वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में शुक्रवार के शुरुआती एशियाई कारोबार के दौरान अमेरिकी डॉलर के मुकाबले स्विस फ्रैंक में लगातार दूसरे दिन मजबूती दर्ज की गई। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व द्वारा आगामी अक्टूबर महीने की बैठक में ब्याज दरों में बढ़ोतरी किए जाने की संभावनाओं में आई कमी ने डॉलर पर भारी दबाव बनाया है। इसके चलते मुद्रा बाजार में यूएसडी/सीएचएफ (USD/CHF) की विनिमय दर गिरकर 0.8290 के स्तर के आसपास पहुंच गई। सीएमई फेडवॉच टूल के ताजा आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय बाजार अब अक्टूबर में ब्याज दर में वृद्धि की लगभग 28 प्रतिशत संभावना ही मानकर चल रहा है। ब्याज दर वृद्धि की इन घटती उम्मीदों ने उन निवेशकों को सतर्क कर दिया है जो हाल के हफ्तों में डॉलर में तेजी की उम्मीद लगाए बैठे थे।
ट्रेजरी यील्ड और ऊर्जा लागत से जुड़ी महंगाई की चिंताएं
हालांकि डॉलर पर दबाव दिखने के बावजूद अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड वर्ष 2002 के बाद के अपने उच्चतम स्तरों के करीब टिकी हुई है। ट्रेजरी यील्ड का यह उच्च स्तर फेडरल रिजर्व द्वारा मौद्रिक नीतियों को सख्त बनाए रखने की उम्मीदों, अमेरिकी अर्थव्यवस्था में बनी हुई आंतरिक मजबूती और देश के दीर्घकालिक राजकोषीय व कर्ज के हालात को लेकर बढ़ती चिंताओं के कारण बना हुआ है। इसके साथ ही, लगातार ऊंची बनी हुई ऊर्जा लागत से पैदा हुई महंगाई की चिंताओं और ऊंची ट्रेजरी यील्ड ने स्विस फ्रैंक की बढ़त को एक सीमित दायरे में बांधने का काम किया है। बाजार के विश्लेषक मानते हैं कि ऊर्जा की ऊंची कीमतें दुनिया भर में मुद्रास्फीति के दबाव को आसानी से कम नहीं होने देंगी।
नॉनफार्म पेरोल आंकड़ों पर टिकी हैं व्यापारियों की निगाहें
वैश्विक मुद्रा बाजारों में सक्रिय कारोबारी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति की भावी दिशा को समझने के लिए आगामी आर्थिक आंकड़ों पर पैनी नजर रखे हुए हैं। इस समय सारा ध्यान आने वाले अमेरिकी नॉनफार्म पेरोल डेटा पर केंद्रित है, जो सितंबर महीने में रोजगार सृजन की वास्तविक स्थिति बयां करेगा। अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि इस बार अमेरिकी अर्थव्यवस्था में 90,000 नई नौकरियों का इजाफा देखने को मिल सकता है। यह आंकड़ा पिछले महीने दर्ज की गई 162,000 नौकरियों की बढ़ोतरी के मुकाबले उल्लेखनीय सुस्ती को दर्शाता है। वहीं दूसरी ओर, अमेरिका में बेरोजगारी दर के 4.1 प्रतिशत पर स्थिर रहने का अनुमान लगाया गया है। यदि रोजगार के आंकड़े उम्मीद से कमजोर आते हैं, तो फेडरल रिजर्व पर नीतिगत दरों को स्थिर रखने का दबाव और बढ़ जाएगा।
स्विस फ्रैंक की वैश्विक साख और सेफ-हेवन दर्जा
स्विस फ्रैंक स्विट्जरलैंड की आधिकारिक मुद्रा है और यह दुनिया की शीर्ष दस सबसे अधिक कारोबार की जाने वाली मुद्राओं में शामिल है। इसका दैनिक कारोबारी दायरा स्विट्जरलैंड की घरेलू अर्थव्यवस्था के वास्तविक आकार से भी काफी अधिक है। स्विस फ्रैंक का मूल्य सामान्य बाजार भावना, स्विट्जरलैंड के आर्थिक स्वास्थ्य और स्विस नेशनल बैंक द्वारा उठाए जाने वाले नीतिगत कदमों से तय होता है। वित्तीय दुनिया में स्विस फ्रैंक को एक सुरक्षित निवेश (सेफ-हेवन) संपत्ति माना जाता है, जिसे निवेशक बाजार में तनाव और अनिश्चितता के दौर में खरीदना पसंद करते हैं। स्विट्जरलैंड की अत्यधिक स्थिर अर्थव्यवस्था, मजबूत निर्यात क्षेत्र, केंद्रीय बैंक के पास मौजूद भारी विदेशी मुद्रा भंडार और वैश्विक संघर्षों में लंबे समय से चली आ रही राजनीतिक तटस्थता इसे संकट के समय पूंजी की सुरक्षा चाहने वाले वैश्विक निवेशकों की पहली पसंद बनाती है।
