शारीरिक तंदुरुस्ती, कसरत और वजन नियंत्रित करने की चर्चाओं में आजकल सबसे प्रमुख ध्यान प्रोटीन पर दिया जा रहा है। व्यायामशाला जाने वालों से लेकर सामान्य दिनचर्या में वजन कम करने की चाह रखने वाले लोग एक-दूसरे को प्रोटीन की मात्रा बढ़ाने और बाजार में उपलब्ध विभिन्न प्रकार के प्रोटीन सप्लीमेंट, डिब्बाबंद पाउडर अथवा शेक पीने की सलाह देने लगते हैं। कई लोग इसे एक आवश्यक स्वास्थ्य नियम मानकर बिना सोचे-समझे अपनी दिनचर्या में जोड़ लेते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार हर किसी को आंख मूंदकर इस चलन का हिस्सा बनने से पहले अपनी वास्तविक शारीरिक जरूरतों को समझना चाहिए।
सोशल मीडिया मंच इंस्टाग्राम पर साझा किए गए एक वीडियो में हृदय रोग विशेषज्ञ डॉक्टर आलोक चोपड़ा ने स्पष्ट किया है कि प्रोटीन सप्लीमेंट अथवा शेक हर व्यक्ति के दैनिक भोजन का अनिवार्य हिस्सा नहीं होना चाहिए। उनके अनुसार प्रोटीन निश्चित तौर पर शरीर की मजबूती और मरम्मत के लिए बुनियादी पोषक तत्व है, किंतु सिर्फ इसलिए प्रोटीन शेक पीना आरंभ नहीं कर देना चाहिए क्योंकि व्यायामशाला में किसी साथी या प्रशिक्षक ने ऐसा करने को कहा है। अधिकांश स्वस्थ व्यक्तियों को अपनी रोजमर्रा की शारीरिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए अलग से किसी सप्लीमेंट या शेक पर निर्भर रहने की बिल्कुल आवश्यकता नहीं होती है।
प्रतिदिन शरीर को कितने प्रोटीन की आवश्यकता होती है
एक स्वस्थ इंसान को दैनिक पोषण लक्ष्य साधने के लिए बाहरी प्रोटीन शेक का सहारा लेने की जरूरत तब तक नहीं पड़ती, जब तक वह अपनी नियमित थाली में पोषक तत्वों से भरपूर संतुलित आहार ले रहा हो। डॉक्टर चोपड़ा का कहना है कि सामान्य तौर पर स्वस्थ और कम शारीरिक श्रम करने वाले व्यक्ति को प्रति किलोग्राम शरीर के वजन के अनुपात में रोजाना लगभग 0.8 ग्राम प्रोटीन की दरकार होती है। उदाहरण के लिए यदि किसी व्यक्ति का वजन साठ किलोग्राम है, तो उसके शरीर की बुनियादी जरूरत इसी अनुपात से तय होगी।
हालांकि सभी लोगों की शारीरिक आवश्यकताएं एक जैसी नहीं होती हैं। जो लोग बहुत भारी कसरत अथवा गहन शारीरिक व्यायाम करते हैं, जिनकी उम्र बढ़ रही है, जो महिलाएं गर्भवती हैं अथवा जिनकी कोई विशेष चिकित्सीय व शारीरिक स्थिति है, उन्हें सामान्य से अधिक मात्रा में प्रोटीन की आवश्यकता हो सकती है। ऐसी विशिष्ट स्थितियों में ही प्रोटीन की मात्रा को डॉक्टर या पोषण विशेषज्ञ के परामर्श से बढ़ाया जाना चाहिए।
बिना जरूरत अधिक प्रोटीन लेने से शरीर पर बढ़ता दबाव
आवश्यकता से अधिक मात्रा में प्रोटीन का सेवन करने से शरीर और उसकी अंदरूनी चयापचय प्रणाली पर अवांछित दबाव पड़ सकता है। इसे लेकर डॉक्टर चोपड़ा ने स्पष्ट आगाह किया है कि आवश्यकता से परे जाकर अत्यधिक पोषक तत्व लेना लाभ के स्थान पर हानि पहुंचा सकता है।
