मार्च 2019 में जब भारत ने अंतरिक्ष में अपनी सामरिक ताकत का प्रदर्शन करते हुए एक जीवित उपग्रह को मार गिराया था, तब वॉशिंगटन के सबसे सुरक्षित खुफिया गलियारों में अचानक हड़कंप मच गया था। अमेरिकी खुफिया तंत्र को इस बात की तनिक भी पूर्व सूचना नहीं थी कि भारत अंतरिक्ष में इतना बड़ा सैन्य परीक्षण करने जा रहा है। इस गोपनीय और अचानक हुए परीक्षण के बाद अमेरिकी खुफिया कार्यालयों में किस कदर घबराहट और हड़बड़ी की स्थिति पैदा हुई थी, इसका प्रत्यक्ष ब्योरा पूर्व अमेरिकी खुफिया अधिकारी डेविड ग्रश ने एक सार्वजनिक बातचीत के दौरान साझा किया है।
सीक्रेट फोन की घंटियां और वॉशिंगटन में मची अफरा-तफरी
डेविड ग्रश ने बताया कि जिस समय भारत के सफल मिसाइल परीक्षण की जानकारी सामने आई, उस वक्त अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के पास कोई पूर्व खुफिया इनपुट मौजूद नहीं था। पूरी व्यवस्था के लिए यह घटनाक्रम बिल्कुल अप्रत्याशित साबित हुआ।
उस दिन के माहौल को याद करते हुए डेविड ग्रश ने बताया कि वह अपने कार्यालय में मौजूद थे और अचानक उनके मेज पर रखे कई गोपनीय और सुरक्षित फोन एक साथ बजने लगे। अमेरिकी अधिकारी लगातार एक-दूसरे से संपर्क साध रहे थे। अमेरिकी खुफिया तंत्र के अधिकारी आनन-फानन में नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास को कॉल करने लगे ताकि वहां तैनात राजनयिकों और विश्लेषकों से वास्तविक स्थिति का पता लगाया जा सके। वाशिंगटन के रणनीतिकारों के मन में यह सवाल उठ रहा था कि क्या भारत किसी बड़े संघर्ष की तैयारी में है या फिर यह केवल एक सामान्य रणनीतिक शक्ति प्रदर्शन है।
डेविड ग्रश के अनुसार, दफ्तर में मौजूद तमाम सिक्योर फोन लगातार घनघना रहे थे और हर कोई नई दिल्ली संपर्क साधने की होड़ में लगा हुआ था। उन्होंने उस क्षण की अपनी उलझन और अत्यधिक घबराहट का जिक्र करते हुए कहा कि चारों तरफ मची अफरा-तफरी के बीच दिमाग में केवल यही सवाल गूंज रहा था कि अचानक क्या हो गया।
मिशन शक्ति का सफल संचालन और वैश्विक सामरिक समीकरण
यह ऐतिहासिक घटनाक्रम 27 मार्च 2019 को दर्ज किया गया था, जब भारत ने एंटी-सैटेलाइट मिसाइल यानी A-SAT का बेहद सटीक परीक्षण संपन्न किया। इस विशेष सैन्य अभियान को 'मिशन शक्ति' नाम दिया गया था।
यह परीक्षण ओडिशा स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से संचालित किया गया था। वहां से छोड़ी गई एक उन्नत इंटरसेप्टर मिसाइल ने पृथ्वी की निचली कक्षा में लगभग 300 किलोमीटर की ऊंचाई पर चक्कर लगा रहे एक सक्रिय उपग्रह को बेहद सटीक प्रहार के साथ पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। इस प्रक्रिया में प्रयुक्त काइनेटिक इंटरसेप्ट तकनीक के जरिए लक्ष्य को बिना किसी विस्फोटक के केवल मिसाइल की गति और सीधी टक्कर से नष्ट किया गया।
