मृत्यु के उपरांत सम्मानपूर्वक अंतिम संस्कार और श्राद्ध कर्म मिलना हर व्यक्ति का एक बुनियादी मानवीय हक माना जाता है। हालांकि कई बार आर्थिक लाचारी अथवा परिजनों की गैरमौजूदगी के कारण लावारिस शवों को अपना कहने वाला कोई नहीं मिलता। झारखंड के औद्योगिक शहर जमशेदपुर में ऐसे ही उपेक्षित और बेसहारा दिवंगतों को पूरे विधि-विधान के साथ सम्मानजनक विदाई देने की एक अनूठी सामाजिक परंपरा निभाई जा रही है। पितृ पक्ष की अमावस्या के पावन अवसर पर जुगसलाई इलाके में स्थित पार्वती घाट पर एक विशेष धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम के अंतर्गत 599 अज्ञात और निर्धन व्यक्तियों की आत्मा की शांति के उद्देश्य से सामूहिक तर्पण, पिंडदान, हवन और वैदिक रीति से श्राद्ध कर्म कराया गया। इस पूरे आयोजन के साथ करीब 1000 जरूरतमंद लोगों को आदरपूर्वक श्राद्ध भोज भी कराया गया।
एक व्यक्तिगत संकल्प से शुरू हुई मानवीय सेवा
इस पूरे सेवा कार्य का नेतृत्व जुगसलाई नगर परिषद के पार्षद और पेशे से पत्रकार प्रवीण सेठी कर रहे हैं। उनके अनुसार यह कोई औपचारिक रस्म भर नहीं है, बल्कि एक गहरी मानवीय संवेदना से उपजा जीवन का संकल्प है। कुछ वर्ष पहले एक दिव्यांग पति-पत्नी के निधन के बाद उनके अंतिम संस्कार के समय उपजी परिस्थितियों ने सेठी के मन पर गहरा प्रभाव डाला था। उसी क्षण उन्होंने यह प्रण किया था कि शहर में जब भी किसी लावारिस शव के मिलने या किसी निर्धन परिवार के दाह-संस्कार में असमर्थ होने की जानकारी मिलेगी, तो किसी भी मृतक को असहाय नहीं छोड़ा जाएगा। हर शव को गरिमा और धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार अंतिम संस्कार दिया जाएगा। इसी सोच को ज़मीनी स्तर पर साकार करने के लिए वर्ष 2022 में गणेश चतुर्थी के पावन दिन 'अंत्योदय एक अभियान' की विधिवत शुरुआत की गई थी।
599 पार्थिव शरीरों को मिला गरिमापूर्ण विदाई का अधिकार
वर्ष 2022 में अभियान के प्रारंभ से लेकर अब तक कुल 599 शवों का विधिवत अंतिम संस्कार कराया जा चुका है। इस संख्या का ब्योरा साझा करते हुए प्रवीण सेठी ने स्पष्ट किया कि इनमें 466 लावारिस अथवा अज्ञात शव शामिल थे, जिनकी पहचान नहीं हो सकी थी। इसके अलावा 133 ऐसे शवों का दाह-संस्कार कराया गया, जिनके परिवार इतने विपन्न थे कि वे अंतिम संस्कार का खर्च वहन करने की स्थिति में नहीं थे। जब किसी भी दिवंगत व्यक्ति के लिए आगे आने वाला कोई सगा-संबंधी नहीं होता, तब इस अभियान के सदस्य परिजनों की भांति आगे बढ़कर पूरी जिम्मेदारी उठाते हैं। पितृ पक्ष की अमावस्या का अवसर ऐसे सभी अज्ञात मृतकों को सामूहिक रूप से श्रद्धांजलि देने के लिए चुना गया, ताकि धार्मिक परंपराओं के मुताबिक उनकी आत्माओं को तृप्ति प्राप्त हो सके।
समाज के हर वर्ग की एकजुट भागीदारी
इस मुहिम की सबसे सशक्त विशेषता यह है कि यह किसी एक व्यक्ति या संस्था के दायरे तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें संपूर्ण समाज साझेदार बना हुआ है। अभियान को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए 'अंत्योदय एक अभियान' नाम से एक डिजिटल संवाद समूह यानी व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया है। इस समूह में शहर के प्रतिष्ठित व्यापारी, शिक्षाविद, पुलिस अधिकारी, चिकित्सक और दिहाड़ी मजदूर वर्ग के नागरिक एक साथ जुड़े हुए हैं। सभी सदस्य अपनी सामर्थ्य के अनुसार आवश्यक धनराशि अथवा संसाधन उपलब्ध कराते हैं, ताकि पैसे की तंगी किसी भी अंतिम संस्कार के मार्ग में बाधा न बन सके। प्रवीण सेठी का मानना है कि सामाजिक समरसता और नागरिकों का यह निरंतर सहयोग ही इस प्रयास का वास्तविक आधार है। इसके साथ ही पार्वती घाट के कर्मचारियों और पदाधिकारियों की निष्ठावान भूमिका को सराहते हुए उन्हें समारोह में विशेष रूप से सम्मानित किया गया।
निशुल्क सेवा के लिए एक फोन कॉल पर सहायता उपलब्ध
पार्वती घाट पर हुए इस आयोजन के दौरान प्रवीण सेठी ने जमशेदपुर और आस-पास के सभी नागरिकों से एक भावनात्मक अपील भी की। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी नागरिक को किसी लावारिस शव की सूचना मिले, या फिर कोई परिवार आर्थिक विपन्नता के कारण अपने परिजन का दाह-संस्कार करने में लाचार हो, तो वे निसंकोच अभियान से संपर्क कर सकते हैं। इसके लिए मोबाइल नंबर 9204886232 सार्वजनिक रूप से जारी किया गया है। अभियान की ओर से दाह-संस्कार और उससे जुड़ी समस्त व्यवस्थाएं पूरी तरह निशुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं। यह मानवीय पहल इस बात को रेखांकित करती है कि इंसान की प्रतिष्ठा केवल उसके जीवनकाल तक सीमित नहीं होती, बल्कि मृत्यु के पश्चात दी जाने वाली गरिमामयी अंतिम विदाई भी समाज की संवेदनशीलता का पैमाना तय करती है।
























