सावन का पवित्र महीना अपनी रिमझिम फुहारों और सुहावने मौसम के साथ हर किसी के दिल को लुभाता है। बारिश की इन बूंदों के बीच अक्सर रसोई में कुछ ऐसा बनाने का मन करता है जो स्वाद में एकदम नया हो, देसी खुशबू से भरा हो और जिसे तैयार करने में बहुत ज्यादा मेहनत भी न लगे। अगर आप भी इस मानसून के मौसम में किसी ऐसी ही खास और पारंपरिक डिश की तलाश में हैं, तो हरियाणा की प्रसिद्ध बेसन खंडली की सब्जी आपके लिए एक शानदार विकल्प साबित हो सकती है। बेसन से तैयार होने वाला यह पारंपरिक व्यंजन देखने में बिल्कुल किसी बर्फी के चौकोर टुकड़ों जैसा नजर आता है। इसे पहले थाली में जमाकर बर्फी की तरह काटा जाता है और फिर भुने हुए मसालों की तरी में पकाया जाता है। एक बार अगर आप इस जायकेदार सब्जी का स्वाद चख लेंगे, तो सावन के पूरे महीने इसे बार-बार बनाने का मन करेगा।
खंडली का शुरुआती मिश्रण और सूखे मसालों का सही तालमेल
फरीदाबाद के सेक्टर 62 की रहने वाली वंदना झा बताती हैं कि स्वादिष्ट खंडली तैयार करने की पूरी प्रक्रिया बेहद सरल है, लेकिन इसमें हर कदम पर सही तालमेल का ध्यान रखना जरूरी होता है। सबसे पहले एक बर्तन में आवश्यकतानुसार बेसन लिया जाता है। इसके बाद इसमें स्वाद के अनुसार साधारण नमक मिलाया जाता है। बेसन का रंग सुंदर बनाने के लिए थोड़ी सी हल्दी और तीखेपन का संतुलन बनाए रखने के लिए लाल मिर्च पाउडर डाला जाता है। इन सभी सूखे घटकों को बेसन के साथ अच्छी तरह मिला लिया जाता है ताकि नमक और मसाले पूरे बेसन में समान रूप से फैल जाएं। जब यह सूखा मिश्रण पूरी तरह एकसार हो जाता है, तब इसे पकाने का अगला चरण शुरू होता है।
कढ़ाई में बेसन की धीमी भुनाई और सुगंध की पहचान
सूखे बेसन और मसालों के इस मिश्रण को कढ़ाई में डालकर भूनने की शुरुआत की जाती है। वंदना झा का कहना है कि बेसन को भूनते समय सबसे ज्यादा सावधानी बरतनी पड़ती है। गैस की आंच को नियंत्रित रखना होता है और कछी को लगातार चलाते रहना बेहद आवश्यक होता है। अगर थोड़ी देर के लिए भी ध्यान हट जाए या चलाना बंद कर दिया जाए, तो बेसन कढ़ाई के तले में चिपककर जल सकता है, जिससे सब्जी का पूरा स्वाद बिगड़ सकता है। लगातार चलाने से बेसन समान रूप से भुनता है। जब बेसन पूरी तरह पक जाता है और उसमें से सौंधी-सौंधी मनमोहक खुशबू आने लगती है, तो यह संकेत होता है कि खंडली बनाने का पहला बड़ा चरण सफलता पूर्वक पूरा हो चुका है।
थाली में बेसन को जमाना और बर्फी के आकार में सटीक कटिंग
