उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले से एक बेहद दर्दनाक मामला सामने आया है, जहां रामकोला थाना इलाके के अंतर्गत आने वाले बरवा बाजार गांव के भरपट्टी टोले में एक ही घर के तीन मासूम बच्चों का स्वास्थ्य अचानक खराब हो गया। परिजनों के अनुसार, रात को चिकन खाने के बाद यह समस्या शुरू हुई थी। सुबह होते-होते स्थिति इतनी नाजुक हो गई कि अस्पताल ले जाने के दौरान सात साल के एक बच्चे ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। इस अनहोनी के बाद से पीड़ित परिवार में मातम पसरा हुआ है, जबकि बाकी बच्चों के उपचार और मामले की जांच के लिए स्वास्थ्य महकमे ने गांव में डेरा डाल दिया है।
सुबह अचानक बिगड़ने लगी मासूमों की तबीयत
पीड़ित परिवार के सदस्यों ने पूरी घटना का विवरण देते हुए बताया कि रात के समय परिवार में चिकन बनाया गया था। भोजन कुल 8 सदस्यों ने किया था, जिनमें ये तीनों बच्चे भी शामिल थे। भोजन करने के बाद सभी लोग सामान्य रूप से सोने चले गए थे। किसी को भी रात में किसी तरह की असहजता महसूस नहीं हुई। अगली सुबह जब बच्चे जागे, तो एक-एक करके तीनों की शारीरिक स्थिति बिगड़ने लगी। बच्चों को पेट में तेज दर्द, असहजता और अन्य परेशानियां होने लगीं। बच्चों की लगातार बिगड़ती हालत देख घरवाले घबरा गए और बिना कोई देर किए तीनों को लेकर पास के रामकोला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) पहुंचे।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टरों ने फौरन बच्चों की स्थिति को देखते हुए प्राथमिक चिकित्सा शुरू की। जांच के दौरान आकाश नामक बच्चे की शारीरिक स्थिति काफी ज्यादा नाजुक पाई गई, जिसे देखते हुए डॉक्टरों ने उसे तत्काल जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। इसके साथ ही अन्य बच्चों को भी उच्च चिकित्सा सुविधा के लिए ले जाया जाने लगा। लेकिन जिला अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते में 7 साल के मासूम अखिलेश की सांसें थम गईं। चिकित्सकों द्वारा बच्चे को मृत घोषित करते ही परिजनों की चीख-पुकार से अस्पताल परिसर गूंज उठा। मासूम की असमय मौत से पूरे परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल है।
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने संभाला मोर्चा, लिए गए नमूने
एक बच्चे की दुखद मौत और अन्य मासूमों की हालत बिगड़ने की सूचना मिलते ही क्षेत्रीय स्वास्थ्य प्रशासन पूरी तरह हरकत में आ गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कोटवा सीएचसी के प्रभारी रजनीश श्रीवास्तव और वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. मनोज राय की अगुवाई में चिकित्सकों का एक दल तुरंत बरवा बाजार के भरपट्टी टोले पहुंचा। मेडिकल टीम ने गांव में पहुंचकर बीमार बच्चों के स्वास्थ्य की गहन पड़ताल की और घर के अन्य सदस्यों का भी शारीरिक परीक्षण किया, जिन्होंने उस रात वही भोजन ग्रहण किया था।
इस पूरे मामले पर कोटवा सीएचसी के प्रभारी रजनीश श्रीवास्तव ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीमें पूरे परिवार और प्रभावित बच्चों की लगातार निगरानी कर रही हैं। चिकित्सा दल ने चिकित्सीय जांच और परीक्षण के लिए जरूरी नमूने एकत्र कर लिए हैं। उन्होंने आगे बताया कि भोजन विषाक्तता (फूड प्वाइजनिंग) की सटीक वैज्ञानिक पुष्टि के लिए बच्चे के स्टूल और उस समय तैयार किए गए भोजन के नमूने की आवश्यकता होती है। हालांकि, मौके पर भोजन का अवशेष उपलब्ध नहीं हो सका। इसके बावजूद विभाग ने उपलब्ध मेडिकल सैंपल हासिल कर उन्हें आगे की जांच के लिए सेंटिनल लैब भेज दिया है। रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह साफ हो सकेगी। इधर, घटना के बाद से पूरे इलाके में गहरा शोक और चिंता का माहौल बना हुआ है।






















