यूरोप की अर्थव्यवस्था के सामने खड़े राजकोषीय संकट पर चिंता जताते हुए यूरोपीय सेंट्रल बैंक की अध्यक्ष क्रिस्टीन लेगार्ड ने फ्रांस की आर्थिक स्थिति को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि फ्रांस का सरकारी कर्ज सकल घरेलू उत्पाद के 120 प्रतिशत के खतरनाक स्तर तक पहुंच चुका है, और इसे नीचे लाने के लिए किसी भी ठोस दिशा का अभाव एक गंभीर समस्या बन चुका है। ऐसे हालात में बाजार और निवेशकों का भरोसा फिर से बहाल करने के लिए देश को तुरंत एक विश्वसनीय बजटीय खाका तैयार करना होगा तथा जरूरी संरचनात्मक सुधार लागू करने होंगे।
यूरोपीय वित्तीय तंत्र की मजबूती और फ्रांस का संकट
क्रिस्टीन लेगार्ड का मानना है कि मौजूदा दौर की चुनौतियों के बावजूद समूचे यूरोपीय वित्तीय तंत्र की बुनियाद पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत और स्थिर है। उन्होंने स्पष्ट तुलना करते हुए रेखांकित किया कि आज का यूरोपीय वित्तीय ढांचा वर्ष 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट और वर्ष 2011 के यूरोज़ोन ऋण संकट के समय की तुलना में काफी बेहतर स्थिति में है। वित्तीय संस्थानों के पास पर्याप्त सुरक्षा तंत्र मौजूद हैं, जिससे अचानक आने वाले बाहरी झटकों को झेलने की क्षमता बढ़ी है। हालांकि, व्यापक वित्तीय प्रणाली की स्थिरता के बीच फ्रांस का अपना बढ़ता सार्वजनिक कर्ज एक बड़ा जोखिम पैदा कर रहा है। बिना किसी ठोस बजटीय अनुशासन के कर्ज का जीडीपी के 120 प्रतिशत पर पहुंच जाना दीर्घकालिक आर्थिक नीतियों के लिए एक गंभीर चुनौती बनता जा रहा है।
राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी और कार्यकाल पर रुख
फ्रांसीसी राजनीति में अपनी संभावित भूमिका को लेकर चल रही अटकलों पर भी क्रिस्टीन लेगार्ड ने अपनी स्थिति पूरी तरह साफ कर दी है। जब उनसे यह पूछा गया कि क्या वह फ्रांस के राष्ट्रपति पद की दौड़ में उम्मीदवार बनने पर विचार कर सकती हैं, तो उन्होंने इसे सिरे से खारिज करते हुए कहा कि ऐसा कदम किसी भी तरह से एक अच्छा विचार नहीं होगा। इसके साथ ही यूरोपीय सेंट्रल बैंक के शीर्ष पद पर अपने भविष्य को लेकर उन्होंने संकेत दिया कि यदि वह समय से पहले अपने पद से हटती भी हैं, तो वह अंतर केवल कुछ महीनों का ही हो सकता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि वह केंद्रीय बैंक के नीतिगत दायित्वों को पूरा करने और संस्थागत स्थिरता बनाए रखने के प्रति प्रतिबद्ध हैं।
मुद्रा बाजार का ताजा हाल और यूरो का उतार-चढ़ाव
वैश्विक मुद्रा बाजारों में यूरो का प्रदर्शन मिला-जुला नजर आ रहा है। प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले आज के कारोबार में यूरो ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के सामने सबसे मजबूत बनकर उभरा है। विभिन्न मुद्राओं के बीच आपसी उतार-चढ़ाव का आकलन करने वाली तालिका और हीट मैप के अनुसार यूरो ने कुछ मुद्राओं के मुकाबले बढ़त दर्ज की है, जबकि अमेरिकी डॉलर के मुकाबले इस पर भारी दबाव देखा जा रहा है।
