़ा मुकाबला और अहम आंकड़े
विश्व रैंकिंग में 411वें स्थान पर मौजूद मीका स्टोजसावलेविक के सामने 27 वर्षीय अमेरिकी खिलाड़ी सोफिया केनिन की चुनौती थी। केनिन की मौजूदा रैंकिंग ब्रिटिश खिलाड़ी से 224 पायदान ऊपर है। इसके बावजूद स्टोजसावलेविक ने मैच में शुरू से आक्रामक रुख बनाए रखा। उन्होंने पहले सेट को 6-3 से जीतकर बढ़त बनाई, हालांकि केनिन ने दूसरे सेट में वापसी करते हुए 6-4 से जीत दर्ज कर मैच को बराबरी पर ला खड़ा किया।
निर्णायक तीसरे सेट में दोनों खिलाड़ियों के बीच कड़ा संघर्ष देखने को मिला। 17 वर्षीय ब्रिटिश खिलाड़ी ने दबाव के पलों में धैर्य बनाए रखा और अंतिम सेट 6-4 से जीतकर मैच 6-3, 4-6, 6-4 से अपने नाम कर लिया। मैच के आंकड़ों पर नजर डालें तो स्टोजसावलेविक ने मुकाबले में छह विनर्स लगाए जबकि उनकी प्रतिद्वंद्वी के खाते में शून्य विनर रहा। इसके अलावा उन्होंने अपने खिलाफ बने आठ ब्रेक प्वाइंट्स में से तीन को सफलतापूर्वक बचाकर मैच को अपने पक्ष में मोड़ा।
केनिन का संघर्ष और स्टोजसावलेविक की पिछली सफलताएं
अमेरिकी खिलाड़ी सोफिया केनिन ने साल 2020 में मेलबर्न में ऑस्ट्रेलियन ओपन का खिताब अपने नाम किया था। हालांकि, उस खिताबी जीत के बाद का दौर उनके लिए काफी उतार-चढ़ाव और मुश्किलों भरा रहा है। इसके बावजूद वह रैंकिंग में स्टोजसावलेविक से 200 से अधिक स्थान ऊपर काबिज थीं, जिससे वह मुकाबले में स्पष्ट तौर पर जीत की दावेदार मानी जा रही थीं।
दूसरी ओर, स्टोजसावलेविक के लिए यह इस साल की दूसरी बड़ी जीत है। इससे पहले अप्रैल के महीने में उन्होंने बिली जीन किंग कप क्वालीफाइंग के दौरान उस समय की विश्व नंबर 56 तालिया गिब्सन को हराकर सनसनी मचा दी थी। उस प्रदर्शन के बाद हांगकांग में पूर्व ग्रैंड स्लैम चैंपियन को शिकस्त देना उनके पेशेवर सफर में एक और बड़ा मील का पत्थर बन गया है।
ईलिंग लॉन टेनिस क्लब से शुरू हुआ सफर और अगला मुकाबला
मीका स्टोजसावलेविक ने महज सात साल की उम्र में टेनिस रैकेट थामा था। उत्तर-पश्चिम लंदन स्थित ईलिंग लॉन टेनिस क्लब में वह अपने भाई को अभ्यास करते हुए देखती थीं, जिसके बाद उन्होंने स्वयं टेनिस खेलना शुरू किया। जूनियर सर्किट में उन्होंने तेजी से अपनी पहचान बनाई और जूनियर विश्व रैंकिंग में शीर्ष पांचवां स्थान हासिल करने में सफल रहीं। साल 2025 में उन्होंने औपचारिक रूप से पेशेवर टेनिस की दुनिया में कदम रखा।
पेशेवर बनने के बाद इसी साल उन्होंने मुख्य टूर से एक स्तर नीचे माने जाने वाले बर्मिंघम के डब्ल्यूटीए 125 इवेंट के क्वार्टर फाइनल तक का सफर तय किया था। अब हांगकांग ओपन के मुख्य ड्रॉ में अपनी पहली जीत दर्ज करने के बाद दूसरे दौर में उनका सामना विश्व रैंकिंग में 67वें स्थान पर काबिज जेनेप सोनमेज से होगा।



















