अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में चार कारोबारी सत्रों की लगातार बिकवाली झेलने के बाद साझा यूरोपीय मुद्रा को 1.1215 के स्तर के पास फौरी सहारा मिला है। वैश्विक निवेशक इस समय बेहद सतर्क रुख अपनाए हुए हैं क्योंकि आने वाले घंटों में दो बड़े आर्थिक आंकड़े जारी होने जा रहे हैं, जो आगामी हफ्तों के लिए मुद्रा नीतियों की दिशा तय कर सकते हैं। अमेरिकी रोजगार बाजार की स्थिति दर्शाने वाले गैर-कृषि पेरोल यानी NFP आंकड़े और यूरोजोन के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर पूरी दुनिया के वित्तीय विश्लेषकों का ध्यान केंद्रित है।
केंद्रीय बैंकों के नीतिगत संकेत और मुद्रास्फीति का दबाव
अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की अधिकारी लोगाॅन ने हाल ही में संकेत दिया है कि मौद्रिक सख्ती का दौर अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है और नीतिगत दरों में कम से कम 50 आधार अंकों की अतिरिक्त बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। इस रुख ने ग्रीनबैक यानी अमेरिकी डॉलर को लगातार मजबूती प्रदान की है। दूसरी तरफ यूरोप में यूरोजोन के सितंबर महीने के प्रारंभिक सामंजस्यपूर्ण उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी HICP के आंकड़े 09:00 GMT पर सामने आने हैं। बाजार का आकलन है कि वार्षिक आधार पर यह हेडलाइन मुद्रास्फीति अगस्त के 3.2 प्रतिशत के अंतिम आंकड़े से बढ़कर 3.6 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। यदि मुद्रास्फीति में यह उछाल दर्ज होता है, तो यूरोपीय सेंट्रल बैंक यानी ECB पर भी निकट भविष्य में ब्याज दरें बढ़ाने का दबाव काफी गहरा जाएगा।
अमेरिकी श्रम बाजार की स्थिति और डॉलर इंडेक्स में हलचल
मुद्रा कारोबारियों की सबसे बड़ी नजर 12:30 GMT पर जारी होने वाले अमेरिकी गैर-कृषि पेरोल पर टिकी है। अनुमानों के अनुसार सितंबर में अमेरिकी अर्थव्यवस्था में केवल 90K नए रोजगार जुड़ने की संभावना है, जो अगस्त महीने में दर्ज किए गए 162K के आंकड़े की तुलना में एक स्पष्ट नरमी को दर्शाता है। वहीं बेरोजगारी दर 4.1 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रहने की उम्मीद जताई जा रही है। इन आंकड़ों के आने से ठीक पहले डॉलर इंडेक्स यानी DXY पिछले कारोबारी सत्र में 102.20 के एक साल से अधिक के नए शिखर को छूने के बाद हल्का फिसलकर 101.93 के आसपास आ गया। साप्ताहिक प्रदर्शन के आधार पर प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के बीच यूरो अमेरिकी डॉलर के सामने सबसे कमजोर साबित हुआ है।
दैनिक चार्ट पर तकनीकी तस्वीर और प्रमुख समर्थन स्तर
दैनिक मूल्य चार्ट पर नजर डालें तो EUR/USD की विनिमय दर 1.1253 के स्तर पर कारोबार करती दिखी है, जहां समग्र रुझान मंदड़ियों के पक्ष में बना हुआ है। हाजिर भाव 1.1423 पर स्थित 20-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज यानी EMA से नीचे बना हुआ है, जो ऊपर की तरफ एक मजबूत तकनीकी रुकावट के रूप में कार्य कर रहा है। तकनीकी सूचक रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी RSI का स्तर 19.8 पर आ चुका है, जो बाजार के अत्यधिक बिकवाली के दायरे में होने की ओर इशारा करता है। हालांकि जब तक भाव 20-दिवसीय गतिशील प्रतिरोध से नीचे बना रहता है, तब तक किसी भी मामूली उछाल पर दोबारा बिकवाली हावी होने का जोखिम बना रहेगा।
ऊपरी स्तरों की बात करें तो 24 जून का निचला स्तर 1.1325 इस मुद्रा जोड़ी के लिए पहला बड़ा प्रतिरोध क्षेत्र है, जिसके पार जाने पर ही भाव 1.1423 के 20-दिवसीय EMA बैरियर को चुनौती दे सकता है। इसके विपरीत यदि मंदी का दबाव बढ़ता है, तो यह जोड़ी फिसलकर 1.1200 के मनोवैज्ञानिक स्तर तक जा सकती है। यदि 1.1200 का रक्षात्मक स्तर टूटता है, तो गिरावट का दायरा बढ़कर 1.1100 तक पहुंचने की संभावना बन जाएगी। लाइव मार्केट आंकड़ों के मुताबिक EUR/USD का भाव 1.13 के पास दर्ज किया गया, जिसमें 52 हफ्तों का दायरा 1.12 से 1.20 के बीच देखा गया है। यहां 14-दिवसीय RSI 17 के स्तर पर अत्यधिक बिकवाली दर्शा रहा है, जबकि 20-दिवसीय दैनिक औसत अस्थिरता यानी ATR 0.01 पर है। तकनीकी पिवट 1.12 पर स्थित है, जिसका पहला प्रतिरोध 1.13 और समर्थन 1.12 के स्तर पर है।
अन्य वैश्विक मुद्राओं और सोने की चाल
अमेरिकी डॉलर में आई हल्की मुनाफावसूली का असर अन्य परिसंपत्तियों पर भी देखने को मिला है। शुक्रवार के एशियाई कारोबारी सत्र में AUD/USD संभलकर 0.6950 की तरफ लौटता दिखाई दिया, जिसे वैश्विक बॉन्ड यील्ड और महंगाई के खतरों के बीच ऑस्ट्रेलियाई केंद्रीय बैंक द्वारा नवंबर में दरें बढ़ाने की संभावनाओं से भी बल मिला। इसके विपरीत जापानी येन के मुकाबले डॉलर यानी USD/JPY 158.00 के इर्द-गिर्द नई दिशा तलाशने के लिए जूझता रहा। टोक्यो में उम्मीद से अधिक गर्म CPI आंकड़ों के बाद इस जोड़ी ने अपने साप्ताहिक उच्च स्तरों से थोड़ा पीछे हटना शुरू किया। वहीं बहुमूल्य धातु सोने ने 4,200 डॉलर के स्तर को दोबारा हासिल करने के कई असफल प्रयासों के बाद एशियाई सत्र में फिर से लाल निशान में वापसी की। पेरोल आंकड़ों के आने के बाद फेडरल रिजर्व द्वारा अक्टूबर में दर बढ़ोतरी की संभावनाओं में होने वाले किसी भी बदलाव का सीधा असर डॉलर के मूल्यांकन और सोने की अगली बड़ी चाल पर पड़ना तय है।


