बेसन के अच्छी तरह भुन जाने के बाद उसे तुरंत गरम कढ़ाई से बाहर निकाला जाता है। इसके बाद एक साफ और समतल थाली में इस पके हुए बेसन को उड़ेल दिया जाता है। थाली में फैलाते समय ध्यान रखा जाता है कि बेसन की परत बहुत ज्यादा मोटी न हो, क्योंकि बाद में इसके सुंदर पीस काटने होते हैं। थाली में बेसन को एकसमान मोटाई में फैलाकर कुछ समय के लिए ठंडा होने और जमने के लिए छोड़ दिया जाता है। जैसे ही बेसन थोड़ा सख्त और ठोस हो जाता है, एक धारदार चाकू की मदद से इसे काटा जाता है। थाली में जमे बेसन को ठीक उसी अंदाज में काटा जाता है जैसे हम घर पर बेसन की बर्फी काटते हैं। आप अपनी पसंद के अनुसार छोटे या बड़े वर्गाकार या बर्फी के आकार के टुकड़े रख सकते हैं। कटिंग करते समय हल्के हाथ का इस्तेमाल किया जाता है ताकि बेसन के टुकड़े टूटे नहीं और उनका आकार बना रहे।
मसाले की तैयारी और तरी का निर्माण
जब बेसन की खंडली के सभी सुंदर टुकड़े तैयार हो जाते हैं, तो उन्हें एक अलग बर्तन में संभालकर रख दिया जाता है। इसके बाद बारी आती है सब्जी के लिए मसालेदार तरी तैयार करने की। कढ़ाई में तेल डालकर गरम किया जाता है और उसमें पिसे हुए प्याज, टमाटर और पारंपरिक मसाले डालकर भुनाई शुरू होती है। वंदना झा बताती हैं कि खंडली का असली स्वाद मसाले की अच्छी भुनाई पर ही निर्भर करता है। मसाले को भी कढ़ाई में लगातार चलाते हुए पकाया जाता है ताकि वह तले से न चिपके। जब मसाला पूरी तरह पक जाता है और उसके किनारों से तेल अलग होता हुआ दिखाई देने लगता है, तब यह माना जाता है कि सब्जी की ग्रेवी का आधार तैयार हो चुका है।
मसाले के साथ खंडली का मिश्रण और 15 मिनट की धीमी आंच
मसाला अच्छी तरह भुन जाने के बाद पहले से काटकर रखे गए बेसन की खंडली के सभी टुकड़ों को कढ़ाई में डाल दिया जाता है। इस दौरान सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बेसन के टुकड़ों को मसाले के साथ बहुत ही हल्के हाथ से मिलाया जाए। तेज हाथ से चलाने पर बेसन के सॉफ्ट टुकड़े टूटकर बिखर सकते हैं। मसाले और खंडली के मिलने के बाद कढ़ाई में थोड़ा सा पानी मिलाया जाता है। ध्यान रखें कि पानी की मात्रा बहुत कम रखी जाती है, क्योंकि अधिक पानी डालने से खंडली का गाढ़ापन और स्वाद दोनों प्रभावित हो सकते हैं। पानी डालने के बाद कढ़ाई को ढक्कन से ढक दिया जाता है और धीमी आंच पर लगभग 15 मिनट तक पकने दिया जाता है। इन 15 मिनटों के दौरान मसाले का पूरा रस और फ्लेवर बेसन के टुकड़ों के अंदर तक समा जाता है।
हरा धनिया और गर्मागर्म परोसने की विधि
लगभग 15 मिनट तक धीमी आंच पर पकने के बाद जब मसाला और खंडली आपस में पूरी तरह एक हो जाते हैं और सब्जी गाढ़ी दिखने लगती है, तब गैस बंद कर दी जाती है। सबसे आखिरी में इसमें बारीक कटा हुआ ताजा हरा धनिया छिड़का जाता है। हरा धनिया डालते ही सब्जी की रंगत और सौंधी खुशबू कई गुना बढ़ जाती है। इस प्रकार आपकी देसी अंदाज वाली हरियाणवी खंडली की सब्जी परोसने के लिए तैयार हो जाती है। सावन के सुहावने मौसम में इसे ताजी गर्मागर्म रोटी या भाप उठते चावलों के साथ खाना बेहद स्वादिष्ट लगता है। बेसन के अनोखे स्वाद और मसालेदार तरी का यह मेल रोजमर्रा की सब्जियों से बिल्कुल अलग और जायकेदार अनुभव देता है।



















