अगर आप मखाना खरीदने की सोच रहे हैं तो यह साल का सबसे सही वक्त है। बिहार के मधुबनी इलाके में इस वक्त 6, 7 और 8 सूता साइज का बढ़िया मखाना 600 रुपये से लेकर 800 से 900 रुपये प्रति किलो के बीच बिक रहा है, जबकि यही मखाना अक्टूबर-नवंबर आते-आते 1200 से 1500 रुपये और प्रीमियम क्वालिटी में 2000 रुपये प्रति किलो तक पहुंच जाता है।
मिथिलांचल क्यों है मखाने का गढ़
बिहार का मिथिलांचल इलाका मखाना उत्पादन का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है। दुनिया भर में जितना भी मखाना खाया जाता है, उसका करीब 80 प्रतिशत हिस्सा अकेले इसी इलाके से आता है। यही वजह है कि यहां के बाजार का उतार-चढ़ाव पूरे देश और दुनिया के मखाना कारोबार पर सीधा असर डालता है। बाजार के सालाना चक्र को देखें तो जुलाई और अगस्त के महीनों में मखाना सबसे सस्ता बिकता है, जबकि अक्टूबर-नवंबर में इसके दाम अपने चरम पर पहुंच जाते हैं।
अभी इतने में मिल रहा है अच्छा मखाना
खाने के लिहाज से 6, 7 और 8 सूता वाला मखाना सबसे बेहतर माना जाता है, और स्थानीय व्यापारी इसे अभी 600 रुपये से शुरू होकर 800 से 900 रुपये प्रति किलो के बीच बेच रहे हैं। सिर्फ दो महीने बाद, जैसे ही त्योहारी सीजन शुरू होगा, यही मखाना 1200 से 1500 रुपये प्रति किलो तक पहुंच जाएगा, और सबसे अच्छी क्वालिटी वाला मखाना 2000 रुपये प्रति किलो तक बिकने लगेगा। यानी कीमतों में दोगुने से भी ज्यादा का उछाल आना तय है।
इस मौसम में दाम कम रहने की वजह
जुलाई-अगस्त में मखाना सस्ता मिलने के पीछे मुख्य कारण सीजन की अदला-बदली है। इन दो महीनों में पुराना मखाना सीजन पूरी तरह खत्म हो चुका होता है, जबकि खेतों से नया मखाना निकलना अगले महीने यानी सितंबर से शुरू होगा। इस बीच व्यापारी अपने पास बचे पुराने स्टॉक को जल्दी निकालने के लिए दाम कम रखते हैं, ताकि नया माल आने से पहले गोदाम खाली हो जाएं। जैसे ही नया मखाना बाजार में उतरता है, बड़े व्यापारी और फूड प्रोसेसिंग कंपनियां उसे देश-विदेश भेजने और तरह-तरह के मखाना प्रोडक्ट बनाने के लिए भारी मात्रा में खरीदकर स्टोर कर लेती हैं। यही जमाखोरी आगे चलकर दाम बढ़ने की बुनियाद बनती है।
त्योहारों में क्यों उछलती है कीमत
अगस्त बीतने के बाद अगले दो-तीन महीनों में मखाने के दाम तेजी से ऊपर चढ़ते हैं। नवरात्रि, दीपावली, मिथिलांचल के मशहूर लोक पर्व कोजगरा और महापर्व छठ के दौरान मखाने की मांग एकदम से बढ़ जाती है, क्योंकि इन मौकों पर पूजा-पाठ और व्रत में मखाने का खूब इस्तेमाल होता है। मांग बढ़ते ही व्यापारी दाम भी बढ़ा देते हैं, और यही मखाना दोगुने से लेकर तीन गुने दाम तक बिकने लगता है।
एक्सपर्ट की सलाह, अभी खरीद लें और स्टोर करें
एक्सपर्ट अनिल कुमार प्रसाद के मुताबिक, इस वक्त मखाने के दाम साल के सबसे निचले स्तर पर हैं, और अगस्त खत्म होते ही अगले दो-तीन महीनों में ये तेजी से ऊपर चढ़ने लगेंगे। उनके मुताबिक समझदारी इसी में है कि जिन घरों में मखाने का नियमित इस्तेमाल होता है, वे अभी इसे खरीदकर स्टोर कर लें, बजाय इसके कि त्योहारी सीजन में दोगुने-तिगुने दाम चुकाएं।
घरेलू इस्तेमाल के लिए यही है सही मौका
जो लोग रोजमर्रा के खाने, पूजा-पाठ या अलग-अलग व्रत-त्योहारों में मखाने का इस्तेमाल करते हैं, उनके लिए जुलाई-अगस्त का यह वक्त साल भर के स्टॉक के लिए सबसे मुफीद है। इस दौरान न सिर्फ दाम सबसे कम होते हैं, बल्कि 6, 7 और 8 सूता जैसी बढ़िया क्वालिटी भी आसानी से उपलब्ध रहती है। अक्टूबर-नवंबर तक इंतजार करने पर वही मखाना दोगुने से ज्यादा दाम पर खरीदना पड़ सकता है, इसलिए जो लोग साल भर मखाना इस्तेमाल करते हैं, उनके लिए अभी खरीदारी करना ही सबसे फायदेमंद सौदा है।



















