भवन निर्माण के दौरान अगर बुनियादी ढांचे की तैयारी में जरा सी भी चूक हो जाए, तो आगे चलकर पूरे मकान में दरारें और ढांचागत कमजोरियां सामने आने लगती हैं। विशेषकर जब निर्माण एक से अधिक मंजिलों का हो, तब नींव से लेकर छत तक प्रयुक्त होने वाली हर सामग्री का तकनीकी चयन बेहद संवेदनशील हो जाता है। मिर्जापुर के निर्माण सामग्री कारोबारी लकी सिंह गहरवार ने मकान को पीढ़ियों तक टिकाऊ और सुरक्षित बनाए रखने के लिए बुनियादी काम, ढलाई के तरीकों और सामग्री की गुणवत्ता से जुड़े व्यावहारिक मानक साझा किए हैं।
नींव की मजबूती और हाथी पांव ढलाई का महत्व
किसी भी भवन की कुल उम्र और भार सहने की क्षमता उसकी नींव पर निर्भर करती है। गहरवार के अनुसार, जमीन के भीतर जाने वाले हिस्से को बेस कहा जाता है। निर्माण शुरू करते समय बेस में सबसे पहले गंगा बालू की सघन भराई यानी फिलिंग करानी चाहिए। बालू की भराई पूरी होने के बाद सोलिंग बिछाकर उस पर पीसीसी का काम कराया जाता है। पीसीसी तैयार होने के उपरांत लोहे की जाल बिछाई जाती है।
यदि मकान तीन, चार अथवा पांच मंजिल तक ऊंचा खड़ा करना हो, तो सामान्य बेस के बजाय हाथी पांव आकार की ढलाई कराना सबसे सुरक्षित और प्रभावी विकल्प माना गया है। हाथी पांव ढलाई के ऊपर ही मुख्य पिलर खड़ा किया जाता है। इसके अलावा छह लाइन वाले सरिया का इस्तेमाल और 9 बाई 12 आकार का कॉलम तैयार करना ढांचे को अत्यधिक स्थिरता प्रदान करता है।
दीवार निर्माण के लिए ईंटों के सही ग्रेड की पहचान
नींव का ढांचा खड़ा हो जाने के बाद दीवारों की जुड़ाई का चरण आता है। दीवारों के लिए लाल ईंट सबसे उपयुक्त मानी जाती है। बाजार में उपलब्ध ईंटों को आमतौर पर तीन श्रेणियों में बांटा जाता है, जिनमें से पहली श्रेणी यानी एक नंबर की लाल ईंट सबसे बेहतर और मजबूत होती है।
दूसरी श्रेणी की ईंट की गुणवत्ता भी लगभग पहली श्रेणी के समान ही होती है, परंतु उसके पकने के स्तर में मामूली अंतर देखने को मिलता है। दूसरी ओर, तीसरी श्रेणी की ईंट कमजोर मानी जाती है और उसे मुख्य मकान की दीवारों में नहीं लगाना चाहिए। तीन नंबर ईंट का सीमित उपयोग केवल जमीन के नीचे के सामान्य कार्यों अथवा बाहरी बाउंड्री वॉल बनाने के लिए ही किया जा सकता है।
उत्तम बालू, सीमेंट और सरिया का सही चुनाव
जुड़ाई और ढलाई के अलग-अलग चरणों में सामग्री की उपयुक्तता भी बदलती है। दीवारों की जुड़ाई के लिए सुपर मीडियम बालू का उपयोग सबसे सही रहता है। नदियों के संदर्भ में सोन नदी का बालू गुणवत्ता के मामले में सर्वश्रेष्ठ माना गया है, जिसे निर्माण में प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
सीमेंट के संदर्भ में बाजार में कई विकल्प उपलब्ध हैं, जहां जुड़ाई, ढलाई और कॉलम के लिए अलग-अलग तरह के उत्पाद बनाए जाते हैं। ढलाई के काम के लिए एसीसी गोल्ड को उत्कृष्ट माना जाता है, जबकि अल्ट्राटेक और प्रिज्म ब्रांड भी जुड़ाई तथा ढलाई दोनों के लिए व्यापक रूप से प्रयोग में आते हैं।
लोहे और सरिया के चयन में ब्रांड और उसकी तकनीकी क्षमता का विशेष ध्यान रखा जाता है। टाटा और जिंदल के उत्पाद जहां राष्ट्रीय स्तर पर भरोसेमंद हैं, वहीं मिर्जापुर क्षेत्र में कामधेनु सरिया काफी प्रचलित और प्रभावी माना जाता है। इसके साथ ही गैलेंट ब्रांड का सरिया भी वर्तमान में काफी बेहतर परिणाम दे रहा है। सरिया खरीदते समय 550 डी ग्रेड का चयन सबसे बेहतर माना जाता है, जो भूकंप और भारी वजन सहने में सक्षम होता है।



















