शीतकालीन मौसम में ताजे पत्तों वाली सब्जियों और मोटे अनाजों का मेल खानपान को अलग ही रंगत देता है। अक्सर लोग मेथी के पराठे या सादी रोटियां बनाते हैं, लेकिन पोषण और स्वाद को एक नया विस्तार देने के लिए बाजरे का आटा एक बेहतरीन विकल्प बनकर उभरता है। बाजरा अपने भारीपन और कड़क स्वभाव के लिए जाना जाता है, जिसके कारण अक्सर इसे बेलते वक्त टूटने की शिकायत सामने आती है। इस दिक्कत को दूर करने और रोटी को स्वाभाविक लचीलापन देने के लिए इसमें थोड़ा गेहूं का आटा, कसा हुआ कम वसा वाला पनीर और गाढ़ा दही शामिल किया जाता है। यह मिश्रण न केवल रोटी की बनावट को लंबे समय तक नरम बनाए रखता है, बल्कि मेथी की स्वाभाविक कड़वाहट को एक संतुलित सौंधापन भी देता है।
इस पारंपरिक मिस्सी रोटी की खासियत यह है कि इसमें किसी भी तरह के अलग मसालेदार भरावन को भरने की झंझट नहीं रहती। सारा स्वाद सीधे गूंथे जाने वाले मिश्रण में ही समाहित कर दिया जाता है। हरी मिर्च का तीखापन, लहसुन का गहरा स्वाद और ताजे हरे धनिये की महक हर कौर में बराबर महसूस होती है। चाहे सुबह का पहला नाश्ता हो या दोपहर का भोजन, यह पौष्टिक रोटी बिना किसी तामझाम के थाली को संपूर्ण बना देती है।
रसोई में जुटाएं यह जरूरी सामग्री
इस संतुलित और पौष्टिक व्यंजन को तैयार करने के लिए सामग्री का सही नाप बेहद मायने रखता है। सबसे पहले 200 ग्राम बाजरे का पिसा हुआ आटा और उसके साथ बाइंडिंग देने के लिए 100 ग्राम गेहूं का आटा निकाल लें। हरी सब्जियों में 250 ग्राम ताजी मेथी के पत्ते एकत्र करें। इसके अलावा दो कलियां लहसुन की लेकर उन्हें एकदम बारीक काट लें, एक बड़ा चम्मच कम वसा वाला दही और 50 ग्राम कम वसा वाला पनीर कद्दूकस करने के लिए रखें।
स्वाद और रंगत निखारने वाले मसालों में आधा छोटा चम्मच हल्दी, आधा छोटा चम्मच पिसी लाल मिर्च और आवश्यकतानुसार नमक निकालें। साथ ही एक बारीक कटी ताजी हरी मिर्च और दो छोटे चम्मच हरा धनिया बारीक काटकर रख लें। गूंथने के लिए पानी की मात्रा अलग से सीमित ही रखें, क्योंकि मेथी के पत्तों और दही में अपनी प्राकृतिक नमी पहले से मौजूद रहती है।
मेथी और मसालों की प्राथमिक तैयारी
इस व्यंजन की सफलता साग की स्वच्छता और उसकी सही कटाई पर टिकी होती है। मेथी के गुच्छे में से केवल कोमल पत्तों को ही तोड़ें और उनके कड़े या मोटे डंठलों को पूरी तरह काटकर अलग कर दें। पत्तियों पर जमी मिट्टी और धूल साफ करने के लिए उन्हें ठंडे पानी से दो से तीन बार अच्छी तरह धोएं। धोने के उपरांत पत्तों को किसी जालीदार बर्तन अथवा छलनी में रख दें, ताकि पानी पूरी तरह छन जाए।
जब मेथी के पत्तों से अतिरिक्त पानी निथर जाए, तब उन्हें चाकू या दरांती से जितना संभव हो बारीक काटें। पत्तियों का बारीक होना बेहद आवश्यक है, क्योंकि यदि पत्तियां मोटी रह जाएंगी तो बेलन चलाते समय आटा फट जाएगा और रोटियों के किनारों पर दरारें पड़ेंगी। इसी प्रकार लहसुन की दोनों कलियों, हरी मिर्च और धनिये को भी बारीक काटकर अलग कटोरी में व्यवस्थित कर लें।
सूखे मिश्रण में मिलाएं दही और मसला हुआ पनीर
एक बड़ी और फैली हुई परात लेकर उसमें बाजरे और गेहूं के दोनों आटों को एक साथ डालकर हाथों से मिला लें। इसके बाद कटी हुई हरी मेथी, लहसुन के टुकड़े, कटी हरी मिर्च और हरा धनिया आटों के ऊपर बिखेर दें। पनीर को हथेली से अच्छी तरह मसल लें या कद्दूकस की बारीक जाली से निकालें, ताकि आटे में पनीर की कोई सख्त गांठ न बचे।
