अयोध्या में स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर को भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण की तरफ से ‘ईट राइट प्लेस ऑफ वर्शिप’ प्रमाणपत्र प्रदान किया गया है। खाद्य नियामक ने परिसर के भीतर तैयार होने वाले तथा श्रद्धालुओं में वितरित किए जाने वाले खाद्य पदार्थों की स्वच्छता, रख-रखाव और गुणवत्ता के कड़े मानकों की समीक्षा के बाद यह कदम उठाया है। प्राधिकरण की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किए गए ब्योरे के मुताबिक, यह आधिकारिक प्रमाणपत्र 11 अक्टूबर, 2026 से प्रभावी होकर 10 अक्टूबर, 2028 तक पूरे दो साल की अवधि के लिए मान्य रहेगा।
प्रसाद और लंगर में शुद्धता सुनिश्चित करने की कवायद
नियामक संस्था का यह विशेष कार्यक्रम देशव्यापी ‘ईट राइट इंडिया’ अभियान के तहत संचालित किया जाता है। ‘ईट राइट प्लेसेज ऑफ वर्शिप’ पहल की रूपरेखा मुख्य रूप से धार्मिक स्थलों पर तैयार होने वाले प्रसाद, लंगर और अन्य भोज्य उत्पादों में उच्च स्तर की स्वच्छता और सुरक्षा स्थापित करने के लिए बनाई गई है। इसका बुनियादी उद्देश्य पूजा स्थलों और धार्मिक परिसरों में खाद्य प्रबंधन की गुणवत्ता बनाए रखना, किसी भी प्रकार की अनियमितता को रोकना और प्रबंधकों को तय नियमों का अनुशासन के साथ पालन करने के लिए प्रेरित करना है। खाद्य सुरक्षा नियामक ने श्रीराम मंदिर परिसर में तैयार होने वाली खाने-पीने की सभी सामग्रियों की गुणवत्ता की सघन समीक्षा करने के बाद ही यह मान्यता दी है।
ऑडिट, प्रशिक्षण और कानूनी मानकों की कड़ी प्रक्रिया
इस पूरी व्यवस्था के माध्यम से धार्मिक संस्थानों को खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 और उससे जुड़े तमाम नियमों व विनियमों के अनुरूप मजबूत ढांचा विकसित करने के लिए जागरूक किया जाता है। प्रमाणन की प्रक्रिया केवल कागजी औपचारिकता तक सीमित नहीं रहती, बल्कि संबंधित स्थल के कर्मचारियों और सेवादारों को जरूरी दिशा-निर्देश, व्यावहारिक सुझाव और तकनीकी प्रशिक्षण भी दिया जाता है। किसी भी परिसर को यह मान्यता देने से पहले प्राधिकरण निर्धारित मानकों के आधार पर एक शुरुआती ऑडिट संपन्न करता है। इसके उपरांत वहां तैनात कर्मियों को सुरक्षित खाद्य प्रबंधन की ट्रेनिंग दी जाती है और फिर तृतीय-पक्ष एजेंसियों के जरिए अंतिम ऑडिट कराया जाता है। इन सभी पैमानों पर खरा उतरने के बाद ही अंतिम प्रमाणपत्र जारी किया जाता है। गौरतलब है कि अयोध्या के इस भव्य मंदिर में रामलला की नवीन मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा 22 जनवरी, 2024 को आयोजित की गई थी।
धार्मिक परिसरों में सुरक्षित भोजन और भंडारण को प्रोत्साहन
यह प्रमाणन व्यवस्था मंदिर, गुरुद्वारे और मस्जिद जैसे विभिन्न धार्मिक स्थलों के इर्द-गिर्द अथवा भीतर तैयार होने वाले प्रसाद, सामुदायिक लंगर और संबंधित खाद्य उत्पादों पर समान रूप से लागू होती है। खाद्य नियामक पहले इन सभी परिसरों में सामग्रियों के भंडारण, पकाने के तौर-तरीकों और वितरण की संपूर्ण शृंखला की जांच करता है। इस पहल का मुख्य ध्येय धार्मिक प्रबंधन समितियों को स्वच्छ भोजन उपलब्ध कराने, कच्चे माल के सुरक्षित भंडारण और स्वच्छ वितरण व्यवस्था को निरंतर बनाए रखने के लिए सक्षम बनाना है।
























