पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में एक जाने-माने निजी शिक्षण संस्थान के भीतर सहपाठियों के बीच उपजा मामूली तनाव खूनी संघर्ष में तब्दील हो गया। साउथ पॉइंट स्कूल में पढ़ने वाले एक छात्र ने एक अक्टूबर को अपने ही सहपाठी पर धारदार चाकू से जानलेवा वार कर दिया। इस अचानक हुए हमले में पीड़ित छात्र की गर्दन पर गहरा घाव हुआ, जिसके चलते उसे आनन-फानन में अस्पताल ले जाना पड़ा। डॉक्टरों को उसकी हालत नाजुक देखते हुए तत्काल गर्दन की सर्जरी करनी पड़ी।
विवाद की जड़ बनी किताब और शिक्षक से शिकायत
इस सनसनीखेज वारदात के पीछे की वजह महज एक स्कूली किताब को लेकर हुआ मामूली झगड़ा बताई जा रही है। पीड़ित छात्र के पिता के अनुसार, घटना से ठीक एक दिन पहले दोनों छात्रों के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी हुई थी। इसी दौरान आरोपी छात्र ने उनके बेटे की किताब फाड़ दी थी। किताब फटने के बाद पीड़ित बच्चे ने इस पूरे मामले की जानकारी अपनी कक्षा की शिक्षिका को दी थी। आशंका जताई जा रही है कि शिक्षिका से की गई इसी शिकायत की वजह से आरोपी छात्र के मन में बदले और नाराजगी की भावना पैदा हो गई थी। इसी रंजिश के चलते अगले ही दिन उसने स्कूल परिसर में इस घातक हमले को अंजाम दे डाला।
बुधवार दोपहर स्कूल से आया फोन, अस्पताल पहुंचे परिजन
बुधवार दोपहर के वक्त पीड़ित छात्र के परिजनों को स्कूल प्रशासन की तरफ से एक आपातकालीन फोन कॉल आया। फोन पर बेटे के गंभीर रूप से घायल होने और अस्पताल में भर्ती कराए जाने की सूचना मिलते ही परिवार के होश उड़ गए। परिजन बिना कोई वक्त गंवाए तुरंत अस्पताल पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उन्हें बताया कि घाव गहरा होने की वजह से फौरन ऑपरेशन करना पड़ेगा। छात्र को मेडिकल टीम की निगरानी में ऑपरेशन थिएटर ले जाया गया, जहां घंटों चली सर्जरी के बाद उसे आईसीयू और फिर वार्ड में शिफ्ट किया गया। परिवार के लोग अपने मासूम बच्चे की सलामती को लेकर बेहद चिंतित हैं और उनका पूरा ध्यान बच्चे के स्वास्थ्य सुधार पर लगा हुआ है।
परिजनों ने स्कूल प्रशासन पर नहीं साधा निशाना
आमतौर पर शिक्षण संस्थानों में ऐसी वारदातें होने के बाद अभिभावक स्कूल के प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाते हैं, लेकिन इस मामले में पीड़ित छात्र के पिता का रुख काफी संतुलित नजर आया। उन्होंने कहा कि घटना के तत्काल बाद स्कूल प्रबंधन ने बच्चे को अस्पताल पहुंचाने और प्राथमिक उपचार दिलाने में जो तत्परता दिखाई, उससे वे संतुष्ट हैं। पिता का कहना है कि वे इस संवेदनशील मोड़ पर स्कूल पर किसी भी तरह का सीधा आरोप नहीं लगाना चाहते। उनका एकमात्र लक्ष्य अपने बेटे को जल्द से जल्द पूरी तरह स्वस्थ देखना है।
आरोपी बच्चे के सुधार और सही मार्गदर्शन की अपील
पीड़ित के पिता ने न सिर्फ अपने बच्चे के ठीक होने की कामना की, बल्कि हमलावर छात्र के भविष्य को लेकर भी संजीदगी दिखाई। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे आरोपी छात्र के बारे में कोई कटुता भरी बातें नहीं कहना चाहते। उनका मानना है कि इतनी कम उम्र के बच्चों में इस तरह का हिंसक व्यवहार बेहद गंभीर विषय है। उस बच्चे को भी उचित काउंसलिंग, सही दिशा और सकारात्मक मार्गदर्शन की सख्त जरूरत है ताकि समय रहते उसके भीतर के गुस्से को शांत किया जा सके और भविष्य में इस तरह की जानलेवा घटनाएं दोबारा किसी के साथ न दोहराई जाएं।
कैंपस में धारदार हथियार पहुंचने पर उठे सवाल
इस अप्रत्याशित वारदात के बाद स्कूल सुरक्षा के बुनियादी ढांचे को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सबसे बड़ा और संवेदनशील सवाल यह है कि कड़े सुरक्षा नियमों और निगरानी के बावजूद कोई नाबालिग छात्र अपने बैग में धारदार चाकू लेकर क्लासरूम तक कैसे पहुंच गया। इसके अलावा घटना के वक्त आसपास मौजूद लोगों की भूमिका और दोनों बच्चों के बीच झगड़े के विकराल रूप लेने की पूरी समयसीमा की विस्तृत पड़ताल की जा रही है। स्कूल प्रबंधन और संबंधित जांच अधिकारी पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने में जुटे हैं ताकि यह साफ हो सके कि क्लासरूम के भीतर उस वक्त क्या माहौल था।
अभिभावकों में गहराया डर, सुरक्षा पुख्ता करने की मांग
प्रतिष्ठित संस्थान में चाकूबाजी की खबर फैलते ही अन्य छात्रों के अभिभावकों और पूरे स्कूल समुदाय में गहरा रोष और घबराहट देखी जा रही है। परिजन अब इस बात को लेकर बेहद चिंतित हैं कि अगर स्कूलों के अंदर बच्चे सुरक्षित नहीं हैं, तो उन्हें कहां सुरक्षित माना जाए। कई अभिभावक अब स्कूल परिसर में प्रवेश के समय बैग की नियमित जांच, मेटल डिटेक्टर लगाने और कक्षाओं में सख्त निगरानी रखने के ठोस उपाय करने की मांग कर रहे हैं। फिलहाल घायल छात्र अस्पताल में उपचाराधीन है और उसकी सेहत में सुधार से जुड़ी हर ताजा अपडेट पर डॉक्टरों की नजर बनी हुई है।



















