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मथुरा के पेड़े से लेकर बंगाल की रसमलाई तक, गर्मी में पेट खराब कर सकती हैं ये मिठाइयांखानपान
27 जून 2026, 6:53 pm (124 दिन पहले)· 2

मथुरा के पेड़े से लेकर बंगाल की रसमलाई तक, गर्मी में पेट खराब कर सकती हैं ये मिठाइयां

भीषण गर्मी के मौसम में उत्तर भारत में तापमान बढ़ने के साथ ही दूध, मावे और छेने से बनी मिठाइयां तेजी से दूषित हो रही हैं। डॉक्टरों ने फूड पॉइजनिंग और पेट के गंभीर संक्रमण से बचने के लिए ऐसी मिठाइयों के रखरखाव और सेवन को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है।

उत्तर भारत में जब पारा 40 से 45 डिग्री सेल्सियस के स्तर को छूने लगता है, तो खानपान के मामले में की गई मामूली सी कोताही भी सेहत पर भारी पड़ सकती है। इस झुलसा देने वाली गर्मी में थोड़ी सी लापरवाही भी फूड पॉइजनिंग, उल्टी, दस्त और पेट के गंभीर संक्रमण का सबब बन जाती है। हमारी रोजमर्रा की डाइट में शामिल दूध, खोया और मलाई से तैयार होने वाली मिठाइयां इस मौसम में सबसे संवेदनशील होती हैं। कमरे के सामान्य तापमान पर लंबे समय तक रखी रहने वाली इन डेयरी उत्पादों से बनी मिठाइयों में बैक्टीरिया बहुत तेजी से पनपने लगते हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों की मानें तो तपती गर्मी के इन महीनों में दूध से बनी मिठाइयों के सेवन से बचना ही बेहतर है। अगर आप इन्हें खाना ही चाहते हैं, तो केवल पूरी तरह से ताजा बनी मिठाइयों का ही विकल्प चुनें, क्योंकि फ्रिज से बाहर रखी गई बासी मिठाइयां बहुत जल्द खराब हो जाती हैं।

गर्मी में तेजी से खराब होने वाली प्रमुख मिठाइयां

कुछ खास मिठाइयों में नमी और दूध की मात्रा अधिक होने के कारण उनमें कीटाणु बहुत तेजी से बढ़ते हैं। यहां उन प्रमुख मिठाइयों की सूची दी जा रही है जिन्हें लेकर आपको विशेष रूप से सतर्क रहना चाहिए:

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  • रसगुल्ला: यदि छेने से बने रसगुल्लों को लगातार रेफ्रिजरेटर में न रखा जाए, तो उनकी चाशनी में बैक्टीरिया का हमला बहुत तेज हो जाता है। गर्म तापमान में चीनी का यह गाढ़ा घोल बैक्टीरिया के पनपने का मुख्य जरिया बन जाता है, जिससे पेट खराब होने का डर रहता है।
  • गुलाब जामुन: खोए और चाशनी के मेल से बनने वाली यह मिठाई बेहद संवेदनशील होती है। विशेषकर सड़क किनारे खुली दुकानों या ठेलों पर मिलने वाले गुलाब जामुन गर्मी में बहुत जल्दी दूषित हो जाते हैं।
  • मिल्क केक: दूध को गाढ़ा करके और खोए के मिश्रण से तैयार होने वाला मिल्क केक गर्मी में सबसे संवेदनशील माना जाता है। इसके भंडारण में की गई हल्की सी चूक भी इसे सेहत के लिए खतरनाक बना सकती है।
  • कलाकंद: इस मिठाई में नमी यानी पानी की मात्रा बहुत ज्यादा होती है। नमी के कारण कलाकंद में बैक्टीरिया का प्रसार बेहद तेजी से होता है, इसलिए बिना फ्रिज के रखे कलाकंद को खाने से हमेशा बचें।
  • रबड़ी: दूध को लंबे समय तक उबालकर गाढ़ा करने से तैयार होने वाली रबड़ी सेहत के लिए तब नुकसानदेह हो जाती है जब इसे लंबे समय तक बाहर छोड़ दिया जाए। इससे फूड पॉइजनिंग का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
  • पश्चिम बंगाल की खास 'बम' मिठाई: नाम सुनकर भले ही आपको अजीब लगे, लेकिन पश्चिम बंगाल के कुछ विधानसभा क्षेत्रों में इस 'बम' मिठाई की मांग लोगों के सिर चढ़कर बोलती है। हालांकि, अन्य मिठाइयों की तरह इसकी शुद्धता और सुरक्षा भी इस बात पर निर्भर करती है कि इसे कितने ठंडे और साफ वातावरण में रखा गया है।
  • रसमलाई और चमचम: दूध और छेने से तैयार होने वाली इन दोनों मिठाइयों की शेल्फ लाइफ यानी सुरक्षित रहने की अवधि गर्मियों में बहुत ही कम होती है। इन्हें फ्रिज के बाहर रखना बीमारी को न्योता देने जैसा है।
  • पेड़ा: मथुरा, बनारस या बिहार के अलग-अलग जिलों में मिलने वाले स्वादिष्ट पेड़े दिखने में भले ही सूखे लगें, लेकिन गर्मी के मौसम में खुले में रखे पेड़े अंदर से खराब हो सकते हैं।
  • दूध और खोए की बर्फियां: काजू से बनने वाली बर्फी (काजू कतली) गर्मी में कुछ अधिक समय तक सुरक्षित रह सकती है, लेकिन खोया बर्फी, मलाई बर्फी और नारियल-दूध के मिश्रण वाली बर्फियां भीषण गर्मी में बहुत जल्दी सड़ जाती हैं।
  • दूध या मावे वाले लड्डू: मावे या खोए के इस्तेमाल से बनने वाले लड्डू गर्मी के इस मौसम में लंबे समय तक खाने योग्य नहीं रहते।

