उत्तर प्रदेश में आने वाले दिनों में मौसम का मिजाज पूरी तरह बदलने वाला है, क्योंकि राज्य के कई हिस्सों में तेज हवाओं के साथ भारी बारिश की संभावना जताई गई है। IMD ने राज्य के 10 जिलों के लिए आंधी-तूफान और भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है, जहां हवा की गति 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। 22 जुलाई से 27 जुलाई तक चलने वाला बारिश का यह दौर कृषि क्षेत्र के लिए बड़ी राहत लेकर आ सकता है, जो इस सीजन में बारिश की कमी से जूझ रहा था।
दस जिलों में आंधी-तूफान के साथ येलो अलर्ट
दिल्ली-NCR समेत देश के विभिन्न हिस्सों में मौसम का मिजाज बदल गया है। उत्तर प्रदेश के कई जिलों में कल सुबह हल्की बारिश दर्ज की गई, जिसके बाद से ही मौसम खुशनुमा बना हुआ है। मौसम पूर्वानुमान के अनुसार, अगले तीन से चार दिनों तक राज्य में भारी बारिश का दौर जारी रहने के आसार हैं। इस दौरान प्रयागराज और मिर्जापुर सहित करीब 10 जिलों में आंधी-तूफान के साथ मूसलाधार बारिश हो सकती है। इसे देखते हुए इन क्षेत्रों में येलो अलर्ट घोषित किया गया है, जहां 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की आशंका है।
खेती-किसानी के लिए वरदान साबित होगी यह बारिश
मानसून की यह वापसी उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इस साल जून के महीने में पूरे देश में सामान्य से 40 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई थी, जिसने फसलों की बुवाई को लेकर चिंताएं बढ़ा दी थीं। हालांकि, जुलाई के पहले सप्ताह में दक्षिण और उत्तर-पूर्वी राज्यों में हुई भारी बारिश से स्थिति में कुछ सुधार हुआ था, लेकिन दूसरे हफ्ते में पड़े सूखे ने खेती-बारी के संकट को फिर से गहरा कर दिया था। अब मौसम की इस नई करवट से फसलों को नया जीवन मिलने की उम्मीद जगी है।
जिलेवार पूर्वानुमान और मौसम का पूरा टाइमलाइन
मौसम विभाग की ओर से 22 से 27 जुलाई के बीच राज्य के विभिन्न हिस्सों में भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। इस चेतावनी के दायरे में मुख्य रूप से झांसी, ललितपुर, जालौन, हमीरपुर, महोबा, बांदा, चित्रकूट, कौशांबी, प्रयागराज, मिर्जापुर और सोनभद्र समेत कई जिले शामिल हैं। पूर्वी उत्तर प्रदेश में 23 और 24 जुलाई को व्यापक स्तर पर बारिश होने की संभावना है, जबकि 26 और 27 जुलाई को भारी बारिश का अनुमान लगाया गया है। दूसरी ओर, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 25 से 27 जुलाई के दौरान वर्षा का दौर लगातार जारी रहेगा। इसके साथ ही पहाड़ी क्षेत्रों में बादल फटने, अचानक बाढ़ आने और भूस्खलन जैसी आपदाओं को लेकर भी सतर्क रहने को कहा गया है।



















