श्रीनगर में उमर अब्दुल्ला मंत्रिमंडल का विस्तार, चार नए विधायकों ने ली मंत्री पद की शपथमणिपुर में मेरा हाउ चोंगबा पर्व पर जुटीं पहाड़ी और घाटी की जातियां, शांति और भाईचारे पर जोरगुजरात की अदालत ने गोहत्या मामले में तीन दोषियों को सुनाई आजीवन कारावास की सजात्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने मल्लिकार्जुन खर्गे के बयान पर जताई कड़ी आपत्ति, बिना शर्त माफी की मांगजम्मू रेलवे स्टेशन के बाहर शिवा मार्केट में भीषण अग्निकांड, 35 से ज्यादा दुकानें और एक होटल जलकर खाककश्मीरी पंडित कार्यकर्ता राकेश हांडू फरीदाबाद से गिरफ्तार, साइबर-आतंकवाद का है मामलामणिपुर में सुरक्षा बलों ने इम्फाल पूर्व में हथियारों का जखीरा पकड़ा, अलग से ड्रग्स जब्ती में दो गिरफ्तारअसम में बड़ा अभियान, पुलिस और संगठनों ने 26 कुत्तों को अवैध मांस कारोबार से बचायापंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव पर लगाया 1 लाख का जुर्माना, डीए एरियर मामले में कड़ा रुखपश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में बीजेपी कार्यकर्ता सुजीत मंडल हत्याकांड के मुख्य आरोपी का एनकाउंटर, अस्पताल में मौत
करेले के तीखे कड़वेपन की वैज्ञानिक वजह और इसे कम करने की रसोई विधियांजीवनशैली
19 सित॰ 2026, 11:21 pm (39 दिन पहले)· 0

करेले के तीखे कड़वेपन की वैज्ञानिक वजह और इसे कम करने की रसोई विधियां

करेले में मौजूद प्राकृतिक यौगिकों के कारण इसका स्वाद कड़वा होता है। साधारण घरेलू रसोई उपायों से इसके तीखेपन को संतुलित कर स्वादिष्ट बनाया जा सकता है।

करेला पोषक तत्वों से भरपूर एक अत्यंत गुणकारी सब्जी है, जिसे भारतीय घरों में तरह तरह के व्यंजनों के रूप में तैयार किया जाता है। इसके औषधीय लाभ जगजाहिर हैं, फिर भी बहुत से लोग केवल इसके तीव्र कड़वे स्वाद के चलते इसे अपनी थाली से दूर रखते हैं। करेले के इस तीखेपन की असल जड़ इसके भीतर पाए जाने वाले प्राकृतिक वनस्पति तत्वों में समाहित है। वैज्ञानिक दृष्टि से करेले में कुकुर्बिटेन वर्ग के ट्राइटरपेनॉइड्स जैसे कई विशिष्ट यौगिक मौजूद होते हैं, जो इस अनूठी कड़वाहट को जन्म देते हैं। वर्ष 2025 में सामने आए एक वैज्ञानिक अध्ययन में करेले के तीखे स्वाद के लिए जिम्मेदार ऐसे कई रासायनिक घटकों को विस्तार से रेखांकित किया गया है।

सब्जी बनाते समय करेले की कड़वाहट को पूरी तरह समाप्त करने की आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि यही इसका मूल और स्वाभाविक चरित्र है। फिर भी, यदि आप इसके स्वाद को थोड़ा सौम्य और खाने योग्य बनाना चाहते हैं, तो पकाने से पहले रसोई में कुछ सरल और पारंपरिक तरीके अपना सकते हैं। इन उपायों से सब्जी का जायका सुधर जाता है और कड़वाहट काफी हद तक संतुलित हो जाती है।

