असम के डिब्रूगढ़ में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के एक सहायक कार्यकारी अभियंता को रंगे हाथ घूस लेते हुए पकड़ा गया है। सतर्कता और भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय की टीम ने बुधवार को यह कार्रवाई की, जहां अधिकारी को 30,000 रुपये की पहली किस्त स्वीकार करते समय दबोचा गया। गिरफ्तार अधिकारी की पहचान मृदुल बागलारी के रूप में हुई है, जो डिब्रूगढ़ में पीडब्ल्यूडी (भवन प्रभाग) के अधीक्षण अभियंता कार्यालय में तैनात थे।
लंबित बिल पास कराने के एवज में मांगी थी रिश्वत
सतर्कता अधिकारियों के अनुसार, एक निर्माण परियोजना से जुड़े ठेकेदार ने आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि मृदुल बागलारी बकाया बिलों के भुगतान की फाइल को आगे बढ़ाने और राशि जारी कराने के बदले रिश्वत की मांग कर रहे थे। अधिकारी ने इस काम के एवज में कुल 1.3 लाख रुपये की अवैध मांग रखी थी। पीड़ित ठेकेदार ने अनुचित दबाव के आगे झुकने के बजाय सतर्कता विभाग से संपर्क कर पूरे मामले की जानकारी दी।
जाल बिछाकर दबोचा, कार्यालय और आवास पर छापेमारी
शिकायत की पुष्टि होने के बाद भ्रष्टाचार निरोधक शाखा के अधिकारियों ने डिब्रूगढ़ स्थित पीडब्ल्यूडी कार्यालय में योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाया। जैसे ही ठेकेदार ने तय योजना के अनुसार 30,000 रुपये की पहली किस्त सौंपी, टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए मृदुल बागलारी को रंगे हाथों पकड़ लिया। गिरफ्तारी के तुरंत बाद अधिकारियों ने मौके पर ही उनसे गहन पूछताछ शुरू की और कार्यालय परिसर की तलाशी ली। इस दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और अन्य फाइलें जब्त की गईं।
घर से भारी नकदी बरामद, जांच का दायरा बढ़ा
कार्यालय में कार्रवाई के साथ ही सतर्कता दल ने मृदुल बागलारी के आवासीय परिसर पर भी एक साथ छापेमारी की। आवास की तलाशी के दौरान अधिकारियों को भारी मात्रा में नकदी मिली, जिसे जांच के लिए कब्जे में ले लिया गया है। जांचकर्ताओं का कहना है कि मामले में विस्तृत पड़ताल की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या इस घूसखोरी के नेटवर्क में विभाग के अन्य कर्मचारी या वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल थे। यह पूरी कार्रवाई सरकारी तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के अभियान का हिस्सा है।





