EUR/USD मुद्रा जोड़ी मई 2025 के बाद के अपने सबसे निचले स्तर पर फिसल गई है। बुधवार के कारोबारी सत्र के दौरान यह जोड़ी लुढ़ककर 1.1312 के स्तर तक पहुंच गई, जो जनवरी महीने में दर्ज 1.2082 के शिखर से काफी नीचे है। यूरो में आई इस भारी गिरावट की मुख्य वजह अमेरिकी डॉलर की व्यापक मजबूती, भू-राजनीतिक मोर्चे पर बढ़ती अनिश्चितताएं और ऊर्जा कीमतों में तेजी को लेकर यूरोप की संवेदनशील स्थिति है। हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि यदि यूरोज़ोन में मुद्रास्फीति का कोई अप्रत्याशित झटका फिर से सामने आता है, तो ब्याज दरों में बदलाव की उम्मीदों के चलते यूरो को एक अप्रत्याशित सहारा मिल सकता है।
यूरोपीय सेंट्रल बैंक की कार्यप्रणाली और नीतिगत साधन
जर्मनी के फ्रैंकफर्ट में स्थित यूरोपीय सेंट्रल बैंक पूरे यूरोज़ोन के लिए रिज़र्व बैंक के रूप में कार्य करता है। ईसीबी का प्रमुख काम यूरोज़ोन के भीतर ब्याज दरें तय करना और क्षेत्र की मौद्रिक नीति का कुशल संचालन करना है। केंद्रीय बैंक का प्राथमिक और सबसे महत्वपूर्ण अधिदेश मूल्य स्थिरता बनाए रखना है, जिसका सीधा अर्थ मुद्रास्फीति की दर को लगभग 2 प्रतिशत के आसपास सीमित रखना है।
इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए बैंक मुख्य रूप से ब्याज दरों को बढ़ाने या घटाने के पारंपरिक साधन का उपयोग करता है। सामान्य आर्थिक नियमों के अनुसार जब ब्याज दरें अपेक्षाकृत ऊंची रखी जाती हैं, तो यूरो को मजबूती मिलती है और यह निवेशकों के लिए आकर्षक बन जाता है, जबकि दरों में कटौती से यूरो अक्सर कमजोर पड़ता है। ईसीबी की गवर्निंग काउंसिल साल में आठ बार मौद्रिक नीति संबंधी अहम बैठकें करती है। इन महत्वपूर्ण बैठकों में यूरोज़ोन के सभी राष्ट्रीय केंद्रीय बैंकों के प्रमुख और छह स्थायी सदस्य शामिल होते हैं, जिनमें ईसीबी अध्यक्ष क्रिस्टीन लेगार्ड भी प्रमुख रूप से निर्णय प्रक्रिया का नेतृत्व करती हैं।
क्वांटिटेटिव ईजिंग और क्वांटिटेटिव टाइटनिंग का तंत्र
अत्यधिक आर्थिक दबाव या असामान्य संकट के समय यूरोपीय सेंट्रल बैंक क्वांटिटेटिव ईजिंग (QE) जैसे अपरंपरागत मौद्रिक नीति उपकरण का सहारा लेता है। इस प्रक्रिया के तहत केंद्रीय बैंक नई यूरो मुद्रा जारी करता है और उस नकदी का उपयोग बैंकों तथा अन्य वित्तीय संस्थानों से सरकारी या कॉर्पोरेट बॉन्ड खरीदने के लिए करता है। बाजार में बड़े पैमाने पर नकदी डालने से वित्तीय प्रणाली में लिक्विडिटी बढ़ती है, लेकिन इसके परिणामस्वरूप आमतौर पर यूरो कमजोर होता है। क्वांटिटेटिव ईजिंग को केवल उस अंतिम उपाय के रूप में अपनाया जाता है जब सिर्फ ब्याज दरों को कम करने से महंगाई और विकास को संतुलित करना संभव नहीं रह जाता। ईसीबी ने इस उपकरण का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल वर्ष 2009 से 2011 के वित्तीय संकट के दौरान, वर्ष 2015 में जब मुद्रास्फीति लगातार निचले स्तर पर बनी हुई थी, और हाल ही में कोविड महामारी के भारी आर्थिक व्यवधान के दौरान किया था।
