स्विट्जरलैंड के केंद्रीय बैंक की आगामी मौद्रिक नीति बैठक को लेकर वित्तीय बाजारों में व्यापक चर्चा चल रही है। जापानी वित्तीय सेवा दिग्गज नोमुरा की यूरोपीय अर्थशास्त्र टीम का मानना है कि स्विस नेशनल बैंक सितंबर 2026 की अपनी समीक्षा बैठक में मुख्य नीतिगत ब्याज दर को 0.00% पर यथावत बनाए रखेगा। इस टीम की अगुवाई जोसी एंडरसन, जॉर्ज बकले और आंद्रेज स्जसेपनियाक कर रहे हैं। इन विश्लेषकों का स्पष्ट कहना है कि स्विट्जरलैंड में सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि मजबूत रही है और मुद्रास्फीति में हालिया उछाल आया है, इसके बावजूद दरों में किसी भी तरह की बढ़ोतरी कम से कम 2028 तक टलने की संभावना है।
मुद्रास्फीति का दबाव और ऊर्जा लागत का असर
स्विट्जरलैंड के हालिया आधिकारिक आंकड़ों पर नजर डालें तो उपभोक्ता कीमतों में अप्रत्याशित उछाल देखा गया है। अगस्त के महीने में वार्षिक मुद्रास्फीति दर बढ़कर 0.8% पर पहुंच गई, जो जुलाई में 0.4% दर्ज की गई थी। सितंबर 2024 के बाद से यह देश में दर्ज की गई सबसे तेज वार्षिक महंगाई दर है। हालांकि, इस बढ़ोतरी का मुख्य कारण ऊर्जा की बढ़ती लागत है। यदि ऊर्जा और अस्थिर घटकों को हटाकर देखा जाए, तो मुख्य यानी कोर मुद्रास्फीति अभी भी 0.4% के वार्षिक स्तर पर काफी नियंत्रित बनी हुई है।
जोसी एंडरसन, जॉर्ज बकले और आंद्रेज स्जसेपनियाक के नेतृत्व वाली विश्लेषक टीम ने कहा, "हम उम्मीद करते हैं कि एसएनबी अपनी सितंबर बैठक में पॉलिसी दर को 0.00% पर अपरिवर्तित रखेगा।" उनका अनुमान है कि तीसरी तिमाही के दौरान तिमाही आधार पर मुद्रास्फीति 0.7% रह सकती है, जो केंद्रीय बैंक के अपने अनुमानों के पूरी तरह अनुकूल है। इसके बाद चौथी तिमाही में मुद्रास्फीति की यह तिमाही रफ्तार तेज होकर 1.0% तक जाने का अनुमान लगाया गया है।
मुद्रा बाजार, फ़्रैंक की चाल और वैश्विक भू-राजनीति
विदेशी मुद्रा बाजार में स्विस फ़्रैंक की स्थिति नीति निर्माताओं के लिए एक अहम पहलू बनी हुई है। फ़्रैंक में कमजोरी दर्ज की गई है, जिससे विदेशी मुद्रा बाजार में हस्तक्षेप की पारंपरिक भाषा की ओर लौटने का मार्ग खुल सकता है। विदेशी मुद्रा बाजार में EUR/CHF की विनिमय दर 2025 की शुरुआत के बाद के अपने उच्चतम स्तर के काफी करीब पहुंच गई है। ऐसी परिस्थिति में केंद्रीय बैंक के नीति निर्माताओं को लग सकता है कि बाजार में सक्रिय रूप से हस्तक्षेप करने की प्रतिबद्धता जताना फिलहाल आवश्यक नहीं है।
इसके साथ ही वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव भी एक बड़ी भूमिका निभा रहा है। ईरान युद्ध के फिर से भड़कने और तनाव गहराने की वजह से निवेशक सुरक्षित संपत्तियों की तरफ रुख कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में स्विस फ़्रैंक पर ऊपर की ओर दबाव बन सकता है। केंद्रीय बैंक इस संभावित दबाव को लेकर सतर्क रहना चाहेगा और इस बात के पूरे संकेत हैं कि वह जून की अपनी पूर्व मार्गदर्शन नीति को फिलहाल बरकरार रखेगा। विश्लेषकों का मानना है कि केंद्रीय बैंक मुद्रा के स्तर और घरेलू मुद्रास्फीति के संतुलन को साधते हुए कदम आगे बढ़ाएगा।