ये भी पढ़ें

बीज और अंदरूनी गूदे को अलग करना

करेले की तैयारी का सबसे पहला कदम उसकी सही कटाई से जुड़ा है। जब आप करेले को काटें, तो उसके भीतर मौजूद सफेद गूदे और बीजों को पूरी तरह बाहर निकाल दें। यह आंतरिक हिस्सा कड़वे तत्वों से काफी भरा होता है, इसलिए इसे हटाने से कड़वाहट तुरंत कम हो जाती है। इसके बाद करेले के पतले टुकड़े काटकर आगे की प्रक्रियाओं के लिए तैयार किए जा सकते हैं।

नमक का प्रयोग और पानी निकालना

भारतीय रसोई में पीढ़ियों से एक बेहद लोकप्रिय नुस्खा अपनाया जाता रहा है। करेले के कटे हुए टुकड़ों पर उचित मात्रा में नमक छिड़ककर कुछ देर के लिए छोड़ दिया जाता है। थोड़ी देर में नमक के प्रभाव से करेले का कड़वा रस छूटने लगता है। इस निकले हुए पानी को पूरी तरह फेंक दें और फिर टुकड़ों को साफ पानी से अच्छी तरह धो लें ताकि अतिरिक्त नमक और कड़वा रस दोनों निकल जाएं।

सादे या नमकीन पानी में भिगोना

एक अन्य सरल उपाय यह है कि कटे हुए करेले को कुछ समय तक पानी में डुबोकर रखा जाए। इस पानी में थोड़ा सा नमक मिला देने से प्रक्रिया और प्रभावी हो जाती है। कुछ देर भीगने के पश्चात टुकड़ों को बाहर निकालें, ताजे पानी से धोएं और उसके बाद ही पकाने की प्रक्रिया शुरू करें।

हल्का उबालना या ब्लांच करने की तकनीक

यदि करेला जरूरत से ज्यादा कड़वा महसूस हो रहा हो, तो पकाने से ठीक पहले उसे खौलते गर्म पानी में थोड़ी देर के लिए ब्लांच किया जा सकता है। हल्का उबालने की यह पारंपरिक तकनीक कड़वे तत्वों की तीव्रता को तेजी से घटा देती है। इसके बाद पानी को पूरी तरह निथार लें और फिर करेले को छौंक व मसालों के साथ पकाएं।

मसालों, प्याज और खटास के साथ संतुलन

करेले की सब्जी बनाते वक्त सही सामग्रियों का मेल स्वाद को पूरी तरह बदल सकता है। प्याज, विविध पारंपरिक मसालों और हल्की खटास के साथ पकाने पर तीखापन काफी संतुलित हो जाता है। यह ध्यान रखना जरूरी है कि चीनी अथवा गुड़ मिलाने से कड़वा स्वाद केवल अस्थायी रूप से छिपता है, जबकि उसमें मौजूद प्राकृतिक कड़वे यौगिक नष्ट नहीं होते हैं।

सवाल-जवाब

करेले में कड़वाहट किस कारण से होती है?
करेले में कुकुर्बिटेन टाइप ट्राइटरपेनॉइड्स जैसे प्राकृतिक पादप यौगिक पाए जाते हैं, जो इसकी तीव्र कड़वाहट के लिए जिम्मेदार हैं।
क्या पकाने से पहले करेले के बीज निकालना फायदेमंद है?
हां, काटते समय सफेद गूदा और बीज निकाल देने से करेले का स्वाद काफी हद तक हल्का हो जाता है।
नमक लगाकर रखने से कड़वापन कैसे कम होता है?
नमक छिड़कने से करेले का कड़वा पानी बाहर निकल आता है, जिसे फेंककर और टुकड़ों को धोकर तीखापन घटाया जा सकता है।
क्या चीनी या गुड़ डालने से करेले के कड़वे यौगिक नष्ट हो जाते हैं?
नहीं, मीठा मिलाने से केवल कड़वा स्वाद मुंह में छिपता है, करेले के प्राकृतिक कड़वे यौगिक खत्म नहीं होते।
करेले को ब्लांच करने का क्या तरीका है?
कटे हुए करेले को पकाने से पहले थोड़ी देर गर्म पानी में हल्का उबालें, फिर पानी निथारकर मसालों के साथ पकाएं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp