रोज के खाने में शामिल होने वाली दाल बनाने से पहले कई लोग असमंजस में रहते हैं कि उसे कितनी देर पानी में भिगोकर रखा जाए। कोई हर दाल को रातभर भिगो देता है तो कोई बिना भिगोए ही सीधे कुकर में चढ़ा देता है, जबकि सही तरीका यह है कि हर दाल का आकार, बनावट और छिलका अलग होने की वजह से उसे भिगोने का समय भी अलग-अलग तय किया जाए।
दाल भिगोने से आखिर फायदा क्या होता है
दाल को पकाने से पहले भिगोने का मकसद सिर्फ समय बचाना नहीं है। भीगी हुई दाल जल्दी पकती है, पकने के बाद ज्यादा नरम रहती है और शरीर के लिए पचाने में भी आसान हो जाती है। भिगोने के दौरान दाल में मौजूद कुछ तत्व पानी में घुल जाते हैं, जिससे उसे पचाना और आसान हो जाता है, खासकर उन लोगों के लिए जिन्हें भारी खाना पचाने में दिक्कत होती है। यही वजह है कि दाल बनाने की शुरुआत उसे धोकर भिगोने से करने की सलाह दी जाती है, हालांकि हर दाल के लिए यह समय एक जैसा नहीं होता।
पीली मूंग जल्दी पकती है, साबुत मूंग को चाहिए थोड़ा वक्त
पीली धुली मूंग दाल सबसे जल्दी पकने वाली दालों में गिनी जाती है, इसलिए इसे घंटों भिगोकर रखने की जरूरत नहीं पड़ती। इसके उलट साबुत हरी मूंग के ऊपर पतला छिलका मौजूद होता है, जिसकी वजह से इसे कुछ घंटों तक भिगोना बेहतर रहता है ताकि वह ठीक से गले। जो लोग घर पर मूंग अंकुरित करते हैं, उनके लिए भी दाल को अच्छी तरह भिगोना जरूरी माना जाता है, क्योंकि इसी से अंकुरण की प्रक्रिया शुरू होती है।
मसूर दाल के लिए रातभर भिगोना जरूरी नहीं
मसूर दाल भी उन दालों में शामिल है जो बिना ज्यादा भिगोए भी जल्दी पक जाती हैं, इसलिए इसे रोज की रसोई में रातभर पानी में डुबोकर रखने की जरूरत नहीं होती। अगर दाल को और ज्यादा मुलायम बनाना हो तो थोड़ी देर के लिए भिगोया जा सकता है, लेकिन यह अनिवार्य कदम नहीं है और रोजमर्रा के खाने में इसके बिना भी काम चल जाता है।
चना दाल को भिगोने से पकने का समय घटता है
चना दाल बाकी कई दालों के मुकाबले सख्त होती है और पकने के बाद भी अपना आकार बनाए रखती है। इसीलिए इसे कुछ घंटों तक पानी में भिगो दिया जाए तो यह जल्दी और बराबर मात्रा में पकती है। भिगोने से चना दाल के दाने अंदर तक नरम हो जाते हैं, जिससे गैस पर पकाने में लगने वाला समय भी कम हो जाता है।
उड़द दाल को घंटों भिगोना क्यों जरूरी है
साबुत उड़द दाल का बाहरी छिलका बाकी दालों की तुलना में काफी सख्त होता है, इसलिए इसे पकाने से पहले कई घंटों तक भिगोकर रखना फायदेमंद माना जाता है। घर पर इडली या डोसा का बैटर तैयार करते समय भी उड़द दाल को पहले लंबे समय तक भिगोया जाता है, क्योंकि इससे दाल को पीसना आसान हो जाता है और बैटर का फर्मेंटेशन भी सही तरीके से होता है।
तो क्या हर दाल को भिगोना जरूरी है
इसका सीधा जवाब है, नहीं। हर दाल पर एक जैसा नियम लागू नहीं होता। धुली हुई और आकार में छोटी दालें बिना भिगोए भी आराम से पक जाती हैं, जबकि साबुत और बड़े दाने वाली दालों को पकने में ज्यादा वक्त लगता है, इसलिए उन्हें पहले से भिगोकर रखना पड़ता है। इसे याद रखने का एक आसान तरीका यह है कि दाल जितनी बड़ी और सख्त होगी, उसे उतनी ही ज्यादा देर भिगोने की जरूरत पड़ेगी। खाना बनाने से पहले अगर आपको यह पता हो कि आप कौन-सी दाल इस्तेमाल कर रहे हैं, तो भिगोने का सही समय तय करना आसान हो जाता है और दाल बेवजह ज्यादा या कम भिगोने से बच जाती है। साथ ही, भिगोने के बाद दाल को उसी पुराने पानी में पकाने के बजाय ताजा पानी इस्तेमाल करना बेहतर रहता है, क्योंकि इससे दाल का स्वाद और उसकी पोषण गुणवत्ता दोनों बनी रहती हैं।


















