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एक साथ चुनाव पर संसदीय समिति से नहीं मिलेंगे देश के मुख्य न्यायाधीश, सुप्रीम कोर्ट प्रशासन ने खारिज की चर्चाभारत
1 अक्तू॰ 2026, 11:33 pm (50 मिनट पहले)· 0

एक साथ चुनाव पर संसदीय समिति से नहीं मिलेंगे देश के मुख्य न्यायाधीश, सुप्रीम कोर्ट प्रशासन ने खारिज की चर्चा

संयुक्त संसदीय समिति और सुप्रीम कोर्ट के जजों के बीच एक साथ चुनाव संबंधी विधेयकों पर प्रस्तावित चर्चा की अटकलों को शीर्ष अदालत प्रशासन ने सिरे से नकार दिया है।

देश भर में एक साथ चुनाव कराने से जुड़े प्रस्तावित मसौदे पर सुप्रीम कोर्ट के रुख को लेकर चल रहे विवाद पर विराम लग गया है। सर्वोच्च अदालत के प्रशासन ने औपचारिक तौर पर स्पष्ट किया है कि भारत के मुख्य न्यायाधीश या अन्य किसी न्यायाधीश की संयुक्त संसदीय समिति के साथ ऐसी कोई बैठक तय नहीं है। इस स्पष्टीकरण के आने से पहले इस तरह के संवाद को लेकर कानूनी और राजनीतिक गलियारों में तीखी बहस छिड़ गई थी।

कपिल सिब्बल ने उठाए थे बैठक के औचित्य पर सवाल

इस पूरे मामले की शुरुआत उस समय हुई जब वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए एक दावा पेश किया। उन्होंने कहा था कि एक साथ चुनाव कराने की रूपरेखा तैयार कर रही संसद की संयुक्त समिति आगामी 6 अक्टूबर को मुख्य न्यायाधीश और अन्य न्यायाधीशों से विचार-विमर्श करने की योजना बना रही है। सिब्बल ने प्रस्तावित वार्ता को पूरी तरह अभूतपूर्व बताते हुए इसे असंवैधानिक करार दिया था।

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वरिष्ठ वकील ने इस कदम को न्यायपालिका की स्वतंत्रता और संविधान में निहित शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत के खिलाफ बताया। उन्होंने तर्क दिया कि संसद की समिति जिन विधायी मसौदों की जांच कर रही है, वे भविष्य में कानून का रूप लेने के बाद न्यायिक समीक्षा के दायरे में आ सकते हैं। ऐसे में कानून बनने से पूर्व ही जजों के साथ इस तरह का संवाद स्थापित करना कानूनी परंपराओं के अनुकूल नहीं है।

जांच के दायरे में आए दोनों प्रमुख विधेयक

संबंधित संसदीय समिति दरअसल संविधान (129वां संशोधन) विधेयक, 2024 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2024 की बारीकियों का अध्ययन कर रही है। इन दोनों विधेयकों का प्राथमिक उद्देश्य पूरे देश में लोकसभा और विधानसभा चुनावों को एक साथ आयोजित कराने का कानूनी ढांचा तैयार करना है। कपिल सिब्बल का कहना था कि जब समिति ने अभी अपनी अंतिम रिपोर्ट भी तैयार नहीं की है, तब शीर्ष अदालत के जजों को मसौदे की शर्तों की जानकारी देने के नाम पर समय मांगना समझ से परे है।

उन्होंने यह सवाल भी उठाया था कि क्या अदालत ने ऐसे किसी आमंत्रण को स्वीकार किया था, जबकि यह मसला देश की संवैधानिक व्यवस्था और शासन प्रणाली के बुनियादी ढांचे से गहराई से जुड़ा हुआ है।

प्रशासन के बयान से अटकलों का पटाक्षेप

वरिष्ठ अधिवक्ता की आपत्तियों के सामने आने के फौरन बाद सुप्रीम कोर्ट प्रशासन ने स्थिति को पूरी तरह साफ कर दिया। प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मुख्य न्यायाधीश अथवा सर्वोच्च न्यायालय के अन्य न्यायाधीशों के साथ संयुक्त संसदीय समिति की कोई बैठक आयोजित नहीं की जा रही है। इस खंडन के बाद उन सभी कयासों पर पूर्ण विराम लग गया है जिनमें न्यायपालिका और संसदीय समिति के बीच औपचारिक विचार-विमर्श होने की बात कही जा रही थी।

सवाल-जवाब

क्या सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश एक साथ चुनाव पर जेपीसी से मिलने वाले हैं?
नहीं, सुप्रीम कोर्ट प्रशासन ने साफ तौर पर स्पष्ट किया है कि मुख्य न्यायाधीश या अन्य जजों की ऐसी कोई बैठक नहीं हो रही है।
इस प्रस्तावित बैठक पर सवाल किसने उठाए थे?
वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस बैठक की बात कहते हुए इसे असंवैधानिक बताया था।
कपिल सिब्बल ने बैठक की क्या तारीख बताई थी?
कपिल सिब्बल ने दावा किया था कि यह बैठक 6 अक्टूबर को होने वाली है।
संसदीय समिति किन विधेयकों की जांच कर रही है?
समिति संविधान (129वां संशोधन) विधेयक, 2024 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2024 की जांच कर रही है।
सिब्बल ने इस बैठक का विरोध किस आधार पर किया था?
उन्होंने कहा कि प्रस्तावित संशोधन भविष्य में कानून बनने के बाद सुप्रीम कोर्ट में चुनौती के दायरे में आ सकते हैं, इसलिए ऐसी बैठक शक्तियों के बंटवारे के खिलाफ है।
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टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·10 मिनट पहले

कपिल सिब्बल ने ठीक समय पर सवाल उठाया, वरना न्यायपालिका और संसद के बीच गलत संदेश चला जाता।

Ravikash Gupta@ravikash·10 मिनट पहले

करण भाई, कपिल सिब्बल ने 6 अक्टूबर की जो तारीख बताई थी, सारा कन्फ्यूजन वहीं से तो शुरू हुआ था।

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