रक्षा और एयरोस्पेस तकनीक क्षेत्र में काम करने वाली हैदराबाद की कंपनी अपोलो माइक्रो सिस्टम्स लिमिटेड के शेयरों में गुरुवार को बढ़त दर्ज की गई। बाजार में यह खरीदारी उस समय देखने को मिली जब कंपनी ने सेमी-एक्टिव लेजर होमिंग सिस्टम यानी एसएएलएचएस के लिए ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी (टीओटी) मिलने की घोषणा की। आधुनिक युद्धक्षेत्र में सटीक मारक क्षमता वाले हथियारों के निर्माण के लिए यह स्वदेशी तकनीक बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है, जिसके चलते निवेशकों का ध्यान इस रक्षा शेयर की ओर आकर्षित हुआ है।
शेयर बाजार में हलचल और दिन का कारोबार
गुरुवार को दोपहर 2:37 बजे तक अपोलो माइक्रो सिस्टम्स के शेयर 2.07 प्रतिशत यानी 7.65 रुपये की तेजी के साथ 378 रुपये पर कारोबार कर रहे थे। कारोबारी सत्र की शुरुआत में शेयर 371 रुपये के भाव पर खुला और देखते ही देखते इसने 383 रुपये के इंट्राडे उच्चतम स्तर को छू लिया। दिन के कारोबार के दौरान स्टॉक का निचला स्तर 371 रुपये दर्ज किया गया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि पूरे कारोबारी सत्र के दौरान खरीदारी का रुझान मजबूत बना रहा।
चार्ट पर क्या संकेत दे रहे हैं तकनीकी संकेतक
पिछले कुछ महीनों में इस शेयर में खासा उतार-चढ़ाव देखा गया है। एसबीआई सिक्योरिटीज में टेक्निकल और डेरिवेटिव्स रिसर्च के हेड सुदीप शाह के अनुसार, अपोलो माइक्रो सिस्टम्स का शेयर मई के अंत से 361 रुपये से 467 रुपये के दायरे में कंसोलिडेट हो रहा है। इसके बावजूद, यह शेयर अपने 20-सप्ताह के एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (ईएमए) से ऊपर टिका हुआ है, जो यह दर्शाता है कि इसका व्यापक रुझान अपेक्षाकृत लचीला और मजबूत बना हुआ है।
सुदीप शाह का कहना है कि 365 रुपये से 370 रुपये का दायरा शेयर के लिए एक महत्वपूर्ण तात्कालिक सपोर्ट जोन है। यदि यह शेयर इस स्तर से नीचे निर्णायक रूप से गिरता है, तो बाजार में और अधिक बिकवाली का दबाव देखने को मिल सकता है। इसके अलावा, साप्ताहिक आरएसआई काफी हद तक स्थिर बनी हुई है, जिससे यह संकेत मिलता है कि मौजूदा समय में शेयर एक सीमित दायरे यानी साइडवेज ट्रेंड में बना हुआ है।
सेमी-एक्टिव लेजर होमिंग सिस्टम तकनीक का महत्व
शेयरों में आई इस तेजी का मुख्य कारण एसएएलएचएस के लिए ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी की प्राप्ति है। यह एक आधुनिक प्रीसिजन-गाइडेंस तकनीक है जिसे लेजर की मदद से चिन्हित किए गए लक्ष्यों की ओर गोला-बारूद या हथियारों को सटीक रूप से निर्देशित करने के लिए डिजाइन किया गया है।
यह प्रणाली लेजर आधारित लक्ष्य का पता लगाने और मार्गदर्शन करने की क्षमता का उपयोग करती है, जिससे उड़ान के दौरान हथियारों की मारक सटीकता में उल्लेखनीय सुधार होता है। अपोलो माइक्रो सिस्टम्स के लिए यह टीओटी एक और विशेष रक्षा तकनीक तक सीधी पहुंच प्रदान करता है। जरूरी योग्यता और एकीकरण की शर्तों को पूरा करने के बाद, कंपनी इसे विभिन्न रक्षा प्लेटफॉर्मों के लिए विकसित और निर्मित करने की दिशा में आगे बढ़ सकती है।
विघना प्रोजेक्ट और डीआरडीओ के साथ साझेदारी
अपोलो माइक्रो सिस्टम्स मल्टी-इन्फ्लुएंस ग्राउंड माइन (एमआईजीएम) कार्यक्रम से भी गहराई से जुड़ी हुई है, जिसे 'विघना' के नाम से जाना जाता है। कंपनी रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) के डेवलपमेंट-कम-प्रोडक्शन पार्टनर फ्रेमवर्क के तहत एक स्वीकृत उत्पादन भागीदार है।
इस एमआईजीएम कार्यक्रम को जुलाई 2026 में रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) से अंतिम मंजूरी मिल चुकी है और अब यह परियोजना उत्पादन के चरण की ओर बढ़ रही है। इस तरह के घटनाक्रम कंपनी के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं, क्योंकि रक्षा तकनीकों का सफल रूपांतरण बड़े उत्पादन ऑर्डरों में होने से कंपनी के राजस्व को लंबी अवधि तक मजबूती और स्पष्टता मिलती है।
वित्तीय प्रदर्शन और बैलेंस शीट की स्थिति
कंपनी ने वित्त वर्ष 2026 के दौरान अपने वित्तीय नतीजों में शानदार बढ़त दर्ज की है। अपोलो माइक्रो सिस्टम्स का परिचालन से समेकित राजस्व वित्त वर्ष 2025 के 562.07 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2026 में 904.32 करोड़ रुपये पर पहुंच गया।
इसी अवधि में कंपनी का समेकित शुद्ध लाभ (टैक्स के बाद मुनाफा) भी 56.36 करोड़ रुपये से बढ़कर 107.38 करोड़ रुपये हो गया। यदि स्टैंडअलोन आधार पर वित्तीय स्थिति देखें, तो कंपनी का राजस्व 764.85 करोड़ रुपये रहा, जबकि शुद्ध लाभ पिछले वर्ष के 57.24 करोड़ रुपये की तुलना में बढ़कर 120.58 करोड़ रुपये पर दर्ज किया गया। कंपनी का एबिटा भी 133.27 करोड़ रुपये से बढ़कर 231.22 करोड़ रुपये हो गया है।
मुनाफे और राजस्व में आई यह तेज वृद्धि कंपनी की विस्तार योजनाओं को ठोस वित्तीय आधार प्रदान करती है। हालांकि, निवेशकों को कंपनी की बैलेंस शीट और बढ़ते कर्ज पर भी नजर रखनी होगी। 31 मार्च 2026 तक कंपनी का कुल कर्ज करीब 485 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जो एक साल पहले लगभग 291 करोड़ रुपये दर्ज किया गया था। बाजार विशेषज्ञ सुदीप शाह द्वारा रेखांकित किए गए 365 रुपये से 370 रुपये के सपोर्ट स्तर और इस कंसोलिडेशन रेंज से बाहर निकलने की क्षमता पर ही स्टॉक की अगली दिशा तय होगी।

















