पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री दिलीप घोष ने भारतीय निर्वाचन आयोग पर सवाल खड़े कर रहे विपक्षी दलों, विशेषकर कांग्रेस पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। कोलकाता में 30 सितंबर को संवाददाताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने विपक्षी नेताओं की नीयत पर उंगली उठाई और कहा कि लगातार मिल रही चुनावी नाकामियों के कारण विरोधी दल हताशा में संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बना रहे हैं।
संवैधानिक संस्थाओं की साख पर दोहरे मापदंड
विपक्षी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्होंने याद दिलाया कि केंद्र की सत्ता में कांग्रेस पार्टी पूरे एक दशक तक काबिज रही थी। उस दौरान भी यही चुनाव आयोग निष्पक्ष मतदान करा रहा था और उसी प्रशासनिक व्यवस्था के तहत कांग्रेस विजयी होकर सरकार चला रही थी। उन्होंने सवाल उठाया कि मौजूदा समय में भी जिन सूबों में कांग्रेस शासन कर रही है, वहां भी तो इसी चुनावी तंत्र के जरिए जनादेश हासिल हुआ है। उनका कहना था कि जब अपनी जीत होती है तब व्यवस्था सही लगती है, लेकिन पराजय का दौर शुरू होते ही आयोग पर लांछन लगाए जाने लगते हैं। जब खुद संगठन की कमान संभालने वाले नेता ही चुनाव हार रहे हों, तो समूचे दल का पतन स्वाभाविक है।
आयोग के मंच के बजाय सड़क पर सियासत
मतदान मशीनों और वोटिंग लिस्ट से जुड़े विवादों पर बात रखते हुए उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन, वीवीपैट या मतदाता सूचियों से जुड़ी किसी भी तरह की आपत्ति के निपटारे के लिए चुनाव आयोग के पास बकायदा कानूनी सुनवाई की व्यवस्था मौजूद है। यदि विपक्ष को वाकई किसी तकनीकी खामी या धांधली का अंदेशा है, तो वे निर्धारित कानूनी मंच पर साक्ष्य सहित उपस्थित क्यों नहीं होते। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दल केवल भ्रम फैलाकर आम मतदाताओं को गुमराह करना चाहते हैं। घोष के मुताबिक मतदाता अब यह भलीभांति जान चुके हैं कि विपक्ष केवल राजनीतिक बयानबाजी में जुटा है और उसके पास धरातल पर दिखाने के लिए कोई वास्तविक कामकाज नहीं है, जबकि आवाम हमेशा विकास कार्यों को प्राथमिकता देने वालों का ही समर्थन करती है।
एसआईआर प्रक्रिया और विपक्षी नेताओं की दिल्ली यात्रा
मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण यानी एसआईआर की कवायद का बचाव करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रशासनिक जांच के माध्यम से फर्जी प्रविष्टियों को बाहर किया गया है। जिन लोगों के पास वैध भारतीय नागरिकता या आवश्यक पहचान दस्तावेज नहीं हैं, उन्हें सूची से छांटा जा रहा है। ऐसे अनाधिकृत व्यक्तियों के नाम हटाए जाने पर किसी भी राजनीतिक दल द्वारा शोक प्रकट करना पूरी तरह व्यर्थ है। वहीं दूसरी ओर, विपक्षी 'इंडिया' गठबंधन के विचार-विमर्श के सिलसिले में पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और एआईटीएमसी के सांसद अभिषेक बनर्जी के राष्ट्रीय राजधानी दौरे को भी उन्होंने औचित्यहीन करार दिया। उनके अनुसार इन नेताओं के दिल्ली आने-जाने की हलचल केवल खबरों तक सीमित है और इस कवायद से कोई ठोस नतीजा निकलने वाला नहीं है।



















