दक्षिण कोरिया का केंद्रीय बैंक आगामी मौद्रिक नीति समीक्षाओं में अपनी ब्याज दरों को मौजूदा स्तर पर ही बनाए रख सकता है। स्टैंडर्ड चार्टर्ड के विश्लेषक चोंग हून पार्क के एक हालिया आर्थिक आकलन में यह बात सामने आई है कि बैंक ऑफ कोरिया अक्टूबर और नवंबर दोनों महीनों में अपनी मानक रेपो दर को 3.00 प्रतिशत पर बरकरार रखने का विकल्प चुन सकता है। देश में आर्थिक विकास और मुद्रास्फीति का मिला-जुला संतुलन अधिक अनुकूल नहीं होने के बावजूद वित्तीय स्थिरता से जुड़ी चिंताएं केंद्रीय बैंक को जल्दबाजी में कोई भी कदम उठाने से रोक सकती हैं।
मुद्रास्फीति और तकनीकी क्षेत्र की मजबूत रफ्तार
विश्लेषण के अनुसार दक्षिण कोरियाई अर्थव्यवस्था में कोर मुद्रास्फीति का दबाव अभी भी बना हुआ है। इसके साथ ही कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई और सेमीकंडक्टर निर्माण उद्योग से मिल रहे मजबूत समर्थन के दम पर आर्थिक विकास दर को गति मिल रही है। आमतौर पर जब विकास दर मजबूत होती है और महंगाई जिद्दी बनी रहती है, तब केंद्रीय बैंकों पर सख्त मौद्रिक रुख अपनाने का दबाव बढ़ जाता है। दक्षिण कोरिया के संदर्भ में भी नवंबर की बैठक में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता है।
विश्लेषकों का मानना है कि अक्टूबर की नीतिगत बैठक जोखिमों के बदलते संतुलन को समझने के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी। इस बैठक में यदि नीति निर्माताओं का ध्यान केवल महंगाई और आर्थिक विस्तार पर केंद्रित रहा, तो आगे चलकर दरों में वृद्धि की संभावना मजबूत हो सकती है। फिर भी तात्कालिक आधार पर अन्य वित्तीय चुनौतियां दर वृद्धि के रास्ते में रुकावट बन रही हैं।
शेयर बाजार की गिरावट और सख्त वित्तीय हालात
नीतिगत दरों में ठहराव की सबसे प्रमुख वजह दक्षिण कोरियाई शेयर बाजार यानी कोस्पी इंडेक्स में आई तेज गिरावट को माना जा रहा है। इक्विटी बाजार में हुए इस बड़े करेक्शन के चलते समग्र वित्तीय स्थितियों में अचानक कड़ापन आ गया है। वित्तीय बाजार में बढ़ी इस सख्ती के कारण बैंकों और वित्तीय संस्थानों में तरलता की स्थिति प्रभावित हुई है, जिससे अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव न पड़े, इसलिए केंद्रीय बैंक के लिए नीतिगत संयम बरतना प्राथमिक विकल्प बन गया है।
इसी वजह से स्टैंडर्ड चार्टर्ड का बुनियादी परिदृश्य यही है कि बैंक ऑफ कोरिया नवंबर में भी अपनी दरों को 3.00 प्रतिशत पर ही थामे रखेगा। विश्लेषकों का अनुमान है कि दरों में बढ़ोतरी का वास्तविक सिलसिला 2027 से पहले शुरू होने की संभावना कम है। अनुमानों के मुताबिक वर्ष 2027 की शुरुआत में 25 आधार अंकों की पहली बढ़ोतरी हो सकती है, जिसके बाद उसी वर्ष की पहली छमाही में 25 आधार अंकों का एक और इजाफा देखा जा सकता है। इन दो वृद्धियों के बाद दक्षिण कोरिया में टर्मिनल ब्याज दर 2027 के अंत तक 3.50 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।
वैश्विक मुद्रा बाजार पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व का असर
दूसरी तरफ एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में भी अहम हलचल देखने को मिली। शुक्रवार को ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूत होकर 0.6950 के स्तर की तरफ बढ़ गया। अमेरिकी डॉलर पर बने बिकवाली के दबाव ने इस मुद्रा जोड़े को बढ़त दर्ज करने में मदद की। इस बिकवाली के पीछे फेडरल रिजर्व के चेयरमैन वॉर्श की टिप्पणियों को मुख्य वजह माना जा रहा है।
फेड प्रमुख वॉर्श ने यह स्पष्ट किया कि वे मूल्य स्थिरता को बहाल करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं, लेकिन उन्होंने भविष्य में ब्याज दरों के संभावित रास्ते को लेकर कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिया। भविष्य में मौद्रिक सख्ती को लेकर कोई ठोस दिशा न मिलने से डॉलर पर नकारात्मक असर पड़ा। इसी बिकवाली के चलते डॉलर येन की विनिमय दर भी एशियाई सत्र में दबाव में आई और यह 158.00 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे खिसक गई।
सोने और क्रिप्टोकरेंसी बाजार का हाल
कमोडिटी बाजार में सोने के भाव शुक्रवार को 4,200 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के अहम मनोवैज्ञानिक स्तर के नीचे सीमित दायरे में घटते-बढ़ते रहे। पीली धातु की इस अनिर्णायक चाल की वजह अमेरिकी डॉलर में आई हल्की गिरावट और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में आई सुस्त रिकवरी का मिला-जुला प्रभाव रही। निवेशक किसी भी दिशा में बड़ा दांव लगाने से पहले आने वाले व्यापक आर्थिक आंकड़ों की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
डिजिटल परिसंपत्तियों के क्षेत्र में भी अक्टूबर के महीने में सुस्ती का माहौल देखा गया है। दुनिया की सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन इस सप्ताह की शुरुआत में फिसलकर 80,000 डॉलर के स्तर से नीचे चली गई थी। हालांकि शुक्रवार को इसमें मामूली सुधार हुआ और यह 82,000 डॉलर के आसपास कारोबार करती नजर आई। व्यापक आर्थिक अनिश्चितताओं और संस्थागत व खुदरा मांग में आई कमी के चलते क्रिप्टो बाजार अभी भी दबाव में बना हुआ है।



















