भूमध्य सागर क्षेत्र में मिस्र के रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण दामियत्ता बंदरगाह पर बुधवार को एक बड़ा हादसा सामने आया, जहां एक शक्तिशाली विस्फोट के बाद दो बड़े एलएनजी (LNG) जहाजों में भीषण आग लग गई। ईरान से लगभग 3000 किलोमीटर दूर हुई इस अचानक घटना ने पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच वैश्विक समुद्री सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति तंत्र पर गंभीर चिंताएं खड़ी कर दी हैं। जिन जहाजों में आग लगी, उनमें अमरीकी कंपनी एनर्जोस इंफ्रास्ट्रक्चर का फ्लोटिंग गैस स्टोरेज टैंकर 'एनर्जोस विंटर' और ग्रीस की जहाजरानी कंपनी गैसलॉग द्वारा संचालित एलएनजी कैरियर 'गैसलॉग सलेम' शामिल हैं। इस घटना के तुरंत बाद बंदरगाह परिसर में आपातकालीन अलर्ट जारी कर दिया गया।
विस्फोट की प्रकृति और शुरुआती जांच के बिंदु
दामियत्ता बंदरगाह के एलएनजी टर्मिनल पर हुए इस धमाके को शुरुआती विश्लेषणात्मक रिपोर्टों में एक संभावित ड्रोन हमला माना जा रहा है। ब्रिटिश समुद्री सुरक्षा संस्थान एंब्रे की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, अमरीकी स्वामित्व वाले फ्लोटिंग स्टोरेज टैंकर को किसी अज्ञात ड्रोन द्वारा निशाना बनाए जाने की मजबूत आशंका है। एक अन्य अंतरराष्ट्रीय समुद्री ट्रैकिंग संस्था ने भी अपने प्राथमिक आकलन में इस घटना को ड्रोन स्ट्राइक से जोड़कर देखा है। हालांकि, मिस्र के स्थानीय जांच अधिकारियों और सुरक्षा एजेंसियों ने अब तक इस बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है कि विस्फोट का मुख्य कारण ड्रोन था या कोई अन्य तकनीकी विफलता। इस घटना के पीछे यमन के हूती विद्रोहियों का हाथ है या ईरान का अप्रत्यक्ष जुड़ाव, इस पर विभिन्न सुरक्षा एजेंसियां जांच में जुटी हुई हैं।
राहत कार्य और चालक दल की सुरक्षा स्थिति
हादसे के तुरंत बाद मिस्र के पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्थिति संभालने के लिए अपनी आपातकालीन प्रतिक्रिया योजना को लागू किया। फायरफाइटर टीमों की मुस्तैदी के कारण कुछ ही समय के भीतर दोनों जहाजों में लगी आग पर पूरी तरह से काबू पा लिया गया। मंत्रालय की ओर से जारी आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया गया है कि इस घटना में किसी भी क्रू मेंबर की जान नहीं गई है और न ही कोई गंभीर रूप से घायल हुआ है। शिपिंग सर्विस देने वाली कंपनी इंचकेप के अनुसार, एलएनजी टर्मिनल क्षेत्र में धमाका हुआ था, जिसके बाद सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए दोनों जहाजों को बंदरगाह के मुख्य हिस्से से हटाकर सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया है, ताकि अन्य टर्मिनलों पर परिचालन फिर से शुरू किया जा सके।
एनर्जोस इंफ्रास्ट्रक्चर का बयान और वाशिंगटन की चेतावनी
अमरीकी स्वामित्व वाले टैंकर एनर्जोस विंटर का संचालन करने वाली कंपनी एनर्जोस इंफ्रास्ट्रक्चर ने राहत की पुष्टि करते हुए कहा कि जहाज पर तैनात सभी कर्मचारी पूरी तरह सुरक्षित हैं और उन्हें बचा लिया गया है। हालांकि, कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि अभी तक प्रत्यक्ष रूप से यह स्थापित नहीं हो पाया है कि जहाज पर सीधे ड्रोन से प्रहार हुआ था अथवा धमाका पास के किसी ढांचे में हुआ था। वर्तमान में किसी भी सैन्य या उग्रवादी संगठन ने इस हमले की सीधी जिम्मेदारी नहीं ली है। दूसरी ओर, पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बयान जारी कर कहा कि उन्हें दामियत्ता बंदरगाह घटना की पूरी विस्तृत जानकारी दे दी गई है। डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए कि इस कदम के पीछे ईरान की भूमिका हो सकती है, साथ ही चेतावनी दी कि यदि इस दावे के प्रमाण मिलते हैं तो अमरीका इसका कड़ा और प्रभावी जवाब देगा। हालांकि, ईरान की सरकार या सेना की तरफ से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
स्वेज नहर और वैश्विक ऊर्जा व्यापार पर बढ़ता खतरा
दामियत्ता बंदरगाह स्वेज नहर के मुहाने के बेहद करीब स्थित है, जो भूमध्य सागर को लाल सागर से जोड़ने वाला मिस्र का एक प्रमुख व्यापारिक एवं ऊर्जा हब है। अमरीका और ईरान के बीच गहराते संघर्ष के कारण पहले होर्मुज स्ट्रेट और फिर लाल सागर का जलमार्ग जहाजों के लिए असुरक्षित बना हुआ था, किंतु अब भूमध्य सागर के पास हुई इस घटना ने वैश्विक शिपिंग कंपनियों की चिंताएं काफी बढ़ा दी हैं। संभावित हमलों के डर से कई प्रमुख अंतरराष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स और शिपिंग कंपनियों ने अपने व्यापारिक जहाजों के मार्ग बदलने शुरू कर दिए हैं। समुद्री रास्तों में इस तरह के बदलावों से न केवल यात्रा का समय और परिचालन लागत बढ़ रही है, बल्कि दुनिया भर में कच्चे तेल, गैस और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति श्रृंखला पर भी प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका गहरा गई है।



