अब इस मिश्रण में दही डालें और साथ में हल्दी, लाल मिर्च पाउडर एवं नमक छिड़क दें। पानी मिलाने से पहले इन तमाम चीजों को दोनों हाथों से अच्छी तरह रगड़ते हुए आपस में मिलाएं। इस सूखे मिश्रण को पहले मिलाने से यह लाभ मिलता है कि साग और दही का गीलापन आटे के हर कण में समा जाता है, जिससे आगे चलकर गूंथते समय पानी की सटीक आवश्यकता का पता लगाना काफी आसान हो जाता है।
संतुलित दबाव के साथ आटा तैयार करने की विधि
प्राथमिक मिश्रण मिल जाने के पश्चात थोड़ा-थोड़ा करके सादा पानी डालें और गूंथना आरंभ करें। एक साथ अधिक पानी उड़ेलने से बाजरे का आटा एकदम पतला होकर चिपकने लग सकता है। आटे को इस प्रकार गूंथें कि वह न तो बहुत कड़ा रहे और न ही उंगलियों पर चिपके। अत्यधिक सख्त आटा रखने से चकले पर बेलते समय रोटियां फट सकती हैं।
यदि गूंथने के दौरान मिश्रण सूखा और बिखरा हुआ महसूस हो, तो हथेलियों को पानी में डुबोकर दोबारा आटे को अच्छी तरह मसलें। इसके विपरीत, यदि आटा किसी कारणवश जरूरत से ज्यादा ढीला हो जाए, तो उसमें थोड़ा सूखा गेहूं का आटा छिड़क कर संतुलन बना लें। पूरे मिश्रण को एकसार गूंथकर चिकना पिंड बना लें, जिससे पनीर, मेथी और मसालों का फैलाव हर हिस्से में एकसमान हो जाए।
चकले पर हल्के दबाव से गोल आकार देना
तैयार आटे में से सामान्य आकार के गोल पेड़े अथवा लोइयां अलग कर लें। चकले की सतह पर बहुत थोड़ा सूखा गेहूं का आटा लगाएं और उस पर लोई रखकर अत्यंत धीमे हाथों से बेलन चलाएं। ध्यान रखें कि बाजरे में ग्लूटेन की मात्रा न के बराबर होती है, इसलिए इस रोटी को सामान्य गेहूं की रोटी की भांति बहुत पतला बेलने का प्रयास न करें, अन्यथा उठाते समय वह बिखर सकती है।
बेलते समय यदि बाहरी गोल घेरे पर हल्की दरारें उभरें, तो घबराएं नहीं; उन्हें अपनी उंगलियों के पोरों से हल्का दबाकर आपस में जोड़ लें। सुविधा के लिए शुरुआत में छोटे आकार की रोटियां ही बनाएं, जिन्हें पलटने में आसानी रहती है। चकले पर अत्यधिक सूखा आटा लगाने से बचें, क्योंकि सूखा आटा तवे पर गिरकर जलने लगता है और रोटी पर काले दाग छोड़ देता है।
तवे पर धीमी और मध्यम आंच पर पकाना
रोटी बेलने से पहले ही गैस पर तवा चढ़ाकर गर्म कर लें। बिली हुई रोटी को दोनों हाथों के सहारे अत्यंत सावधानी से गर्म तवे के बीचों-बीच डालें। कुछ सेकंड रुकें, जब निचली सतह पर हल्के भूरे चित्ते दिखने लगें, तो चिमटे या पलटे की मदद से रोटी को पलट दें।
अब दूसरी तरफ भी मध्यम आंच पर सिकने दें। किसी साफ सूती कपड़े या लकड़ी के प्रेस की सहायता से रोटी के किनारों को हल्का-हल्का दबाएं, ताकि बीच के साथ-साथ किनारे भी पूरी तरह पक जाएं। तेज आंच पर पकाने की गलती बिल्कुल न करें, क्योंकि इससे बाहरी हिस्सा जल जाएगा और अंदर बाजरे का आटा कच्चा रह जाएगा। दोनों ओर सुनहरे निशान आने और सौंधी खुशबू फैलने पर रोटी को तवे से उतार लें।
परोसने का तरीका और स्वाद बढ़ाने के सुझाव
तवे से ताजी उतरी गरमा-गरम बाजरा-मेथी मिस्सी रोटी को पुदीने और धनिये की तीखी हरी चटनी के साथ थाली में परोसें। यदि चाहें तो इसके साथ एक कटोरी सादा ताजा दही या घर की बनी कोई भी मौसमी सब्जी रख सकते हैं। चूंकि इस रोटी में लहसुन, मेथी, पनीर और मसालों का भरपूर जायका पहले से मौजूद है, इसलिए इसे खाने के लिए किसी भारी या अत्यधिक रसेदार सब्जी की आवश्यकता नहीं पड़ती।
यदि एक साथ कई सदस्यों के लिए रोटियां तैयार की जा रही हैं, तो तवे से उतारने के तुरंत बाद उन्हें किसी साफ कपड़े या मलमल के टुकड़े में लपेटकर कैसरोल में रखें। ऐसा करने से उनकी गर्माहट बनी रहती है और वे लंबे समय तक कड़ी नहीं होतीं। बेहतरीन स्वाद, महक और मुलायम बनावट का पूरा आनंद उठाने के लिए इन्हें हमेशा गरमा-गरम ही परोसना चाहिए।



















