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जोधपुर के सिनेमाघर में 'हनुमान अंश' फिल्म के बाद गूंजे भक्ति के सुर, दर्शकों को बांटी गई हनुमान चालीसा और प्रसादराजस्थान
15 सित॰ 2026, 5:31 pm (10 दिन पहले)· 0

जोधपुर के सिनेमाघर में 'हनुमान अंश' फिल्म के बाद गूंजे भक्ति के सुर, दर्शकों को बांटी गई हनुमान चालीसा और प्रसाद

जोधपुर के एक मल्टीप्लेक्स में 'हनुमान अंश' फिल्म की स्क्रीनिंग के बाद, एक दर्शक ने भगवान हनुमान की विशेष पूजा-अर्चना की और वहां मौजूद सभी लोगों को प्रसाद एवं हनुमान चालीसा भेंट की।

जोधपुर के एक सिनेमाघर में 'हनुमान अंश' फिल्म देखने पहुंचे दर्शकों के लिए फिल्म का समापन बेहद अनोखा और यादगार बन गया। फिल्म खत्म होते ही पूरा सिनेमा हॉल भक्ति के रंग में सराबोर हो गया, जिसने वहां मौजूद सभी लोगों को एक अलग ही आध्यात्मिक अनुभव से जोड़ दिया।

सिनेमाघर के भीतर गूंजे भक्ति के स्वर

यह अनोखा नजारा जोधपुर के झालामंड इलाके में स्थित पेन इंडिया मॉल के पीवीआर आईनॉक्स मल्टीप्लेक्स में देखने को मिला। 'हनुमान अंश' फिल्म का शो खत्म होने के बाद, थिएटर के भीतर ही भगवान हनुमान जी की विशेष पूजा-आराधना का आयोजन किया गया। इस दौरान वहां का पूरा माहौल पूरी तरह से भक्तिमय हो गया और फिल्म देखने आए दर्शकों ने भी पूरी श्रद्धा और आदर के साथ इस धार्मिक अनुष्ठान में भाग लिया।

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दर्शकों को बांटा गया प्रसाद और हनुमान चालीसा

पूजा और आरती संपन्न होने के बाद, वहां मौजूद श्रद्धालु ओमप्रकाश लोहिया ने थिएटर में उपस्थित सभी दर्शकों को प्रसाद के रूप में पेड़े बांटे। इसके साथ ही, वहां आए प्रत्येक दर्शक को उपहार स्वरूप हनुमान चालीसा की एक-एक पुस्तिका भी भेंट की गई। फिल्म देखने के बाद अचानक हुए इस आयोजन और उपहार ने दर्शकों के इस अनुभव को हमेशा के लिए यादगार बना दिया।

आयोजन के पीछे की खास वजह

दरअसल, फिल्म देखने पहुंचे दर्शक ओमप्रकाश लोहिया अपने साथ भगवान हनुमान जी की एक सुंदर तस्वीर लेकर आए थे। इस आयोजन को अमली जामा पहनाने के लिए उन्होंने सिनेमाघर के प्रबंधन से पहले ही बातचीत कर ली थी और उनसे जरूरी अनुमति ले ली थी। जैसे ही फिल्म का प्रदर्शन समाप्त हुआ, उन्होंने नियमों के अनुसार भगवान हनुमान जी की विधि-विधान से पूजा की। अपनी इस पहल पर बात करते हुए ओमप्रकाश लोहिया ने बताया कि हनुमान जी के प्रति उनकी अटूट श्रद्धा है। फिल्म देखने के बाद उन्हें महसूस हुआ कि इस मौके को सिर्फ मनोरंजन तक ही सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि इसके जरिए लोगों को प्रभु की भक्ति से भी जोड़ा जाना चाहिए। इसी पवित्र भाव के साथ उन्होंने दर्शकों को प्रसाद और धार्मिक पुस्तकें भेंट कीं।

