दिल्ली की सीमा से सटे फरीदाबाद के सेक्टर 37 में एक घर ऐसा है जहां गर्मी के दिनों में बाहर पारा चाहे जितना भी चढ़े, अंदर का तापमान हमेशा 7 से 10 डिग्री कम रहता है। यह कमाल किसी मशीन का नहीं बल्कि घर की छत से लेकर आंगन तक फैली हरियाली का है।
1000 गज के घर में आधे से ज्यादा हिस्से में बगिया
यह मकान करीब 1000 गज में बना है और इसके आधे से ज्यादा हिस्से में तरह-तरह के पौधे लगाए गए हैं। यहां सैकड़ों किस्म की वनस्पतियां मौजूद हैं, जिनमें औषधीय जड़ी-बूटियां, हरी सब्जियां, साग और मौसमी फूलों के पौधे शामिल हैं। घर के मालिक अनुराग जैन का कहना है कि जब फरीदाबाद का तापमान 45 डिग्री के पार चला जाता है, तब भी उनके घर के भीतर गर्मी का एहसास कम ही होता है।
24 घंटे में सिर्फ 1 घंटे चलता है एसी
अनुराग बताते हैं कि उनके घर में पूरे दिन में महज एक घंटे के लिए ही एसी चलाने की नौबत आती है। इतनी देर में ही कमरा इतना ठंडा हो जाता है कि उसके बाद एसी बंद कर देना पड़ता है। उनके मुताबिक पेड़-पौधों की छांव और हरियाली की वजह से न सिर्फ तापमान काबू में रहता है, बल्कि हवा में प्रदूषण का असर भी काफी कम हो जाता है।
बढ़ते प्रदूषण से परेशान होकर बनाया हरा-भरा आशियाना
अनुराग जैन बताते हैं कि करीब 3 साल पहले वे इस मकान में रहने आए थे। शहरों में लगातार बिगड़ती हवा को देखकर उन्होंने ठान लिया था कि घर के भीतर एक ऐसा माहौल तैयार करेंगे जहां सेहतमंद तरीके से रहा जा सके। हर सर्दी में फरीदाबाद समेत पूरे दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण खतरनाक स्तर तक पहुंच जाता है, खासकर पराली के धुएं की वजह से हवा जहरीली हो जाती है। अनुराग का कहना है कि इन 3 सालों में उन्हें अपने घर के भीतर प्रदूषण का कोई असर महसूस नहीं हुआ, जबकि दिल्ली से लगातार सांस लेने में तकलीफ और खराब हवा की खबरें आती रहती हैं।
दिल्ली से सटा घर, खरीदते समय ही मिले थे कई जड़ी-बूटी वाले पौधे
अनुराग के मुताबिक उनका घर दिल्ली की सीमा से बिल्कुल सटा हुआ है और आधे से ज्यादा जगह पर बागवानी की गई है। जब उन्होंने यह मकान खरीदा था, तभी यहां कई पौधे पहले से मौजूद थे, जिनमें कई हर्बल किस्म के भी थे, हालांकि उस वक्त उन्हें इन पौधों की पूरी जानकारी नहीं थी। समय के साथ कुछ पौधे सूख गए, जिन्हें अब वे दोबारा लगा रहे हैं। उनका कहना है कि इस घर की मिट्टी ही कुछ ऐसी है कि यहां औषधीय पौधे आसानी से पनप जाते हैं और लगभग हर पौधे का कोई न कोई फायदा जरूर है, भले ही हर एक का इस्तेमाल उन्हें खुद पता न हो।
पूर्णनवा जैसे औषधीय पौधे, किडनी-लीवर में मददगार
घर में लगे पौधों में एक पूर्णनवा का पौधा भी है, जिसके बारे में माना जाता है कि यह किडनी और लीवर से जुड़ी दिक्कतों में फायदेमंद होता है। अनुराग बताते हैं कि हर पौधे में अपने अलग-अलग गुण और तत्व मौजूद होते हैं। इसके अलावा घर की ऊपरी मंजिल पर सोलर पैनल भी लगाए गए हैं, जिससे छत का तापमान भी कुछ हद तक नियंत्रित रहता है। चारों ओर फैली हरियाली की वजह से पूरे घर का नजारा और माहौल बाकी घरों से बिल्कुल अलग नजर आता है।
कश्मीर का चिनार भी फरीदाबाद की मिट्टी में हरा-भरा
सबसे दिलचस्प बात यह है कि अनुराग के घर में ठंडे पहाड़ी इलाकों में उगने वाले पौधे भी लहलहा रहे हैं। आमतौर पर कश्मीर में पाया जाने वाला चिनार का पेड़ भी उनके घर में अच्छी तरह बढ़ रहा है, जिसके फूलों की सब्जी बनाकर खाई जाती है। सभी पौधों की देखभाल में सिर्फ ऑर्गेनिक खाद का इस्तेमाल किया जाता है और साल में एक बार गोबर की खाद मंगाकर पौधों में डाली जाती है। इसके अलावा घर में ड्रैगन फ्रूट, तोरी, सूरजमुखी और गुड़हल समेत कई तरह के फूलों के पौधे भी लगाए गए हैं।
किचन के कचरे से खुद उग आया पपीते का पेड़
अनुराग बताते हैं कि रसोई से निकलने वाला जैविक कचरा वे मिट्टी में ही डाल देते थे, जिससे कई पौधे अपने आप उग आए। पपीते का यह पेड़ भी इसी तरह खुद-ब-खुद तैयार हो गया। अनुराग के मुताबिक हाल ही में उन्होंने इसी पेड़ से एक साथ 8 पपीते तोड़े हैं। उनका यह पूरा प्रयोग दिखाता है कि थोड़ी सी सूझबूझ और मेहनत से शहर के बीचोंबीच भी पहाड़ों जैसा ठंडा और सेहतमंद माहौल तैयार किया जा सकता है।



















