छत्तीसगढ़ के बालोद में सामने आए खौफनाक तेजाब कांड की गुत्थी को सुलझाते हुए पुलिस ने दो युवकों को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया है। यह वारदात सोमवार को उस वक्त अंजाम दी गई थी जब एक पुलिसकर्मी की 22 साल की बेटी को निशाना बनाया गया। शुरुआती छानबीन में यह बात सामने आई है कि यह हमला किसी तात्कालिक विवाद का नतीजा नहीं था, बल्कि इसके पीछे हफ्तों से तैयार किया जा रहा एक सोची-समझी योजना का जाल था। पुलिस की गिरफ्त में आए दोनों आरोपियों की पहचान नेवारीकला निवासी 20 वर्षीय यश कुमार सोनकर और उसके साथी करण कुंजम के रूप में हुई है, जो बीजापुर के भैरमगढ़ का रहने वाला है।
शादी से मना करने और शक के चलते बुना गया षड्यंत्र
जांच अधिकारियों की पूछताछ में यह तथ्य उजागर हुआ कि पीड़ित युवती और यश कुमार सोनकर के बीच पहले से संपर्क था और दोनों बातचीत करते थे। बीते कुछ समय से यश के मन में यह वहम घर कर गया था कि छात्रा किसी तीसरे शख्स के संपर्क में है। इसी अविश्वास के बीच जब उसने पीड़िता पर विवाह करने के लिए दबाव डालना शुरू किया, तो छात्रा ने साफ मना कर दिया। रिश्ते के प्रस्ताव को ठुकराए जाने और मनगढ़ंत शक से तिलमिलाए यश ने लड़की को नुकसान पहुंचाने की ठान ली। उसने छात्रा का जीवन बर्बाद करने के इरादे से लगभग नब्बे दिनों पहले इस घातक हमले की रूपरेखा तैयार करनी शुरू की थी। इस काम में मदद के लिए उसने अपने पुराने परिचित करण कुंजम को बीजापुर से बालोद बुलवाया।
दुर्ग से खरीदा गया तेजाब और विसर्जन में हमले की नाकाम कोशिश
घटना की कड़ी जोड़ते हुए जांच दल को पता चला कि करण कुंजम 26 सितंबर को योजना में शामिल होने के लिए बालोद पहुंच गया था। इसके ठीक अगले रोज दोनों साथी दुर्ग रवाना हुए, जहां से उन्होंने हमले के लिए तेजाब की खरीदारी की। हमलावरों का पहला इरादा 29 सितंबर की रात को वारदात को अंजाम देने का था, जब शहर भर में गणेश विसर्जन की झांकियों के चलते भारी भीड़ जुटी हुई थी। दोनों का सोचना था कि हुजूम के बीच वारदात करके भागना आसान होगा, मगर चौक-चौराहों पर तैनात पुलिस बल और मुस्तैद गश्त को देखकर उनके हौसले पस्त हो गए। इसके बाद वे अनुकूल अवसर की तलाश में घात लगाए रहे और आखिरकार 5 अक्टूबर को मौका पाते ही उन्होंने छात्रा पर रसायन उड़ेल दिया, जिससे युवती गंभीर जख्मों की शिकार हो गई।
जांच भटकाने की चाल नाकाम, अदालत ने भेजा जेल
वारदात की सूचना मिलते ही पुलिस महकमे ने तेजी दिखाते हुए अलग-अलग विशेष दस्तों को सुराग जुटाने के काम पर लगा दिया। तकनीकी कड़ियों और संपर्कों की पड़ताल के दौरान करण के जरिए यश सोनकर की संदिग्ध भूमिका उजागर हुई। हिरासत में लिए जाने पर यश ने पहले खुद को पीड़िता का शुभचिंतक दिखाकर सहानुभूति बटोरने की कोशिश की और जांच को उलझाने के लिए तीन निर्दोष युवकों के नाम आगे कर दिए। हालांकि जब पुलिस दल ने कड़ाई से जिरह की, तो उसकी बनाई फर्जी कहानी बिखर गई। उसने अपने साथी करण के साथ मिलकर पूरे अपराध की योजना और उस पर अमल की बात स्वीकार कर ली। मंगलवार को विधिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद दोनों आरोपियों को सक्षम न्यायालय के समक्ष पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया।



















