पश्चिम एशिया में सैन्य तनाव और चुनावी हलचल के बीच चांदी में सुस्ती, 50.30 डॉलर के करीब फिसले भावमूलांक 5 अंकज्योतिष 3 नवंबर 2026: काम और बातचीत में जल्दबाजी से बचें, धैर्य से मिलेगी सफलतात्योहारी सीजन में स्कूलों में छुट्टियों की भरमार, जानें किस राज्य में कितने दिन रहेगा अवकाशकार्तिक शुक्ल द्वितीया पर भाई दूज 2026 की सटीक तारीख, पूजा मुहूर्त और संपूर्ण विधिछठ के पावन पर्व पर शारदा सिन्हा के इस लोकगीत में भक्त क्यों जता रहे हैं सूर्य देव से शिकवाठंड के मौसम में घर पर ही तैयार करें खस्ता गुड़ और मूंगफली की चिक्कीगया के मानपुर से निकला 10 डिब्बों का सफर: 51 करोड़ के प्लांट में शहद से टॉफी और शरबत बनाएंगे शशि कुमारउत्तर प्रदेश के छह संगठनात्मक क्षेत्रों में भाजपा का तीन दिवसीय मार्च, दिग्गज नेता सड़कों परपाली के सोसायटी नगर में अचानक धंसी खोखली सड़क, पिता ने फुर्ती से बचाया बच्चे कोभागलपुर में विकसित होगा राज्य का पहला आम गांव, 500 से अधिक जर्दालू के पेड़ लगाने की तैयारी
नेशनल हाईवे पर सजी पहाड़ जैसी पंचमेवा मिठाई, करौली में राहगीरों को लुभा रहा पारंपरिक स्वादजीवनशैली
3 नव॰ 2026, 8:34 am (2 मिनट पहले)· 0

नेशनल हाईवे पर सजी पहाड़ जैसी पंचमेवा मिठाई, करौली में राहगीरों को लुभा रहा पारंपरिक स्वाद

उत्तर प्रदेश के कारीगर राजस्थान के करौली में नेशनल हाईवे-23 के किनारे विशालकाय पंचमेवा मिठाई बेच रहे हैं, जिसे बनाने में दो से तीन दिन का समय लगता है।

सड़क किनारे सफर करते हुए अक्सर कई तरह के स्थानीय पकवान देखने को मिलते हैं, लेकिन राजस्थान के करौली में इन दिनों एक बेहद अनोखी मिठाई चर्चा का विषय बनी हुई है। नेशनल हाईवे-23 से गुजरने वाले मुसाफिरों की नजर सड़क किनारे ठेलों पर सजी एक विशालकाय, पहाड़ जैसी आकृति वाली मिठाई पर टिक जाती है। करीब तीन दशक पुरानी परंपरा से जुड़ी इस पारंपरिक मिठाई का नाम पंचमेवा है, जिसे उत्तर प्रदेश से आए व्यापारी अनोखे अंदाज में तैयार कर राहगीरों को परोस रहे हैं। दुकानों और भीड़भाड़ वाले बाजारों के बजाय सीधे राजमार्ग के किनारे की जा रही इस बिक्री ने स्थानीय निवासियों के साथ दूरदराज से आने-जाने वाले वाहन चालकों का ध्यान भी अपनी ओर खींचा है।

सड़क किनारे ठेलों पर 9 से 10 व्यापारियों का डेरा

करौली जिले से गुजरने वाले नेशनल हाईवे-23 पर पिछले लगभग एक सप्ताह से यह मिठाई बेची जा रही है। उत्तर प्रदेश से आए करीब 9 से 10 विक्रेता अलग-अलग स्थानों पर अपने ठेले लगाकर इस पारंपरिक मिष्ठान की बिक्री कर रहे हैं। सफर के दौरान जैसे ही वाहन सवार इस विशालकाय मिठाई को देखते हैं, वे उत्सुकता के चलते गाड़ियां रोक लेते हैं। कई लोग इसे केवल देखने और इसके बनने का तरीका जानने के लिए रुकते हैं, जबकि बहुत से राहगीर इसका स्वाद चखने के बाद अपने गंतव्य के लिए पैक भी करवा रहे हैं। सड़क किनारे इस तरह का बड़ा ढांचा सजाकर बेचना ही इस व्यापार की सबसे बड़ी रणनीति साबित हो रही है।

