देश के महत्वाकांक्षी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के पहले चरण को लेकर नई समयसीमा सामने आ चुकी है। सूरत और वापी के बीच तैयार हो रहे पहले रेलवे सेक्शन का सिविल निर्माण कार्य इसी साल दिसंबर तक पूरा कर लिया जाएगा। इसके तुरंत बाद पटरियों पर ट्रेन उतारने की तैयारी है, जिसके तहत अगले साल अप्रैल अथवा मई के महीने में भारत में ही तैयार की जा रही पहली बुलेट ट्रेन की व्यापक टेस्टिंग और ट्रायल रन की शुरुआत होगी। यदि सभी तकनीकी चरण निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ते हैं, तो अगले साल के मध्य तक इस रूट पर नियमित सेवाओं के शुभारंभ का रास्ता साफ हो जाएगा।
ट्रेन की बनावट और तकनीकी प्रणालियों का स्क्वीज टेस्ट जारी
घरेलू स्तर पर तैयार की जा रही इस हाई-स्पीड रैक की मजबूती सुनिश्चित करने के लिए वर्तमान में स्क्वीज टेस्ट किया जा रहा है। इस विशेष परीक्षण के जरिए ट्रेन की पूरी बॉडी और बाहरी ढांचे की सहनशक्ति तथा दबाव झेलने की क्षमता जांची जाती है। तकनीकी स्तर पर रैक के अधिकांश महत्वपूर्ण हिस्से पहले ही तैयार किए जा चुके हैं, जिनमें बोगी, पैसेंजर कोच, प्रोपल्शन सिस्टम, आधुनिक व्हीकल इलेक्ट्रॉनिक्स और विशेष हाई-स्पीड पहियों का डिजाइन शामिल है। इसके अतिरिक्त ओवरहेड इलेक्ट्रिकल पेंटोग्राफ की बनावट पूरी हो चुकी है और रेलवे स्टेशनों के तकनीकी बुनियादी ढांचे के साथ इन प्रणालियों का डिजिटल इंटीग्रेशन भी सफलतापूर्वक संपन्न हो चुका है।
समुद्र के नीचे बन रही सुरंग का काम दोनों मशीनों के साथ तेज
मुंबई के बीकेसी से ठाणे के बीच समुद्र के नीचे से गुजरने वाली देश की पहली अंडर-सी टनल परियोजना में भी उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। इस इंजीनियरिंग प्रक्रिया के तहत पहले एक अत्यंत गहरा लिफ्ट जैसा शाफ्ट खोदा गया, जिसके जरिए विशाल टनल बोरिंग मशीनों को धरातल के भीतर उतारा गया। शुरुआत में टीबीएम को आवश्यक कोण और सटीक दिशा में स्थिर करना सबसे जटिल चुनौती माना जाता था। अब दोनों टीबीएम मशीनें अपनी निर्धारित दिशा में पूरी तरह सेट हो चुकी हैं और उन्होंने बहुत तीव्र गति से सुरंग की खुदाई का काम शुरू कर दिया है।
चुनौतियों के बावजूद लक्ष्य के करीब पहुंची परियोजना
इस हाई-स्पीड कॉरिडोर का जमीनी निर्माण कार्य वर्ष 2021 में शुरू किया गया था। निर्माण के शुरुआती वर्षों में कोरोना महामारी की पाबंदियों और मार्ग के बेहद जटिल इंजीनियरिंग डिजाइनों के चलते कई तकनीकी बाधाएं सामने आई थीं। इन सभी रुकावटों को पार करते हुए पूरे ट्रैक पर विभिन्न नदियों पर बनने वाले पुलों और आधुनिक सुविधाओं वाले स्टेशनों का ढांचा काफी तेजी से खड़ा किया गया है। निर्माण गति को देखते हुए तय कार्यक्रम के तहत अगले साल तक देशवासियों को इस रूट पर बुलेट ट्रेन की पहली यात्रा का अवसर मिल सकेगा।

















