अंकारा में आयोजित नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा खुफिया अलर्ट जारी किया गया था। इजराइली खुफिया अधिकारियों ने व्हाइट हाउस और अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों को आगाह किया था कि ईरान डोनाल्ड ट्रंप को निशाना बनाने की साजिश रच सकता है। इन चेतावनियों के आधार पर सीक्रेट सर्विस ने अत्यधिक सावधानी बरतते हुए तुर्की में ट्रंप के आवागमन के दौरान विशेष सुरक्षा प्रबंध किए और उन्हें एक विमान से दूसरे विमान में स्थानांतरित किया।
इज़राइली चेतावनियों में संभावित हमलों का ब्योरा
अमेरिकी अधिकारियों और मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों के अनुसार, इज़राइल द्वारा भेजी गई सूचनाओं में कई तरह के संभावित खतरों का उल्लेख था। इसमें दावा किया गया था कि ईरान स्नाइपर, धारदार चाकू या कंधे से दागी जाने वाली मिसाइलों के जरिए हमला कर सकता है। सबसे विस्तृत अलर्ट जुलाई में तुर्की की राजधानी अंकारा में नाटो बैठक से ठीक पहले दिया गया था। इजराइली पक्ष ने आगाह किया था कि एयर फ़ोर्स वन से यात्रा के दौरान विमान पर मिसाइल से निशाना साधा जा सकता है। इसके जवाब में अमेरिकी एजेंसियों ने एक विशेष छलावा ऑपरेशन चलाया, जिसके तहत ट्रंप को किसी अन्य विमान में ले जाया गया।
कासिम सुलेमानी का बदला और अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की आशंकाएं
अमेरिकी खुफिया समुदाय लंबे समय से मानता रहा है कि ईरान वर्ष 2020 में अमेरिकी ड्रोन हमले में मारे गए अपने सैन्य कमांडर कासिम सुलेमानी की मौत का प्रतिशोध लेना चाहता है। हालांकि, इजराइल द्वारा दिए गए इन विशिष्ट अलर्ट्स पर अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए पूरी तरह आश्वस्त नहीं थी। सीआईए पिछले साल की शुरुआत से ही इजराइली खुफिया तंत्र से मिले कुछ विशिष्ट इनपुट्स की स्वतंत्र पुष्टि नहीं कर पाई थी। पूर्व अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, ईरान से जुड़े कई कथित साजिशों के दावों पर अमेरिकी इंटेलिजेंस कम्युनिटी का भरोसा काफी कम था।
परमाणु आकलन और रणनीतिक मतभेद
यह घटनाक्रम अमेरिका और इज़राइल के बीच ईरान को लेकर बने व्यापक खुफिया मतभेदों को भी उजागर करता है। इस साल की शुरुआत में अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का आकलन था कि तेहरान सक्रिय रूप से परमाणु हथियार विकसित नहीं कर रहा है। इसके विपरीत इज़राइल का निरंतर दावा था कि ईरान से तत्काल खतरा बना हुआ है। इन भिन्न आकलनों के बावजूद डोनाल्ड ट्रंप ने इस वर्ष फरवरी में ईरान के खिलाफ सैन्य हमले के आदेश दिए थे।
तुर्की खुफिया एजेंसी का रुख
तुर्की के खुफिया अधिकारियों ने इस पूरे मामले पर अपना अलग रुख व्यक्त किया है। तुर्की की सुरक्षा एजेंसियों के पास इज़राइल की ओर से दी गई उस चेतावनी का समर्थन करने वाला कोई स्वतंत्र प्रमाण नहीं था, जिसमें ईरान द्वारा ट्रंप को निशाना बनाने की बात कही गई थी। तुर्की ने अपनी यह जानकारी अमेरिकी अधिकारियों के साथ साझा की थी। इसके बावजूद इन घटनाक्रमों से स्पष्ट होता है कि तेहरान के साथ बढ़ते तनाव के दौर में इज़राइली चेतावनियों का अमेरिकी राष्ट्रपति की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े फैसलों पर गहरा प्रभाव पड़ा था।



