जब शरीर में प्रोटीन का चयापचय होता है, तो उस प्रक्रिया के दौरान कई अपशिष्ट और खराब पदार्थ उत्पन्न होते हैं। इन अपशिष्ट पदार्थों को रक्त से छानकर शरीर से बाहर विसर्जित करने का कार्य किडनी करती है। जब कोई व्यक्ति अपनी शारीरिक क्षमता और आवश्यकता से अधिक प्रोटीन लेना शुरू कर देता है, तो किडनी की इस निस्यंदन प्रक्रिया पर अतिरिक्त भार पड़ जाता है। इस निरंतर दबाव के कारण किडनी के कामकाज पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने का जोखिम पैदा हो जाता है, यही कारण है कि अनावश्यक प्रोटीन का सेवन स्वास्थ्य के लिए उचित नहीं माना जाता।
ज्यादा प्रोटीन खाने से नहीं बनती अपने आप मांसपेशियां
व्यायाम करने वाले युवाओं में यह सामान्य धारणा बन चुकी है कि जितना अधिक प्रोटीन खाया जाएगा, मांसपेशियों का उभार और आकार उतनी ही तेजी से बढ़ेगा। डॉक्टर चोपड़ा ने इस भ्रम को दूर करते हुए समझाया कि अत्यधिक प्रोटीन खाने का सीधा अर्थ मांसपेशियों का बढ़ना कतई नहीं होता है। भोजन में बीस से तीस ग्राम अच्छी गुणवत्ता का प्रोटीन मांसपेशियों में प्रोटीन संश्लेषण को सक्रिय करने और आवश्यक पोषण पहुंचाने के लिए पर्याप्त माना जाता है। अतिरिक्त प्रोटीन शरीर में मांसपेशियों के रूप में जमा होने के बजाय चयापचय प्रणाली पर भार बढ़ाता है।
अत्यधिक सप्लीमेंट और शेक के सेवन से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याएं
अत्यधिक मात्रा में सप्लीमेंट का उपयोग कई अवांछित स्वास्थ्य जोखिमों का कारण बन सकता है। संवेदनशील शारीरिक प्रकृति वाले लोगों में बहुत ज्यादा प्रोटीन लेने से शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन, किडनी में पथरी बनने की आशंका और जोड़ों में दर्द व गठिया जैसी जटिलताएं उत्पन्न हो सकती हैं।
इसके अलावा बाजार में मिलने वाले पैकेटबंद प्रोटीन शेक और पाउडर की सामग्री पर भी सावधानीपूर्वक गौर करने की सलाह दी गई है। कई वाणिज्यिक उत्पादों में कृत्रिम मिठास, स्वाद बढ़ाने वाले रसायन, स्टेबलाइज़र और अन्य गैर-जरूरी एडिटिव्स मिलाए जाते हैं, जो नियमित सेवन पर स्वास्थ्य के लिए हानिकारक सिद्ध हो सकते हैं। इसलिए लेबल पर लिखी सामग्री को अच्छी तरह जांचना बेहद जरूरी है।
संतुलित आहार से प्राकृतिक रूप से कैसे बढ़ाएं प्रोटीन
कृत्रिम पाउडर पर निर्भर रहने के स्थान पर प्राकृतिक खाद्य पदार्थों के माध्यम से शरीर की प्रोटीन जरूरत को आसानी से पूरा किया जा सकता है। मांसाहारी भोजन पसंद करने वाले लोग अपने भोजन में अंडे, चिकन, मछली, सी फूड और कम वसा वाला मीट शामिल कर सकते हैं, जो उच्च जैविक मूल्य वाले प्रोटीन के उत्कृष्ट स्रोत हैं।
शाकाहारी लोगों के लिए भी दैनिक भोजन में प्रचुर विकल्प मौजूद हैं। वे नियमित आहार में विभिन्न दालें, पनीर, टोफू, टेम्पेह, दही, ग्रीक योगर्ट, काबुली व काले चने, राजमा और अन्य बीन्स, मसूर के साथ-साथ कद्दू व सूरजमुखी जैसे बीज, मेवे और बाजरा जैसे पौष्टिक मोटे अनाज सम्मिलित कर सकते हैं। यह प्राकृतिक भोजन न केवल उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटीन उपलब्ध कराता है बल्कि शरीर को जरूरी फाइबर, खनिज और विटामिन भी प्रदान करता है।

















