रिजर्व बैंक द्वारा रेपो दर में 25 आधार अंकों की ताजा वृद्धि किए जाने के बाद आवास बाजार में होम लोन की ब्याज दरें बढ़ने के संकेत मिलने लगे हैं। देश के प्रमुख रियल एस्टेट डेवलपर संगठनों, क्रेडाई और नारेडको ने बुधवार को इस कदम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उधारी लागत में इस इजाफे से आने वाले त्योहारी सीजन के दौरान मकानों की बिक्री पर कुछ प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि, दोनों संगठनों का यह भी मानना है कि रिहायशी संपत्तियों की मजबूत बुनियादी मांग इस असर को काफी हद तक सीमित रखने में मददगार साबित होगी।
कर्ज महंगा होने और त्योहारी सीजन की बिक्री पर प्रभाव
क्रेडाई के राष्ट्रीय अध्यक्ष शेखर पटेल और नारेडको के अध्यक्ष प्रवीण जैन ने स्पष्ट किया कि केंद्रीय बैंक के इस फैसले का सीधा असर होम लोन की ब्याज दरों पर पड़ेगा। जब बैंकों के लिए पूंजी की लागत बढ़ती है, तो उसका बोझ अंततः ग्राहकों पर पड़ता है। पटेल ने कहा कि रेपो दर में की गई इस वृद्धि को वैश्विक अनिश्चितताओं और मुद्रास्फीति को लेकर बनी चिंताओं के व्यापक संदर्भ में देखा जाना चाहिए। अंतरराष्ट्रीय बाजार में जारी उतार-चढ़ाव और घरेलू स्तर पर महंगाई के दबाव को संतुलित करने के लिए नीतिगत दरों में यह बदलाव किया गया है।
शेखर पटेल ने आगे बताया कि मौद्रिक नीति का सीधा असर रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए पूंजी की उपलब्धता और उसकी कुल लागत दोनों पर पड़ता है। बाजार इस समय त्योहारी सीजन में कदम रख रहा है, जो पारंपरिक रूप से आवासीय संपत्तियों की खरीद-बिक्री के लिए सबसे महत्वपूर्ण और सक्रिय समय माना जाता है। ऐसे महत्वपूर्ण मोड़ पर कर्ज लेने की लागत में बढ़ोतरी होने से त्योहारी अवधि के दौरान संपत्तियों के पंजीकरण और बुकिंग की गति में कुछ रुकावट आ सकती है। इसके बावजूद, उन्होंने भरोसा जताया कि मकान खरीदने को लेकर लोगों के बीच जो स्वाभाविक बुनियादी मांग बनी हुई है, वह काफी मजबूत है।
खरीदारों का रुझान और लंबी अवधि का परिदृश्य
नारेडको के अध्यक्ष प्रवीण जैन ने आवास बाजार की मौजूदा स्थिति का विश्लेषण करते हुए कहा कि इस समय घरों की मांग का आधार बेहद ठोस बना हुआ है। उन्होंने विश्वास जताया कि मजबूत ग्राहक धारणा, त्योहारी उत्साह और खुद के मकान के मालिकाना हक की दीर्घकालिक जरूरत के दम पर रिहायशी बाजार पर इस दर वृद्धि का कुल प्रभाव सीमित ही रहेगा। रियल एस्टेट सेक्टर वर्तमान गति को बनाए रखने में पूरी मजबूती और लचीलापन दिखाएगा।
मकान खरीदारों की वित्तीय योजना पर बात करते हुए शेखर पटेल ने कहा कि किसी भी ग्राहक के लिए ब्याज दर केवल एक बड़े और दीर्घकालिक फैसले का हिस्सा होती है। उन्होंने कहा, "होम लोन आमतौर पर कम से कम 15 वर्षों की प्रतिबद्धता होती है।" इतनी लंबी समय-सीमा के दौरान बाजार चक्र के अनुसार ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव आना स्वाभाविक है, जहां कई बार दरें ऊपर चढ़ती हैं और कई बार नीचे भी आती हैं। पटेल ने जोर दिया कि रेपो दर में होने वाले बदलावों को अलग-थलग करके नहीं देखना चाहिए, बल्कि पूरी अर्थव्यवस्था और समग्र विकास के दीर्घकालिक परिदृश्य को ध्यान में रखकर फैसला लेना समझदारी भरा कदम है।
क्रेडाई और नारेडको देश भर के रियल एस्टेट बिल्डरों और डेवलपर्स का प्रतिनिधित्व करने वाले दो सबसे बड़े संगठन हैं। इन दोनों संस्थाओं की संयुक्त सदस्य संख्या लगभग 20,000 बिल्डरों की है, जो भारत के प्रमुख शहरी और अर्ध-शहरी केंद्रों में आवासीय तथा वाणिज्यिक परियोजनाओं के निर्माण से जुड़े हुए हैं।


















