खेत की मेड़ों पर छिपा है फसल का असली दुश्मन
शाहजहाँपुर में खरीफ सीजन की सबसे मुख्य फसल धान की रोपाई की तैयारियां जोरों पर चल रही हैं। इस दौरान किसान अपने खेतों को समतल करने और जोतने में काफी मेहनत कर रहे हैं, लेकिन एक महत्वपूर्ण हिस्से को प्रायः छोड़ दिया जाता है, वह है खेत की मेड़ें। TrendKia की रिपोर्ट के अनुसार, कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि मेड़ों पर उगने वाली जंगली घास और अनुपयोगी खरपतवार मुख्य फसल के हिस्से का पोषण, धूप, हवा और पानी छीन लेते हैं। इतना ही नहीं, ये हानिकारक कीटों और फंगस को पनपने और छिपने के लिए सुरक्षित ठिकाना भी प्रदान करते हैं। इसलिए रोपाई शुरू करने से पहले ही इन्हें पूरी तरह खत्म करना फसल की सुरक्षा के लिए पहला और अनिवार्य कदम है।
कीटों और बीमारियों का सुरक्षित चक्रव्यूह
प्रगतिशील युवा किसान Ranjodh Singh ने TrendKia को बताया कि खेत के मेड़ों पर उगे खरपतवार मुख्य खेत में कीड़ों और बीमारियों को फैलाने का मुख्य जरिया बनते हैं। जब किसान मुख्य फसल में कीटनाशक दवाओं का छिड़काव करते हैं, तो ये कीड़े और कीट अस्थाई तौर पर मेड़ की हरी घासों में जाकर छिप जाते हैं। जैसे ही दवा का असर खत्म होता है, ये कीट दोबारा निकलकर धान के पौधों को नुकसान पहुंचाना शुरू कर देते हैं। इस वजह से रोपाई से पहले ही मेड़ों की साफ-सफाई कर इस चक्र को तोड़ना बेहद जरूरी हो जाता है।
मेड़ों के खरपतवारों के लिए Paraquat Dichloride 24% SL का वैज्ञानिक समाधान
मेड़ों पर उगे जिद्दी खरपतवारों को हाथों से उखाड़ना या काटना काफी समय लेने वाला और खर्चीला काम होता है। इस समस्या के आधुनिक और वैज्ञानिक समाधान के तौर पर Paraquat Dichloride 24% SL का इस्तेमाल सबसे उत्तम माना गया है। यह एक अत्यंत असरदार कॉन्टेक्ट हर्बिसाइड है। छिड़काव के कुछ ही घंटों के भीतर यह खरपतवार की पत्तियों को सुखा देता है। सबसे अच्छी बात यह है कि इसके इस्तेमाल से मेड़ों की मिट्टी की गुणवत्ता को कोई नुकसान नहीं पहुंचता और घास पूरी तरह काबू में आ जाती है।
छिड़काव की सही मात्रा और जरूरी सुरक्षा निर्देश
दवा के इस्तेमाल के दौरान किसानों को इसकी निर्धारित मात्रा का खास ख्याल रखना चाहिए। करीब 25 लीटर क्षमता वाली स्प्रे टंकी में 200 ml Paraquat Dichloride 24% SL डालकर अच्छी तरह घोल तैयार करें। छिड़काव करते समय ध्यान रखें कि हवा शांत हो ताकि दवा उड़कर किसी अन्य हरी फसल पर न गिरे और केवल मेड़ की घास पर ही पड़े। छिड़काव के दौरान किसानों की सुरक्षा भी उतनी ही आवश्यक है, इसलिए अपने चेहरे पर मास्क और हाथों में दस्ताने अवश्य पहनें।













