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राजस्थान निकाय चुनाव: प्रमुख पदों के नामांकन का आखिरी दिन, सीकर से लेकर उदयपुर तक राजनीतिक हलचल तेजराजस्थान
16 सित॰ 2026, 10:40 pm (9 दिन पहले)· 1

राजस्थान निकाय चुनाव: प्रमुख पदों के नामांकन का आखिरी दिन, सीकर से लेकर उदयपुर तक राजनीतिक हलचल तेज

राजस्थान में निकाय प्रमुख पदों के लिए नामांकन का आज आखिरी दिन है। सत्ता हासिल करने के लिए बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही दल हर संभव प्रयास कर रहे हैं, जिससे कई जगहों पर सियासी समीकरण तेजी से बदल रहे हैं।

जयपुर में राजस्थान निकाय चुनाव के तहत आज निकाय प्रमुख के नामांकन का आखिरी दिन तय किया गया है। राज्यभर के विभिन्न निकायों में अपना बोर्ड स्थापित करने के लिए भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है। दोनों ही प्रमुख दल निर्दलीय पार्षदों को अपने पाले में लाने के लिए हर संभव जुगत भिड़ा रहे हैं। जिन स्थानीय निकायों में पार्टियों को स्पष्ट बहुमत हासिल हुआ है, वहां अध्यक्ष पद की कुर्सी पाने के लिए अंदरूनी खींचतान और लॉबिंग का दौर चरम पर पहुंच गया है।

पार्षदों की बाड़ाबंदी और कड़ी निगरानी

राजनीतिक दलों ने अपने अधिकृत पार्षदों के साथ-साथ समर्थन देने वाले निर्दलीयों को भी सुरक्षित ठिकानों पर रोक कर रखा है, जिसे बाड़ाबंदी कहा जा रहा है। प्रत्येक पार्षद की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जा रही है ताकि ऐन वक्त पर पाला न बदला जा सके। जैसे-जैसे नामांकन दाखिल करने की समय सीमा नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे भाजपा और कांग्रेस अपने-अपने उम्मीदवारों के नामों की घोषणा करने में जुटी हुई हैं, जिससे चुनावी सरगर्मी और बढ़ गई है।

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सीकर और उदयपुर में सियासी उलटफेर

इस पूरी प्रक्रिया के दौरान पार्टियों के भीतर चल रही गुटबाजी खुलकर सामने आने लगी है। अधिकतम निकायों में अपना बोर्ड काबिज करने के लिए दोनों दल सभापति पद के वास्ते निर्दलीयों को भी मैदान में उतारने से नहीं चूक रहे हैं। इस कड़ी में सबसे बड़ा राजनीतिक उलटफेर सीकर जिले की फतेहपुर नगर परिषद में सामने आया है, जहां बहुमत न होने के बावजूद बीजेपी ने निर्दलीय पार्षद मंजू भिंडा को अपना आधिकारिक प्रत्याशी बना दिया है। दूसरी ओर, उदयपुर नगर निगम में बीजेपी के पास स्पष्ट बहुमत होने के बावजूद अभी तक महापौर पद के लिए उम्मीदवार का नाम तय नहीं हो पाया है, क्योंकि वहां पूरा मामला पेचीदा जातीय समीकरणों में उलझ कर रह गया है।

सवाल-जवाब

राजस्थान निकाय चुनाव में नामांकन की अंतिम तिथि कब है?
निकाय प्रमुख के पदों के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि आज ही है।
किन दो प्रमुख दलों के बीच मुख्य मुकाबला चल रहा है?
यह मुकाबला मुख्य रूप से भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच हो रहा है।
सीकर जिले की किस नगर परिषद में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है?
सीकर जिले की फतेहपुर नगर परिषद में बड़ा उलटफेर हुआ है।
फतेहपुर में बीजेपी ने किसे अपना प्रत्याशी घोषित किया है?
अल्पमत में होने के बावजूद बीजेपी ने निर्दलीय पार्षद मंजू भिंडा को अपना प्रत्याशी घोषित किया है।
उदयपुर नगर निगम में महापौर के नाम पर फैसला क्यों नहीं हो पाया है?
उदयपुर में स्पष्ट बहुमत होने के बावजूद मामला जटिल जातीय समीकरणों में उलझ गया है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Kavya Nair@kavya-nair·8 दिन पहले

