सोमवार को यूरोपीय कारोबारी सत्र के दौरान ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने पिकैक्स पर्वत (कोलांग कूह) पर कथित परमाणु गतिविधियों से जुड़ी तमाम खबरों को पूरी तरह निराधार बताया। इसके साथ ही प्रवक्ता ने यह भी स्पष्ट किया कि सऊदी अरब ने तेहरान और खाड़ी देशों के बीच ओमान में होने वाली अहम बैठक को न कराने पर जोर दिया था। पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक तनावों के बीच सामने आए इस बयान ने वैश्विक वित्तीय बाजारों, मुद्रा विनिमय दरों और निवेशकों की जोखिम उठाने की क्षमता पर गहरा असर डाला है।
ग्लोबल मार्केट में जोखिम का गणित: रिस्क-ऑन बनाम रिस्क-ऑफ
वित्तीय जगत की शब्दावली में रिस्क-ऑन और रिस्क-ऑफ दो ऐसे व्यापक पैमाने हैं, जो यह दर्शाते हैं कि किसी विशेष समयावधि में निवेशक कितना जोखिम उठाने को तैयार हैं। जब बाजार में रिस्क-ऑन का माहौल होता है, तब निवेशक भविष्य के आर्थिक परिदृश्य को लेकर आशान्वित रहते हैं। ऐसी स्थिति में वे अधिक रिटर्न की उम्मीद में जोखिम भरी संपत्तियों की खरीदारी तेज कर देते हैं। इसके विपरीत, जब बाजार रिस्क-ऑफ रुख अख्तियार करता है, तब अनिश्चितता और चिंताओं के कारण निवेशक सतर्क हो जाते हैं। वे अपनी पूंजी की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ऐसे सुरक्षित साधनों की तरफ रुख करते हैं, जहां रिटर्न भले ही मामूली हो, पर निवेश पूरी तरह सुरक्षित रहे।
रिस्क-ऑन के दौर में आमतौर पर शेयर बाजारों में जोरदार तेजी दर्ज की जाती है। इस दौरान सोने को छोड़कर लगभग सभी प्रमुख कमोडिटीज की कीमतों में इजाफा होता है, क्योंकि वे मजबूत आर्थिक विकास की संभावनाओं से सीधे लाभान्वित होती हैं। कच्चे माल और कमोडिटीज का भारी निर्यात करने वाले देशों की मुद्राएं मजबूत मांग के दम पर चढ़ती हैं, और साथ ही क्रिप्टोकरेंसी संपत्तियों में भी उछाल देखने को मिलता है। दूसरी ओर, रिस्क-ऑफ के माहौल में बॉन्ड बाजार चमकता है, खासकर प्रमुख सरकारी बॉन्ड में तेजी आती है। ऐसे समय में सोना अपनी चमक बिखेरता है, और सुरक्षित पनाहगाह मानी जाने वाली पारंपरिक मुद्राएं जैसे जापानी येन, स्विस फ्रैंक और अमेरिकी डॉलर भारी मांग में आ जाते हैं।
कमोडिटी मुद्राओं का रुख और जोखिम धारणा
जब भी वित्तीय बाजार रिस्क-ऑन की स्थिति में आगे बढ़ते हैं, तब ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD), कैनेडियन डॉलर (CAD), न्यूजीलैंड डॉलर (NZD) के साथ-साथ रूसी रूबल (RUB) और दक्षिण अफ्रीकी रैंड (ZAR) जैसी छोटी विदेशी मुद्राएं बढ़त हासिल करने की प्रवृत्ति दिखाती हैं। इन देशों की अर्थव्यवस्थाएं अपनी आर्थिक वृद्धि के लिए मुख्य रूप से कमोडिटी निर्यात पर अत्यधिक निर्भर हैं। रिस्क-ऑन अवधि के दौरान कच्चे माल की कीमतों में स्वाभाविक रूप से वृद्धि होती है, क्योंकि निवेशकों को भविष्य में तेज आर्थिक गतिविधियों के चलते औद्योगिक मांग बढ़ने की उम्मीद होती है।
इसके ठीक उलट, रिस्क-ऑफ दौर में अमेरिकी डॉलर (USD), जापानी येन (JPY) और स्विस फ्रैंक (CHF) जैसी प्रमुख वैश्विक मुद्राएं तेजी से चढ़ती हैं। अमेरिकी डॉलर दुनिया की प्राथमिक रिजर्व मुद्रा है, और किसी भी वैश्विक संकट के समय निवेशक अमेरिकी सरकारी ऋण प्रतिभूतियों की जमकर खरीदारी करते हैं, क्योंकि दुनिया की इस सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के डिफॉल्ट होने की कोई संभावना नहीं मानी जाती। वहीं, जापानी सरकारी बॉन्ड की मांग बढ़ने से जापानी येन मजबूत होता है, क्योंकि इन बॉन्डों का एक बड़ा हिस्सा जापान के घरेलू निवेशकों के पास है जो संकट के समय भी अपनी होल्डिंग्स नहीं बेचते। इसी तरह, स्विस फ्रैंक को स्विट्जरलैंड के बेहद कड़े बैंकिंग कानूनों और मजबूत पूंजी सुरक्षा नियमों के कारण निवेशकों का पहला भरोसा मिलता है।
