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गेहूं के दूध और देसी घी से तैयार होने वाले मदुगुला हलवे का 130 साल पुराना सफर, दिवाली पर क्यों रहती है भारी मांगखानपान
4 नव॰ 2026, 1:13 pm (7 मिनट पहले)· 0

गेहूं के दूध और देसी घी से तैयार होने वाले मदुगुला हलवे का 130 साल पुराना सफर, दिवाली पर क्यों रहती है भारी मांग

आंध्र प्रदेश के अनाकापल्ली का मदुगुला हलवा 130 वर्षों से मिट्टी के चूल्हों और पारंपरिक विधि से तैयार किया जा रहा है, जिसकी दक्षिण भारत में दिवाली पर जबर्दस्त मांग रहती है।

त्योहारों के मौसम में हर घर में मीठे पकवानों की खुशबू बिखरने लगती है, लेकिन दक्षिण भारत की पारंपरिक मिठास में एक खास पहचान रखने वाला मदुगुला हलवा अपनी विशिष्ट शैली के लिए पहचाना जाता है। आंध्र प्रदेश के अनाकापल्ली जिले के मदुगुला कस्बे में तैयार होने वाला यह पारंपरिक हलवा 130 साल से भी अधिक समय से लोगों की जुबान पर चढ़ा हुआ है। आज जब मिठाई उद्योग में मशीनों और ऑटोमेशन का बोलबाला है, तब भी इस कस्बे में हलवे को पूरी तरह पारंपरिक और देसी अंदाज में ही तैयार किया जाता है। स्थानीय महिलाएं मिट्टी के चूल्हों पर हाथों की मेहनत से इसे बनाती हैं, जिससे इसका स्वाद और बनावट दोनों ही बेहद अनोखे रहते हैं।

गेहूं का दूध निकालने की धैर्यपूर्ण विधि

मदुगुला हलवा तैयार करने की प्रक्रिया में सबसे ज्यादा जरूरत धैर्य और शारीरिक श्रम की होती है। इसे बनाने की शुरुआत साबुत गेहूं को पर्याप्त पानी में अच्छी तरह भिगोने से होती है। जब गेहूं पूरी तरह फूल जाता है, तो उसे आधुनिक ग्राइंडर के बजाय पत्थर की पारंपरिक चक्की या सिलबट्टे पर महीन पीसा जाता है। पीसने के बाद इस मिश्रण को सूती कपड़े से छाना जाता है, जिससे गेहूं का गाढ़ा सफेद सत्व अलग हो जाता है। इसी गाढ़े सत्व को बोलचाल में गेहूं का दूध कहा जाता है, जो इस पूरे हलवे की मुख्य बुनियाद बनता है।

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मिट्टी के चूल्हे और पीतल के बर्तनों में पकाई

हलवे को पकाने की व्यवस्था भी पूरी तरह ग्रामीण परंपरा के अनुसार की जाती है। खुले आंगनों में मिट्टी के चूल्हे तैयार किए जाते हैं, जिनमें लकड़ी की धीमी आग जलाई जाती है। पकाने के लिए पीतल के बड़े बर्तनों का इस्तेमाल होता है। सबसे पहले गुड़ अथवा चीनी को पानी में घोलकर चाशनी तैयार की जाती है। इसके बाद चाशनी में धीरे-धीरे गेहूं का गाढ़ा दूध मिलाया जाता है। मिश्रण को चूल्हे पर चढ़ाने के बाद लंबी करछी से लगातार चलाते रहना पड़ता है, ताकि वह तली में चिपककर जले नहीं। यह पकाई कई घंटों तक बिना रुके चलती रहती है।

शुद्ध देसी घी और मेवों का भरपूर मेल

हलवे की पकाई के दौरान इसमें प्रचुर मात्रा में शुद्ध देसी घी मिलाया जाता है, जो इसे चिकनाहट और समृद्ध स्वाद प्रदान करता है। साथ ही बड़ी तादाद में बारीक कटे काजू और अन्य सूखे मेवे इसमें डाले जाते हैं। धीमी आंच पर लगातार सिकने के बाद जब यह मिश्रण गहरे भूरे रंग की चमकदार जेली जैसा स्वरूप ले लेता है, तब इसे तैयार माना जाता है। पके हुए हलवे को जब चौकोर ट्रे में फैलाया जाता है, तो इसके किनारों और ऊपरी सतह से शुद्ध घी अपने आप तैरता हुआ नजर आता है।

दिवाली पर हफ्तों पहले लगने वाली कतारें

दिवाली जैसे बड़े पर्व पर इस पारंपरिक मिठास की चाहत कई गुना बढ़ जाती है। सिर्फ आंध्र प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे दक्षिण भारत से लोग इसे अपने परिजनों के साथ बांटने और सगे-संबंधियों को तोहफे में भेजने के लिए हफ्तों पहले से अग्रिम बुकिंग कराते हैं। बिना किसी मिलावट, शुद्ध सामग्री और 130 साल पुरानी देसी निर्माण शैली के बल पर मदुगुला हलवा दक्षिण भारत के सबसे प्रतिष्ठित मिष्ठानों में शुमार बना हुआ है।

सवाल-जवाब

मदुगुला हलवा कहां का प्रसिद्ध व्यंजन है?
यह आंध्र प्रदेश के अनाकापल्ली जिले के मदुगुला कस्बे का एक पारंपरिक और बेहद प्रसिद्ध हलवा है।
इस हलवे का इतिहास कितने साल पुराना है?
मदुगुला हलवा बनाने की यह अनूठी देसी परंपरा 130 साल से भी अधिक समय से चली आ रही है।
मदुगुला हलवे का मुख्य आधार क्या होता है?
भीगे हुए साबुत गेहूं को सिलबट्टे पर पीसकर निकाला गया गाढ़ा सफेद दूध यानी सत्व ही इसका मुख्य आधार होता है।
इस हलवे को पकाने के लिए किन बर्तनों और चूल्हों का इस्तेमाल किया जाता है?
इसे मिट्टी के पारंपरिक चूल्हों पर लकड़ी की आंच जलाकर पीतल के बड़े बर्तनों में पकाया जाता है।
पकाई के दौरान इसमें कौन-सी मुख्य सामग्रियां मिलाई जाती हैं?
गेहूं के दूध और चाशनी के साथ इसमें भारी मात्रा में शुद्ध देसी घी, कटे हुए काजू और अन्य मेवे मिलाए जाते हैं।
पूरी तरह तैयार होने पर यह हलवा कैसा दिखाई देता है?
धीमी आंच पर पकने के बाद यह गहरे भूरे रंग की चमकदार जेली जैसा दिखता है और ट्रे में डालते ही इसके ऊपर घी छलकने लगता है।
दिवाली पर इस हलवे के लिए लोग अग्रिम ऑर्डर क्यों देते हैं?
त्योहार पर भारी मांग के कारण लोग परिवार के साथ खाने और रिश्तेदारों को उपहार देने के लिए हफ्तों पहले से इसे बुक कराते हैं।
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