मध्य प्रदेश के शिवपुरी अंचल में इस साल बारिश की कमी जरूर रही है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि किसानों की शिमला मिर्च से होने वाली कमाई पर इसका बुरा असर पड़ेगा। उद्यानिकी विभाग के उप संचालक निर्मल कुमार गोयल ने किसानों को भरोसा दिलाया है कि सही तकनीक और सही समय पर रोपाई अपनाकर वे इस सीजन में भी रिकॉर्ड पैदावार ले सकते हैं।
शिवपुरी की जलवायु के लिए मुफीद हैं ये 4 वैरायटियां
गोयल के मुताबिक, शिवपुरी अंचल की मिट्टी और मौसम को देखते हुए किसान मुख्य रूप से चार खास वैरायटियों की शिमला मिर्च उगाते हैं, जो यहां सबसे ज्यादा कामयाब मानी जाती हैं। पिछले सीजनों की तरह इस बार भी इन्हीं वैरायटियों की बदौलत किसानों को अच्छी कमाई होने की उम्मीद जताई जा रही है।
पारंपरिक तरीका छोड़ अब नई तकनीक अपना रहे किसान
नर्सरी तैयार करने के मामले में शिवपुरी के किसान अब पुराने तरीकों से आगे निकल चुके हैं। ज्यादातर किसान अब शेड नेट के नीचे नर्सरी लगा रहे हैं, या फिर प्रोट्रे में कोकोपीट भरकर एक-एक बीज अलग से बो रहे हैं। इस तरीके से पौधे मजबूत और बीमारियों से दूर रहते हैं, जिसका सीधा फायदा आगे चलकर पैदावार में दिखता है।
अगले दो से चार दिन में शुरू होगी रोपाई
एक्सपर्ट ने बताया कि शिवपुरी अंचल में इस समय पौध रोपाई का बिल्कुल सही मौसम चल रहा है। अधिकतर किसानों ने अपनी नर्सरी तैयार कर ली है और अब वे अगले दो से चार दिनों के भीतर खेतों में पौधे लगाना शुरू करने वाले हैं।
कम बारिश की भरपाई करेगी ड्रिप इरिगेशन
चूंकि शिवपुरी में इस बार बारिश सामान्य से काफी कम रही है, इसलिए किसानों को सलाह दी गई है कि वे खेत की नमी पर खास नजर रखें। ड्रिप इरिगेशन यानी टपक सिंचाई जैसी तकनीक अपनाने से कम पानी में भी पौधों को पर्याप्त नमी मिल जाती है, जिससे उनकी बढ़वार और सेहत पर कोई असर नहीं पड़ता। यही वजह है कि विभाग किसानों को इस तकनीक को प्राथमिकता देने की सलाह दे रहा है।
कृषि विभाग का कहना है कि अगर किसान समय पर रोपाई, सही वैरायटी के चुनाव और सिंचाई प्रबंधन का ध्यान रखें, तो कम बारिश जैसी चुनौती के बावजूद शिमला मिर्च की खेती इस बार भी मुनाफे का बड़ा जरिया बन सकती है।


