राजस्थान के उदयपुर और सीकर जैसे क्षेत्र वैश्विक पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत के दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण हैं। निकाय चुनावों में राजनीतिक खींचतान और स्थानीय नेतृत्व के चयन में देरी का सीधा असर इन शहरों के नागरिक प्रबंधन, स्वच्छता व्यवस्था, और विरासत संरक्षण से जुड़ी नीतियों पर पड़ता है। मजबूत और स्थिर स्थानीय प्रशासन केवल निवासियों के लिए ही नहीं, बल्कि यहां आने वाले राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के अनुभव और क्षेत्रीय पर्यटन अर्थव्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए अनिवार्य है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·8 दिन पहले

स्थानीय निकाय चुनावों में बाड़ाबंदी और निर्दलीयों पर बढ़ती निर्भरता यह दर्शाती है कि प्रादेशिक स्तर पर कैडर अनुशासन कमजोर हो रहा है। फतेहपुर में स्पष्ट बहुमत न होने पर भी निर्दलीय पर दांव लगाना और उदयपुर जैसे मजबूत गढ़ में जातीय समीकरणों के कारण प्रत्याशी तय न कर पाना, दोनों प्रमुख दलों के भीतर गहरे असंतोष और गुटबाजी को उजागर करता है। यह रणनीति तात्कालिक तौर पर बोर्ड बनाने में तो मददगार हो सकती है, लेकिन भविष्य में स्थानीय शासन में अस्थिरता और पाला बदलने की संभावनाओं को बढ़ावा देगी।

Ravikash Gupta@ravikash·8 दिन पहले

अर्जुन का यह विश्लेषण सटीक है कि बाड़ाबंदी और निर्दलीयों पर अत्यधिक निर्भरता संगठन के कैडर अनुशासन की कमजोरी दर्शाती है। आर्थिक व प्रशासनिक दृष्टि से देखें तो ऐसी अस्थिरता का सीधा असर निकायों की कार्यप्रणाली पर पड़ता है। जब बोर्ड का गठन जोड़-तोड़ और आंतरिक असंतोष के बीच होता है, तो स्थानीय बजट के आवंटन, नागरिक विकास योजनाओं की स्वीकृति और नीतिगत निर्णयों में बार-बार रुकावट आती है। शासन में यह अनिश्चितता न केवल बुनियादी ढांचे की परियोजनाओं को धीमा करती है, बल्कि स्थानीय स्तर पर वित्तीय संसाधनों के कुशल उपयोग को भी प्रभावित करती है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·8 दिन पहले

राजस्थान निकाय चुनावों में नामांकन के अंतिम दिन बाड़ाबंदी और निर्दलीयों को पाले में लाने की यह रणनीति यह दर्शाती है कि राजनीतिक दल बहुमत के बाद भी जोड़-तोड़ और दलबदल जैसी आशंकाओं से कितने आशंकित हैं। सीकर में बहुमत के बिना भी दांव चलना और उदयपुर में जातीय समीकरणों के कारण फैसले में देरी, चुनावी प्रक्रिया के दौरान आंतरिक कलह और सुरक्षा प्रबंधन की संवेदनशीलता को उजागर करती है।

Rohan Verma@rohan-verma·8 दिन पहले

यह पूरी प्रक्रिया केवल शहरी स्थानीय निकायों के प्रबंधन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जिला स्तर पर दोनों प्रमुख दलों के सांगठनिक नियंत्रण की एक बड़ी परीक्षा बन चुकी है। नामांकन के बाद अब असली चुनौती मतदान और बाड़ाबंदी के इस दौर में पार्षदों को एकजुट रखना होगी, क्योंकि मामूली सी सेंधमारी भी सत्ता के पूरे समीकरण को पलट सकती है।

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