नीम करौली बाबा के जीवन मूल्यों पर आधारित है फिल्म

गौरतलब है कि 'हनुमान अंश' फिल्म की कहानी मुख्य रूप से नीम करौली बाबा के प्रति लोगों की आस्था, उनके जीवन मूल्यों और भक्ति को केंद्र में रखकर तैयार की गई है। इस फिल्म में भगवान हनुमान के प्रति अगाध श्रद्धा को दिखाने के साथ-साथ नीम करौली बाबा के पराक्रम, उनके समर्पण और धर्म के प्रति उनकी गहरी निष्ठा को बेहद खूबसूरती से पर्दे पर उतारा गया है। यही कारण है कि इस फिल्म को लेकर दर्शकों के बीच काफी ज्यादा उत्साह और सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।

सवाल-जवाब

यह अनोखा धार्मिक आयोजन कहां हुआ?
यह आयोजन जोधपुर के झालामंड में स्थित पेन इंडिया मॉल के पीवीआर आईनॉक्स मल्टीप्लेक्स में हुआ।
फिल्म स्क्रीनिंग के बाद दर्शकों को क्या उपहार दिया गया?
प्रत्येक दर्शक को हनुमान चालीसा की एक पुस्तक भेंट की गई और प्रसाद के रूप में पेड़े बांटे गए।
सिनेमाघर के भीतर पूजा का आयोजन किसने किया?
यह पूजा-आरती सिनेमाघर के प्रबंधन से पूर्व अनुमति लेकर दर्शक ओमप्रकाश लोहिया द्वारा आयोजित की गई थी।
'हनुमान अंश' फिल्म की कहानी किस पर आधारित है?
यह फिल्म नीम करौली बाबा से जुड़ी आस्था, भक्ति, उनके जीवन-मूल्यों और भगवान हनुमान के प्रति उनके समर्पण पर आधारित है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 3

Rohan Verma@rohan-verma·8 दिन पहले

मनोरंजन के आधुनिक माध्यमों और सामुदायिक धार्मिक आस्था का यह संगम मल्टीप्लेक्स संस्कृति के बदलते स्वरूप को दर्शाता है। नीम करौली बाबा जैसे आध्यात्मिक विषयों पर आधारित फिल्में दर्शकों को केवल मूक दर्शक नहीं रहने देतीं, बल्कि थिएटर के भीतर एक साझा सांस्कृतिक अनुभव गढ़ने के लिए प्रेरित करती हैं। पूर्व अनुमति के साथ किए जाने वाले ऐसे आयोजन भविष्य में आस्था आधारित सिनेमा के प्रचार और दर्शकों के सीधे जुड़ाव का नया सामाजिक मॉडल बन सकते हैं।

Arjun Mehta@arjun-mehta·8 दिन पहले

रोहन के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाते हुए, यह ट्रेंड वाणिज्यिक सिनेमाघरों के केवल मनोरंजन केंद्र से इतर सार्वजनिक-सांस्कृतिक संवाद के केंद्र बनने की ओर इशारा करता है। जब निजी व्यापारिक परिसर सामुदायिक अभिव्यक्तियों का मंच बनते हैं, तो यह थिएटर प्रबंधन के लिए नियमन, पूर्व-अनुमति प्रणाली और नागरिक व्यवस्था के नए ढाँचे की आवश्यकता को रेखांकित करता है। लोक नीति और सामाजिक संचार के नज़रिए से, दर्शक-संचालित यह पहल दर्शाती है कि आने वाले समय में सांस्कृतिक सामग्री और सार्वजनिक स्थलों के बीच का संबंध और अधिक परस्पर-निर्भर हो सकता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·8 दिन पहले

व्यावसायिक सिनेमाघरों जैसे बंद सार्वजनिक स्थलों में इस प्रकार के धार्मिक या विशेष आयोजनों के लिए केवल प्रबंधन की सहमति ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि सुरक्षा मानकों, अग्निशमन नियमों और भीड़ नियंत्रण के कानूनी दिशानिर्देशों का कड़ाई से पालन आवश्यक है। यद्यपि यह आयोजन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन सार्वजनिक सुरक्षा के दृष्टिकोण से मल्टीप्लेक्स परिसरों में बिना पूर्व सुरक्षा मूल्यांकन के ऐसे जमावड़े कानून-व्यवस्था और सुरक्षा जोखिम पैदा कर सकते हैं। सिनेमा हॉल संचालकों को दर्शकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तय मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का अनिवार्य रूप से अनुपालन करना चाहिए।

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