स्कूल का काम निपटाने या डिजिटल बातचीत के लिए चैटबॉट्स का इस्तेमाल करने के बावजूद कई किशोर अब इस पूरी तकनीक से दूरी बनाने लगे हैं। पिछले चार वर्षों में जब से ये टूल्स आम लोगों के बीच पहुंचे और कंपनियों ने इनके प्रचार पर भारी जोर दिया, तब से युवाओं के बीच लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स को लेकर संदेह गहराने लगा है। तकनीक का उपयोग करने वाले कई छात्र भी जनरेटिव कंटेंट को पसंद करने के बजाय उससे चिढ़ते नजर आते हैं।
युवाओं के बदलते नजरिए और आंकड़े
बाजार अनुसंधान फर्म वाईपल्स के अनुसार, 13 से 17 साल के 37 फीसदी किशोरों को एआई से बने संगीत और वीडियो असहज कर देते हैं। इसी अध्ययन में सामने आया कि आधे से अधिक टीनेजर्स गलत सूचनाओं और डीपफेक को लेकर गहरी चिंता में हैं। इस आयु वर्ग में तकनीक को लेकर दृष्टिकोण में एक दिलचस्प विरोधाभास दिखता है। अमेरिका में ज्यादातर किशोर चैटबॉट्स इस्तेमाल करने की बात मानते हैं, लेकिन उनके भीतर इसे लेकर कोई खास उत्साह नहीं है।
प्यू रिसर्च की एक रिपोर्ट के मुताबिक, कई किशोर यह तो मानते हैं कि व्यक्तिगत तौर पर यह तकनीक उनके काम आ सकती है, लेकिन इसी समूह के एक-चौथाई से अधिक युवाओं का मानना है कि अगले 20 वर्षों में समाज पर इसका नकारात्मक असर पड़ेगा। ये युवा नौकरियों के खत्म होने, सोचने-समझने की क्षमता घटने और पर्यावरण पर पड़ने वाले दबाव जैसी वजहों को लेकर चिंतित हैं।
तकनीक थोपने पर नाराजगी और भविष्य की चिंता
आमतौर पर युवा किसी भी नए गैजेट या डिजिटल बदलाव को तुरंत अपना लेते हैं, लेकिन यूनिवर्सिटी एट बफ़ेलो में संचार की प्रोफेसर मेलानी ग्रीन के अनुसार इस बार स्थिति अलग है। पारंपरिक तौर पर किसी नई तकनीक से बड़े-बुजुर्ग डरते थे, मगर यहां बच्चे खुद इस बात से नाराज हैं कि बड़ी टेक कंपनियां और वयस्क उन पर इसे जबरन थोप रहे हैं। प्रोफेसर ग्रीन के अनुसार, युवा यह भली-भांति समझते हैं कि इस तकनीकी बदलाव से जो भी उथल-पुथल मचेगी, उसका सबसे बड़ा खामियाजा उन्हीं की पीढ़ी को भुगतना पड़ेगा।
इसी वजह से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी इस असंतोष की चर्चा दिखने लगी है। ब्लूस्काई पर माता-पिता अपने बच्चों के इस अविश्वास की कहानियां साझा कर रहे हैं, जहां कई बच्चे किसी बनावटी या खराब चीज को सीधे एआई कह देते हैं। वहीं रेडिट पर शिक्षक बता रहे हैं कि पढ़ाई में इसका सहारा लेने वाले छात्र भी इसके गंभीर परिणामों से डरे हुए हैं और कंप्यूटर से बनने वाली कला को बिल्कुल पसंद नहीं करते।


