वैश्विक बाजारों की हलचल: डॉलर, येन और सोने की स्थिति
वैश्विक विदेशी मुद्रा और कमोडिटी बाजारों में भी इस दौरान काफी हलचल देखने को मिल रही है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आक्रामक रुख के कारण अमेरिकी डॉलर में जो जोरदार उछाल आया था और वह जुलाई के अंत के बाद के उच्चतम स्तर तक पहुंच गया था, उस तेजी पर गुरुवार के एशियाई कारोबारी सत्र में कुछ विराम लगा। इसका सीधा असर अन्य प्रमुख मुद्राओं पर देखा गया।
ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी (AUD/USD) ने 0.7100 के मनोवैज्ञानिक स्तर को फिर से हासिल कर लिया। ऑस्ट्रेलियाई रिजर्व बैंक की ओर से ब्याज दरें बढ़ाए जाने के बढ़ते कयासों तथा अमेरिका एवं ईरान के बीच राजनयिक बातचीत की उम्मीदों ने बाजार के जोखिम उठाने के मिजाज को सहारा दिया। इससे जोखिम संवेदनशील मुद्राओं को मजबूती मिली।
दूसरी ओर, USD/JPY की जोड़ी में गुरुवार के एशियाई कारोबार के दौरान 156.00 से नीचे के स्तर से तेजी से वापसी देखी गई। डॉलर-येन जोड़ी अपने तीन दिनों के लगातार बढ़त के सिलसिले को तोड़ने की कोशिश कर रही है, जो पिछले दिन दो हफ्तों के उच्च स्तर पर पहुंची थी। फेडरल रिजर्व के बाद डॉलर सात हफ्तों के शीर्ष स्तर से थोड़ा सुस्त पड़ा है, जबकि बैंक ऑफ जापान द्वारा मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने के आक्रामक कदमों के अनुमानों से जापानी येन को समर्थन मिल रहा है। बाजार का सारा ध्यान अब शुक्रवार को आने वाले बैंक ऑफ जापान के नीतिगत फैसले पर केंद्रित हो चुका है।
कमोडिटी बाजार में सोने ने जबरदस्त छलांग लगाई। पीली धातु लगातार तीन सत्रों की गिरावट का सिलसिला समाप्त करते हुए प्रति ट्रॉय औंस लगभग $4,480 के साप्ताहिक शीर्ष स्तर पर पहुंच गई। सोने की इस तेज छलांग को अमेरिकी डॉलर की कमजोरी और कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट से अतिरिक्त समर्थन मिला।
जापान की ऐतिहासिक कम ब्याज दरों का नया दौर
जापान की दशकों पुरानी शून्य और अति-कम ब्याज दर नीति का वैश्विक वित्तीय तंत्र पर गहरा असर रहा है। जापान की इन बेहद सस्ती दरों ने एक दशक से अधिक समय तक खरबों डॉलर के अंतरराष्ट्रीय निवेश को वित्तपोषित करने में मदद की थी, जिससे जापानी येन दुनिया का सबसे सस्ता फंडिंग स्रोत बन गया था। हालांकि, जब दुनिया भर के अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंकों ने मुद्रास्फीति से निपटने के लिए ब्याज दरों में भारी वृद्धि की, तब भी जापान वैश्विक अपवाद बना रहा।
अब परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं। बैंक ऑफ जापान द्वारा इसी सप्ताह अपनी मौद्रिक नीति को और अधिक कड़ा किए जाने की प्रबल संभावना है। यदि जापानी केंद्रीय बैंक सख्ती के रास्ते पर आगे बढ़ता है, तो अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में येन आधारित सस्ते कर्ज का वह ऐतिहासिक दौर एक बिल्कुल नए और चुनौतीपूर्ण चरण में प्रवेश कर जाएगा। वैश्विक पूंजी प्रवाह पर इसके गहरे प्रभाव पड़ने तय हैं।



