इसके अलावा राजभोग, संदेश और छेना टोस्ट जैसी अन्य बंगाली मिठाइयों को भी हमेशा ठंडा करके और उचित तरीके से स्टोर करने के बाद ही खाना चाहिए।

उत्तर भारत के राज्यों में क्यों बढ़ता है फूड पॉइजनिंग का खतरा?

उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और दिल्ली-एनसीआर जैसे मैदानी इलाकों में मई और जून के महीनों में सूरज की तपिश चरम पर होती है और तापमान अक्सर 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चला जाता है। ऐसे में जब मिठाई विक्रेता इन नाजुक मिठाइयों को फ्रिज में रखने के बजाय अपनी दुकानों में काउंटर पर घंटों खुले में रखते हैं, तो उनमें बैक्टीरिया और फफूंद का प्रसार बिजली की रफ्तार से होता है। यही वजह है कि इन क्षेत्रों में गर्मियों के दौरान पेट के रोगों और फूड पॉइजनिंग के मामलों में अचानक भारी उछाल देखा जाता है।

किन्हें बरतनी चाहिए सबसे ज्यादा सावधानी और क्या हैं सुरक्षित विकल्प?

दूषित खानपान का असर वैसे तो हर किसी पर बुरा होता है, लेकिन कुछ संवेदनशील समूहों के लिए यह जानलेवा भी हो सकता है। बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) वाले लोगों को खराब मिठाई खाने से गंभीर संक्रमण और डिहाइड्रेशन का खतरा रहता है, इसलिए इन्हें खास तौर पर सचेत रहना चाहिए।

अगर आप मीठा खाने के शौकीन हैं, तो इस मौसम में गुड़ और सूखे मेवों (ड्राई फ्रूट्स) से बनी मिठाइयां अपेक्षाकृत अधिक सुरक्षित मानी जाती हैं। इसके अलावा, अच्छी पैकेजिंग वाली ब्रांडेड वैक्यूम पैक्ड मिठाइयों को उनकी निर्माण और एक्सपायरी तिथि जांचकर खरीदा जा सकता है।

खरीदारी और रखरखाव से जुड़े जरूरी नियम

अपनी सेहत को सुरक्षित रखने के लिए मिठाई खरीदते और स्टोर करते समय इन बातों का ध्यान रखें:

  • मिठाई हमेशा वैसी विश्वसनीय दुकानों से ही खरीदें जहां डिस्प्ले काउंटर में रेफ्रिजरेशन यानी ठंडक की पूरी व्यवस्था हो।
  • धूल, मक्खियों और खुली हवा में रखी मिठाइयों को खरीदने से पूरी तरह परहेज करें।
  • पैकेट वाली मिठाइयां खरीदते समय उनकी मैन्युफैक्चरिंग (निर्माण) और एक्सपायरी डेट जरूर देखें।
  • दूध, मावा या छेने से बनी मिठाइयों को घर लाते ही सबसे पहले फ्रिज में रखें।
  • अगर किसी मिठाई से हल्की सी भी खट्टी महक आए, उसका रंग बदला हुआ दिखे या स्वाद में कड़वाहट या खट्टापन लगे, तो उसे तुरंत फेंक दें।

सवाल-जवाब

गर्मी में दूध की मिठाइयां जल्दी क्यों खराब हो जाती हैं?
गर्मी में उच्च तापमान और नमी के कारण दूध, मावे और छेने से बनी मिठाइयों में बैक्टीरिया और फफूंद बहुत तेजी से पनपते हैं, जिससे वे कुछ ही घंटों में दूषित हो जाती हैं।
गर्मी के मौसम में कौन-सी मिठाइयां सबसे ज्यादा खतरनाक मानी जाती हैं?
रसगुल्ला, रसमलाई, कलाकंद, रबड़ी, मिल्क केक और मावे वाले लड्डू जैसी मिठाइयां जिनमें नमी अधिक होती है, गर्मियों में सबसे ज्यादा असुरक्षित होती हैं।
खराब मिठाई खाने से क्या-क्या शारीरिक समस्याएं हो सकती हैं?
दूषित मिठाई खाने से व्यक्ति को फूड पॉइजनिंग हो सकती है, जिसके लक्षणों में उल्टी, दस्त, पेट में मरोड़ और गंभीर संक्रमण शामिल हैं।
दूषित मिठाइयों के संक्रमण से किन लोगों को सबसे ज्यादा खतरा होता है?
बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग इसके प्रति सबसे अधिक संवेदनशील होते हैं, जिनमें संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है।
गर्मियों में सुरक्षित मीठा खाने के लिए क्या विकल्प मौजूद हैं?
गर्मी के दिनों में गुड़ और ड्राई फ्रूट्स (सूखे मेवों) से बनी मिठाइयां अपेक्षाकृत अधिक सुरक्षित होती हैं। इसके अलावा वैक्यूम पैक्ड ब्रांडेड मिठाइयां भी ली जा सकती हैं।
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