उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में जबरन धर्म परिवर्तन और दुष्कर्म से जुड़े एक चर्चित मामले में स्थानीय अदालत ने आरोपी को 10 साल कठोर कारावास और एक लाख रुपये के अर्थदंड की सजा सुना दी है। फास्ट ट्रैक कोर्ट की जज नेहा गर्ग की अदालत ने रिसौली गांव (बिल्सी थाना क्षेत्र) के रहने वाले साकिर हुसैन को दोषी ठहराया। अदालत ने माना कि उसने महिला का अपहरण किया, उसे बंधक बनाकर रखा, बेटी की जान को खतरे में डालकर दुष्कर्म किया और जबरन नमाज पढ़वाकर मजहब बदलवाया। बताया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश के धर्मांतरण विरोधी कानून के तहत बदायूं में सुनाई गई यह पहली सजा है।
कैसे सामने आया मामला
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक इसी साल 27 मई को बिल्सी क्षेत्र के एक गांव में रहने वाले शख्स ने थाने पहुंचकर बताया था कि उसकी पत्नी और 10 वर्षीय बेटी को साकिर हुसैन बहलाकर ले गया है। शिकायत मिलते ही पुलिस टीमों ने तलाश तेज कर दी। लगभग आठ दिन की भागदौड़ के बाद जब पुलिस ने घेराबंदी शुरू की तो आरोपी मां-बेटी को रास्ते में ही छोड़कर मौके से फरार हो गया। बाद में पुलिस ने महिला और उसकी बेटी को सुरक्षित बरामद कर लिया।
अदालत में महिला ने क्या बताया
पीड़िता ने अदालत में दिए अपने बयान में कहा कि आरोपी उसे और उसकी बेटी को बाइक पर बैठाकर कासगंज जिले के सिढ़पुरा इलाके के एक मकान में ले गया था, जहां दोनों को कई दिनों तक कैद रखा गया। महिला के मुताबिक साकिर हुसैन ने बेटी की जान को खतरा बताकर पीड़िता के साथ बार-बार दुष्कर्म किया, यह सिलसिला करीब 3 महीने तक चलता रहा। इस दौरान वह रोजाना जबरन नमाज पढ़वाता और मजहब छोड़ने का दबाव बनाता रहा। महिला ने यह भी बताया कि खाने में जबरन मांस परोसा जाता था और आरोपी ने पीड़िता व उसके भाई के हाथ पर लिखा हिंदू नाम तेजाब डालकर मिटा दिया था।
जांच से लेकर फैसले तक का सफर
महिला के बयान के आधार पर पुलिस ने पहले दर्ज मामले में दुष्कर्म, अवैध बंधक बनाने, मारपीट और धमकी देने की धाराओं के साथ उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम की धाराएं भी जोड़ दीं। साकिर हुसैन को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया, जहां वह मुकदमे के दौरान बंद रहा। पुलिस ने दिसंबर 2025 में जांच पूरी करते हुए अदालत में आरोपपत्र पेश किया, इसके बाद फरवरी 2026 से मुकदमे की सुनवाई शुरू हुई। सोमवार को दोनों पक्षों की बहस पूरी होने के बाद फास्ट ट्रैक कोर्ट ने साकिर हुसैन को सभी आरोपों में दोषी ठहराते हुए 10 साल जेल और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।




