स्विस नेशनल बैंक की नीति और यूरोजोन से गहरा संबंध
स्विट्जरलैंड का केंद्रीय बैंक, स्विस नेशनल बैंक (एसएनबी), मौद्रिक नीति पर फैसले लेने के लिए साल में चार बार यानी हर तिमाही में एक बार अपनी बैठक आयोजित करता है, जो दुनिया के अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंकों की तुलना में कम है। केंद्रीय बैंक का प्राथमिक लक्ष्य वार्षिक महंगाई दर को 2 प्रतिशत से नीचे बनाए रखना है। जब भी मुद्रास्फीति इस लक्ष्य से ऊपर निकल जाती है या निकट भविष्य में ऊपर जाने का अंदेशा होता है, तो बैंक दरों में बढ़ोतरी करके कीमतों पर लगाम लगाने का प्रयास करता है। उच्च ब्याज दरें आम तौर पर स्विस फ्रैंक के लिए सकारात्मक मानी जाती हैं क्योंकि वे उच्च प्रतिफल की पेशकश करती हैं, जिससे विदेशी पूंजी आकर्षित होती है। इसके विपरीत, कम ब्याज दरें फ्रैंक को कमजोर करती हैं। कॉमर्जबैंक के विश्लेषकों का मानना है कि स्विस नेशनल बैंक तत्काल दर वृद्धि करने के बजाय महंगाई के समग्र रुख पर अपना ध्यान केंद्रित रखेगा।
इसके अलावा, एक छोटी और खुली अर्थव्यवस्था होने के नाते स्विट्जरलैंड अपने पड़ोसी यूरोजोन देशों की आर्थिक सेहत पर बहुत अधिक निर्भर है। यूरोपीय संघ स्विट्जरलैंड का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार और प्रमुख रणनीतिक सहयोगी है। वर्ष 2011 और 2015 के बीच स्विस फ्रैंक को यूरो के साथ एक निश्चित विनिमय दर पर बांधा गया था। जब 2015 में इस पेग को अचानक हटाया गया, तो फ्रैंक के मूल्य में 20 प्रतिशत से अधिक का उछाल आया था, जिससे वैश्विक बाजारों में भारी उथल-पुथल मच गई थी। हालांकि अब यह पेग प्रभावी नहीं है, फिर भी यूरो और स्विस फ्रैंक की चाल के बीच 90 प्रतिशत से अधिक का गहरा संबंध देखा जाता है, जो लगभग पूरी तरह एक-दूसरे के अनुरूप है।
अन्य प्रमुख मुद्राओं और सोने पर भी दिखा डॉलर की नरमी का असर
अमेरिकी डॉलर के पीछे हटने का असर अन्य प्रमुख विदेशी मुद्राओं और जिंस बाजार पर भी साफ देखा गया। एशियाई सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD/USD) मजबूत होकर 0.6950 के स्तर की तरफ लौटा। पिछले 17 महीनों के उच्च स्तर से डॉलर के फिसलने के बीच व्यापारियों ने आगामी रोजगार रिपोर्ट से पहले मुनाफावसूली की, जबकि ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को नवंबर में ब्याज दर बढ़ोतरी की पुनर्जीवित उम्मीदों से सहारा मिला। दूसरी ओर, डॉलर/येन (USD/JPY) 158.00 के करीब संघर्ष करता दिखा और अपने साप्ताहिक उच्च स्तर से नीचे आ गया, जिसे टोक्यो के उम्मीद से ज्यादा गर्म उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) और डॉलर की कमजोरी का सामना करना पड़ा। इस बीच, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोना 4,200 डॉलर प्रति औंस के स्तर को दोबारा हासिल करने में विफल रहने के बाद एशियाई सत्र में लाल निशान में लौट आया। सोने के व्यापारी भी सितंबर के नॉनफार्म पेरोल आंकड़ों की प्रतीक्षा कर रहे हैं, जो फेडरल रिजर्व के रुख और डॉलर की आगे की चाल तय करने में बेहद निर्णायक साबित होंगे।


