विदेशी मुद्रा बाजार में प्रमुख जोड़ों की चाल
सोमवार को एशियाई व्यापारिक सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) का युग्म करीब 0.7140 के स्तर को छूते हुए डेढ़ सप्ताह के निचले स्तर तक फिसल गया, हालांकि यह गिरावट ज्यादा आगे नहीं बढ़ सकी। इसके बाद हाजिर कीमतें 0.7100 के मध्य से ठीक ऊपर कारोबार करती दिखीं, जो दिन के दौरान लगभग 0.25% की गिरावट दर्शाता है। जोखिम के रुख में नरमी ने इस कमोडिटी आधारित मुद्रा पर दबाव बनाए रखा।
दूसरी ओर, नए कारोबारी सप्ताह की शुरुआत में अमेरिकी डॉलर और जापानी येन (USD/JPY) के जोड़े में खरीदारों की सक्रियता देखने को मिली। एशियाई सत्र के दौरान यह जोड़ी चढ़कर 154.00 के आंकड़े के करीब पहुंची, जिससे पिछले शुक्रवार को हुए नुकसान की कुछ हद तक भरपाई हो गई। हालांकि, हाजिर कीमतें पिछले लगभग एक सप्ताह से एक सीमित दायरे में ही कैद हैं और पिछले मंगलवार को छुए गए लगभग सात महीने के निचले स्तर के बेहद करीब बनी हुई हैं। कारोबारी इस सप्ताह केंद्रीय बैंकों से जुड़ी महत्वपूर्ण बैठकों और नीतिगत आयोजनों के नतीजों का इंतजार कर रहे हैं। उपलब्ध लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार, USD/JPY की कीमत वर्तमान में 156.85 पर दर्ज की गई है, जो पिछले 156.13 के बंद भाव से 0.46% की बढ़त दर्शाती है। इसका 52 सप्ताह का दायरा 146.61 से 163.98 के बीच रहा है, जबकि वॉल्यूम 20-दिवसीय औसत के 1.00 गुना पर सामान्य बना हुआ है। तकनीकी संकेतकों में 14-दिवसीय RSI 49 पर है, MACD -1.05 बनाम सिग्नल -1.24 (हिस्टोग्राम 0.19, बुलिश) पर है, और मूविंग एवरेज के मोर्चे पर 20-दिवसीय EMA 156.47, 50-दिवसीय EMA 158.10 तथा 200-दिवसीय EMA 157.62 दर्ज है। इसके अलावा 50-दिवसीय SMA 159.04 और 200-दिवसीय SMA 158.40 पर स्थित है, जिसमें EMA50 के EMA200 से ऊपर होने का गोल्डन क्रॉस बना हुआ है, जबकि कीमत एक दीर्घकालिक गिरावट के ट्रेंड में है। 20-दिवसीय बोलिंगर बैंड 151.92 से 161.61 के बीच है (मध्य रेखा 156.76) और कीमत बैंड के भीतर बनी हुई है। 14-दिवसीय ADX 39 पर ट्रेंडिंग स्थिति दिखा रहा है, स्टोकेस्टिक की फास्ट लाइन 53 व सिग्नल लाइन 46 पर है, जबकि 14-दिवसीय ATR 1.47 है। इस जोड़ी का 20-दिवसीय सपोर्ट लगभग 152.90 और रेजिस्टेंस करीब 160.38 पर देखा जा रहा है, जिसमें पिवट पॉइंट, सपोर्ट और रेजिस्टेंस स्तर 156.85 के आसपास केंद्रित हैं।
क्रिप्टो बाजार और कनाडा के मुद्रास्फीति आंकड़े
डिजिटल एसेट बाजार में पाई नेटवर्क (PI) ने सोमवार को अपनी रिकवरी का दायरा बढ़ाते हुए लगातार दो हफ्तों की बढ़त के बाद $0.097 के स्तर से ऊपर कारोबार किया। इसके इकोसिस्टम के निरंतर विकास और बेहतर डेवलपर टूल्स की उपलब्धता से उपयोगिता में सुधार देखने को मिल रहा है। तकनीकी संकेतक एक प्रारंभिक सुधार की ओर इशारा करते हैं, लेकिन ऊपर की ओर मौजूद एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) इसके लिए एक कड़ी चुनौती बने हुए हैं और PI की तेजी को सीमित कर रहे हैं।
वैश्विक मैक्रो आर्थिक आंकड़ों के मोर्चे पर, सोमवार को जारी होने वाले कनाडा के अगस्त उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आंकड़ों पर निवेशकों की पैनी नजरें टिकी हुई हैं। सांख्यिकी कनाडा द्वारा जारी किए जाने वाले ये आंकड़े बैंक ऑफ कनाडा की 2 सितंबर की बैठक के बाद मूल्य दबावों की वास्तविक स्थिति पेश करेंगे। उस बैठक में केंद्रीय बैंक के नीति निर्माताओं ने नीतिगत ब्याज दर को 2.25% पर स्थिर रखा था, जो व्यापक रूप से बाजार विश्लेषकों के अनुमानों के अनुरूप था। इन आंकड़ों के आने के बाद मुद्रा बाजारों में उतार-चढ़ाव बढ़ने की पूरी संभावना है।


