इसके विपरीत जब अर्थव्यवस्था पुनरुद्धार की दिशा में आगे बढ़ती है और मुद्रास्फीति में तेजी आने लगती है, तब बैंक क्वांटिटेटिव टाइटनिंग (QT) की प्रक्रिया शुरू करता है। क्वांटिटेटिव ईजिंग में जहां केंद्रीय बैंक वित्तीय संस्थानों को नकदी प्रदान करने के लिए बॉन्ड खरीदता है, वहीं क्वांटिटेटिव टाइटनिंग में ईसीबी नए बॉन्ड खरीदना बंद कर देता है और अपने पास पहले से मौजूद बॉन्ड के मैच्योर होने पर मिलने वाले मूलधन का पुनर्निवेश करना भी रोक देता है। यह प्रक्रिया बाजार से अतिरिक्त नकदी को सोखने का काम करती है और आम तौर पर यह यूरो के लिए सकारात्मक व तेजी लाने वाली मानी जाती है।
अन्य वैश्विक संपत्तियों और कमोडिटी बाजारों की स्थिति
मुद्रा और वित्तीय बाजारों के अन्य क्षेत्रों में भी बुधवार को महत्वपूर्ण हलचल देखी गई। एशियाई सत्र में AUD/USD दो महीने के निचले स्तर 0.6950 के करीब कारोबार करता नजर आया। अगस्त महीने में ऑस्ट्रेलिया के अंतर्निहित उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आंकड़े उम्मीद से कमजोर रहे, जिससे रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा नीतिगत दरों में आगे और बढ़ोतरी की संभावनाओं को झटका लगा। इसके अतिरिक्त चीन के मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई आंकड़ों ने भी ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को कोई खास सहारा नहीं दिया, जबकि अमेरिकी डॉलर की तेजी में ठहराव आया था।
वहीं USD/JPY जोड़ी एशियाई सत्र में 157.00 के नीचे दबाव में रही। बैंक ऑफ जापान द्वारा सख्त मौद्रिक नीति अपनाने की उम्मीदों और बाजार में हस्तक्षेप के संभावित जोखिमों ने जापानी येन को सहारा दिया, जिसने घरेलू स्तर पर आए कमजोर औद्योगिक उत्पादन और खुदरा बिक्री आंकड़ों के असर को काफी हद तक संतुलित कर दिया। दूसरी ओर अमेरिकी डॉलर में आई हल्की नरमी ने भी इस मुद्रा जोड़ी की गिरावट में योगदान दिया।
कमोडिटी बाजार में सोने की कीमतों में एक यू-टर्न देखा गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना प्रति ट्रॉय औंस 4,200 डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार करने के बाद फिसलकर 4,150 डॉलर के दायरे में आ गया। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में आए उतार-चढ़ाव और डॉलर के अपने नुकसान की भरपाई करने के कारण कीमती धातुओं में मुनाफावसूली हावी रही।
डिजिटल एसेट बाजार में बुधवार को बिटकॉइन सुस्त कारोबार करता दिखाई दिया, जहां खरीदार 83,000 डॉलर के तत्काल समर्थन स्तर को बचाने के लिए कड़ा संघर्ष करते नजर आए। इथेरियम भी बिटकॉइन की चाल का अनुसरण करते हुए ऊपर की तरफ 2,700 डॉलर और नीचे की तरफ 2,600 डॉलर के स्तरों के दायरे में फंसा रहा। वहीं रिपल लगभग 1.50 डॉलर के आसपास स्थिर कारोबार करता देखा गया।



