ये भी पढ़ें

मेवों और सूजी से तैयार होती है पारंपरिक मिष्ठान

इस मिठाई की लोकप्रियता का सबसे बड़ा कारण इसमें शामिल की जाने वाली सामग्री और इसका बनाने का विशेष तरीका है। उत्तर प्रदेश के सजानपुर से करौली पहुंचे व्यापारी राजीव सिंह, जो पिछले करीब 10 सालों से इस काम में जुटे हैं, बताते हैं कि पंचमेवा को तैयार करने में कई तरह के मेवों और पारंपरिक घटकों का इस्तेमाल होता है। इसे बनाने की मुख्य सामग्री में नारियल का बुरादा, छुहारा, इलायची, बादाम, किशमिश, चेरी और मूंगफली शामिल हैं। इसके साथ ही इसमें सूजी और शक्कर को मिलाकर खास अनुपात में पकाया जाता है। सभी चीजों को एक साथ गूंथकर और जमाकर इसे एक बड़ा टीले या पहाड़ जैसा रूप दिया जाता है, जो दूर से ही लोगों को आकर्षित करता है।

दो से तीन दिन की कड़ी मेहनत में बनती है एक खेप

व्यापारी राजीव सिंह के अनुसार, इस मिठाई की एक पूरी खेप तैयार करने में करीब दो से तीन दिन का लंबा वक्त लगता है। उनका कहना है कि इस मिठाई का स्वाद लगभग 20 से 30 साल पुरानी मिष्ठान परंपरा का हिस्सा है। मेवों को सही अनुपात में पकाने और उन्हें विशाल आकार में सुरक्षित बांधकर रखने की प्रक्रिया काफी जटिल होती है। यही वजह है कि इसका पहाड़ जैसा भारी-भरकम आकार इसे बाजार की आम मिठाइयों की तुलना में बिल्कुल अलग और अनूठा बनाता है।

हाईवे किनारे बिक्री का अनोखा मॉडल

पंचमेवा को बेचने के लिए किसी पक्की दुकान का सहारा नहीं लिया जाता। व्यापारी अखिलेश सिंह का कहना है कि उनकी बिक्री का तरीका पारंपरिक हलवाई की दुकानों से बिल्कुल जुदा है। वे देश के अलग-अलग राज्यों और नेशनल हाईवे के किनारों पर जाकर ठेले लगाते हैं। हाईवे पर लंबा सफर करने वाले मुसाफिर अक्सर कुछ नया और ताजा खाने की तलाश में रहते हैं। जब उनकी नजर इतने बड़े आकार की मिठाई पर पड़ती है, तो वे कौतूहलवश रुकते हैं और पूछताछ करते हैं। अखिलेश सिंह के मुताबिक, यही भारी-भरकम बनावट और हाईवे का खुला माहौल उनके कारोबार का सबसे बड़ा आकर्षण बन चुका है। करौली में इस समय लगभग 10 ठेलों पर यह मिठाई स्थानीय लोगों और राहगीरों के बीच खूब पसंद की जा रही है।

सवाल-जवाब

पंचमेवा मिठाई कहां बेची जा रही है?
यह मिठाई राजस्थान के करौली जिले में नेशनल हाईवे-23 के किनारे ठेलों पर बेची जा रही है।
पंचमेवा मिठाई बनाने में कौन-कौन सी सामग्री लगती है?
इसे नारियल का बुरादा, छुहारा, इलायची, बादाम, किशमिश, चेरी, मूंगफली, सूजी और शक्कर मिलाकर तैयार किया जाता है।
इस मिठाई को तैयार करने में कितना समय लगता है?
कारीगरों के अनुसार पंचमेवा की एक खेप तैयार करने में करीब दो से तीन दिन का समय लगता है।
करौली में यह मिठाई कितने व्यापारी बेच रहे हैं?
उत्तर प्रदेश से आए करीब 9 से 10 व्यापारी अलग-अलग ठेलों पर इसे बेच रहे हैं।
यह मिठाई सामान्य दुकानों के बजाय हाईवे पर क्यों बेची जाती है?
हाईवे से गुजरने वाले मुसाफिर इसके विशालकाय पहाड़ जैसे आकार को देखकर आकर्षित होते हैं और खरीदारी करते हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp