देश के पूर्वोत्तर इलाके का एक बेहद महत्वपूर्ण राज्य असम इस वक्त एक भयंकर प्राकृतिक आपदा का सीधा सामना कर रहा है। अचानक आई भयानक बाढ़ के कारण पूरे राज्य के एक बड़े हिस्से में चारों तरफ हाहाकार मचा हुआ है। इस जल प्रलय ने नौ लाख से अधिक निर्दोष नागरिकों के जीवन को बुरी तरह से प्रभावित कर दिया है। लोग अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर भागने को मजबूर हो गए हैं, जिससे पूरी की पूरी व्यवस्था चरमरा गई है।
गृह मंत्री ने दिया पूरी मदद का भरोसा
इस विकट और चुनौतीपूर्ण परिस्थिति को देखते हुए, नई दिल्ली ने भी तेजी से कदम उठाए हैं। गुरुवार के दिन देश के गृह मंत्री अमित शाह ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के साथ टेलीफोन पर एक विस्तृत बातचीत की। इस अहम संवाद के दौरान, गृह मंत्री ने राज्य भर की जमीनी हकीकत की गहराई से जानकारी ली। उन्होंने राज्य सरकार को स्पष्ट रूप से आश्वस्त किया है कि संकट की इस भयानक घड़ी में केंद्र सरकार हर संभव मदद और संसाधन मुहैया कराएगी।
नुकसान का आंकलन करेगी केंद्रीय टीम
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने अपने सोशल मीडिया मंच के माध्यम से प्रदेश के सभी नागरिकों को यह जानकारी दी कि जल्द ही केंद्र सरकार का एक विशेष अंतर-मंत्रालयी दल असम पहुंचने वाला है। यह केंद्रीय टीम सीधे बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों का सघन दौरा करेगी और वहां मची तबाही के वास्तविक स्वरूप का बारीकी से आंकलन करेगी। इसी जांच रिपोर्ट के आधार पर, राहत कार्यों, प्रभावित लोगों के उचित पुनर्वास और नष्ट हो चुके बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण के लिए केंद्र से जरूरी सहायता राशि जारी की जाएगी। मुख्यमंत्री ने इस तत्परता के लिए केंद्रीय नेतृत्व का विशेष रूप से आभार व्यक्त किया है।
बादल फटने से आई भयानक तबाही
इस विनाशकारी और जानलेवा बाढ़ का मुख्य कारण ऊपरी इलाकों में अचानक क्लाउडबर्स्ट यानी बादल फटने की घटनाएं और बिना रुके लगातार हो रही मूसलाधार बारिश रही है। मौसम विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, असम के कई अलग-अलग हिस्सों में सामान्य के मुकाबले 436 प्रतिशत से भी अधिक वर्षा दर्ज की गई है। इस अप्रत्याशित और भीषण बारिश ने राज्य के उन सुरक्षित क्षेत्रों को भी पूरी तरह से जलमग्न कर दिया है, जहां पहले कभी बाढ़ आने का कोई पिछला इतिहास या अंदेशा नहीं रहा था।
जान-माल का भारी नुकसान
राज्य भर से तबाही के जो डरावने आंकड़े सामने आ रहे हैं, वे वाकई में बेहद चिंताजनक हैं। प्रशासन के मुताबिक पूरे प्रदेश के 25 जिलों में फैले 1800 से भी अधिक गांव इस समय पूरी तरह से पानी में डूबे हुए हैं। इस बड़ी प्राकृतिक त्रासदी ने अब तक 41 मासूम लोगों की दर्दनाक जान ले ली है। इसके अलावा, राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले हजारों की संख्या में मवेशी भी तेज पानी के बहाव में बहकर अपनी जान गंवा चुके हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।
युद्ध स्तर पर चल रहा बचाव अभियान
लोगों की अनमोल जान बचाने के लिए राज्य में दिन-रात एक बड़े स्तर का बचाव अभियान लगातार चलाया जा रहा है। भारतीय वायुसेना, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल के बहादुर जवान दूसरी सहयोगी एजेंसियों के साथ मिलकर 24 घंटे मोर्चे पर पूरी ताकत के साथ डटे हुए हैं। बाढ़ की वजह से सड़क मार्ग से पूरी तरह से कटे हुए सुदूर और दुर्गम इलाकों में फंसे नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए अब नावों और वायुसेना के खास हेलीकॉप्टरों की लगातार मदद ली जा रही है।
राहत शिविरों में मिल रहा विस्थापितों को आश्रय
अपना सब कुछ गंवाकर बेघर हुए हजारों मजबूर परिवारों को एक सुरक्षित ठिकाना मुहैया कराने के मकसद से स्थानीय प्रशासन ने तेजी दिखाते हुए 148 से अधिक अस्थायी राहत शिविरों का निर्माण किया है। वर्तमान में इन कैंपों के भीतर लगभग 30 हजार विस्थापित लोगों ने मजबूरी में शरण ले रखी है। सरकार की तरफ से इन सभी राहत शिविरों में रहने वाले लोगों को पीने का साफ पानी, भोजन और रोजमर्रा की अन्य बेहद जरूरी वस्तुएं नियमित तौर पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। सबसे ज्यादा नुकसान झेलने वाले जिलों में अब तक तीन लाख किलोग्राम से ज्यादा चावल और अन्य राहत सामग्री सफलतापूर्वक पहुंचाई जा चुकी है।
पुनर्वास और भविष्य की तैयारियां
इन सभी तत्काल राहत कार्यों के साथ-साथ, राज्य सरकार अब केंद्र के सक्रिय सहयोग से प्रभावित परिवारों के लिए एक विस्तृत रिहैबिलिटेशन पैकेज तैयार करने की दिशा में भी गंभीरता से काम कर रही है। भविष्य में इस तरह की अचानक आने वाली प्राकृतिक आपदाओं से बेहतर ढंग से निपटने के लिए एक दीर्घकालिक योजना भी बनाई जा रही है। इसके तहत, ऊपरी क्षेत्रों में होने वाली भारी बारिश और बादल फटने के असर को कम करने के लिए असम सरकार अपने पड़ोसी राज्यों के साथ मिलकर एक मजबूत समन्वय तंत्र विकसित करने पर भी अब विस्तार से चर्चा कर रही है ताकि आने वाले समय में तबाही को टाला जा सके।