इस उल्लेखनीय उपलब्धि के साथ ही भारत वैश्विक स्तर पर अंतरिक्ष में उपग्रह रोधी क्षमता से लैस चौथा देश बन गया। भारत से पहले यह विशिष्ट तकनीकी क्षमता केवल अमेरिका, रूस और चीन के पास थी। इतने संवेदनशील और जटिल सैन्य परीक्षण को बिना किसी पूर्व सुराग के अत्यंत गोपनीय तरीके से अंजाम दिए जाने ने दुनिया भर के रक्षा विश्लेषकों को हैरत में डाल दिया था।
कक्षा में फैले मलबे की निगरानी और पेंटागन की चिंताएं
उपग्रह के नष्ट होने के बाद के शुरुआती घंटों में अमेरिकी रक्षा प्रतिष्ठानों और पेंटागन में चिंता की एक नई लहर दौड़ गई। अमेरिकी विशेषज्ञों के सामने मुख्य चिंता यह थी कि उपग्रह के विखंडन से पैदा हुआ अंतरिक्षीय मलबा कहीं उनकी सैन्य और व्यावसायिक उपग्रह संपत्तियों के लिए खतरा न बन जाए।
अंतरिक्षीय मलबे की लगातार निगरानी करने वाली अमेरिकी एजेंसी यूनाइटेड स्टेट्स स्ट्रैटेजिक कमांड ने मिसाइल हमले से बने सैकड़ों टुकड़ों की तत्काल ट्रैकिंग शुरू कर दी। अमेरिका इस बात को लेकर बेहद सतर्क था कि अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन यानी ISS और अन्य प्रमुख अंतरिक्ष परिसंपत्तियों को कोई नुकसान न पहुंचे। हालांकि, भारत ने रणनीतिक सूझबूझ दिखाते हुए यह परीक्षण मात्र 300 किलोमीटर की निचली ऊंचाई पर किया था। कम ऊंचाई होने की वजह से बना अधिकांश मलबा कुछ ही हफ्तों के भीतर पृथ्वी के घने वायुमंडल में प्रवेश कर स्वतः जलकर पूरी तरह समाप्त हो गया।
वैश्विक अंतरिक्ष कूटनीति में भारत की नई पहचान
मिशन शक्ति के सफल क्रियान्वयन ने वैश्विक अंतरिक्ष कूटनीति के स्थापित ढांचे को पूरी तरह बदलकर रख दिया। इस ऐतिहासिक परीक्षण से पहले तक पश्चिमी विश्लेषक भारत को केवल नागरिक उपग्रहों के प्रक्षेपण और वैज्ञानिक अनुसंधानों तक सीमित शक्ति के रूप में देखते थे।
इस परीक्षण ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह स्पष्ट संदेश दिया कि भारत अपनी अंतरिक्ष परिसंपत्तियों की रक्षा करने और किसी भी संभावित खतरे का सटीक जवाब देने में पूरी तरह आत्मनिर्भर है। यद्यपि परीक्षण के तुरंत बाद मलबे और अंतरिक्षीय सुरक्षा के मुद्दों पर वॉशिंगटन और नई दिल्ली के बीच कूटनीतिक स्तर पर हल्की असहजता देखी गई थी, किंतु दीर्घकालिक रूप से इसने भारत को एक अपरिहार्य अंतरिक्ष महाशक्ति के रूप में प्रतिष्ठित कर दिया।
डेविड ग्रश का यह हालिया विवरण दर्शाता है कि 2019 में भारत द्वारा उठाए गए इस साहसिक कदम ने वैश्विक महाशक्तियों के रणनीतिक आकलन को हिलाकर रख दिया था। इस मूक और सटीक कार्रवाई ने रेखांकित किया कि अपनी संप्रभुता और सामरिक सुरक्षा के मामलों में भारत बिना किसी बाहरी दबाव के स्वतंत्र निर्णय लेने में पूरी तरह सक्षम है।




















