सोहरा इंटरनेशनल हाफ मैराथन के पांचवें संस्करण में धावकों का अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिला, जहां कुल 11,672 पंजीकृत एथलीटों ने हिस्सा लेकर नया रिकॉर्ड बनाया। इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता के 21 किलोमीटर एलीट वर्ग में सतीश कुमार वर्मा और तेजस्विनी नरेंद्र लाम्बकाने ने अपने-अपने वर्गों में शानदार प्रदर्शन करते हुए मुख्य खिताब अपने नाम किए।
एलीट और स्थानीय वर्ग के परिणाम
पुरुषों की 21 किलोमीटर एलीट स्पर्धा में सतीश कुमार वर्मा ने 1 घंटे 3 मिनट और 4 सेकंड का समय निकालते हुए पहला स्थान हासिल किया। वहीं महिलाओं के एलीट वर्ग में तेजस्विनी नरेंद्र लाम्बकाने ने 1 घंटे 15 मिनट और 20 सेकंड के समय के साथ जीत दर्ज की।
घरेलू खिलाड़ियों के लिए आयोजित मेघालय वर्ग की 21 किलोमीटर रेस में भी कड़ा मुकाबला देखने को मिला। पुरुषों के मेघालय वर्ग में वोल्बेटस्टार रामसेज 1 घंटे 3 मिनट और 26 सेकंड के समय के साथ शीर्ष पर रहे। दूसरी ओर महिलाओं के मेघालय वर्ग में मार्क्वीनलेस रामसेज ने 1 घंटे 23 मिनट और 55 सेकंड में दौड़ पूरी कर पहला स्थान प्राप्त किया।
विभिन्न आयु वर्गों और राज्यों की सहभागिता
इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन में देश के लगभग 24 राज्यों के धावकों के साथ-साथ विदेशी एथलीटों ने भी हिस्सा लिया। 10 किलोमीटर की रेस में अलग-अलग आयु वर्गों के मुकाबले हुए। 18 से 39 वर्ष के पुरुष वर्ग में वानकिरमेन एल मावफलांग 28 मिनट 28 सेकंड के समय के साथ विजेता बने, जबकि महिला वर्ग में डापलिन वाहलांग ने 37 मिनट 20 सेकंड में रेस जीतकर पहला स्थान पाया।
40 से 54 वर्ष के आयु वर्ग में भारत भूषण ने 29 मिनट 14 सेकंड का समय लेकर पुरुषों में जीत दर्ज की, जबकि मेना मैरी वाहलांग 41 मिनट 55 सेकंड के साथ महिलाओं में शीर्ष पर रहीं। इसके अलावा 55 वर्ष और उससे अधिक उम्र के वर्ग में स्वॉन्डिंग मावलोंग ने 38 मिनट 7 सेकंड में पुरुषों की रेस जीती, वहीं महिलाओं में थ्लिंगदा वानियांग 45 मिनट के समय के साथ विजेता बनीं।
पुरस्कार राशि में भारी बढ़ोतरी और आर्थिक प्रभाव
आयोजकों ने इस बार एलीट वर्ग की इनामी राशि को दोगुना कर दिया। 21 किलोमीटर एलीट पुरुषों और महिलाओं के विजेताओं को 3-3 लाख रुपये की नकद राशि दी गई। उपविजेताओं को 2-2 लाख रुपये और तीसरा स्थान पाने वाले धावकों को 1-1 लाख रुपये का पुरस्कार मिला। चौथे से आठवें स्थान पर रहने वाले एथलीटों को 10-10 हजार रुपये का सांत्वना पुरस्कार दिया गया। स्थानीय मेघालय वर्ग के विजेताओं को भी नकद पुरस्कार प्रदान किए गए, जिसमें 21 किलोमीटर मेघालय ओपन विजेता को 50,000 रुपये मिले।
मेघालय के खेल एवं युवा मामलों के मंत्री वाइलाडमिकी शल्ला ने बताया कि इस मैराथन की शुरुआत महज 750 धावकों से हुई थी, जो अब बढ़कर लगभग 12,000 तक पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि बेहतर लॉजिस्टिक्स और सुविधाओं को बनाए रखने के लिए रजिस्ट्रेशन सीमित करने पड़े, वरना मांग 20,000 के पार पहुंच सकती थी। उन्होंने कहा कि इस आयोजन से स्थानीय होमस्टे संचालकों, परिवहन सेवाओं और किसानों को सीधा आर्थिक लाभ मिला है। इसने सोहरा को सिर्फ बारिश और झरनों के शहर के बजाय एक प्रमुख खेल स्थल के रूप में पहचान दिलाई है। मंत्री ने धावकों से मेघालय का ब्रांड एम्बेसडर बनने की अपील की और बताया कि राज्य अगले वर्ष 39वें राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी की तैयारी कर रहा है।
सुरक्षा व्यवस्था और एआईएमएस से मान्यता
तीन बार 200 मील की अल्ट्रामैराथन पूरी कर चुके भारत के प्रसिद्ध एथलीट सुकांत सुकी सिंह ने भी कार्यक्रम में शिरकत की। उन्होंने मेघालय के बुनियादी ढांचे और प्राकृतिक परिदृश्य की सराहना करते हुए कहा कि इस राज्य में भारत की खेल राजधानी बनने की अपार क्षमता है।
इस प्रतियोगिता का आयोजन मेघालय स्टेट ओलंपिक्स एसोसिएशन (MSOA), खेल एवं युवा मामलों के निदेशालय, मेघालय एथलेटिक्स एसोसिएशन और अन्य हितधारकों द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। इस दौड़ को एसोसिएशन ऑफ इंटरनेशनल मैराथन्स एंड डिस्टेंस रेसेज (AIMS) द्वारा मान्यता प्राप्त है। पूरे मार्ग पर पुलिस बल, मेडिकल टीम, पैरामेडिक्स और स्वयंसेवकों की तैनाती के साथ पेयजल स्टेशन बनाए गए थे ताकि धावकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।





















