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राम मंदिर फंड घोटाले में दो इस्तीफे, विपक्ष ने चंपत राय और अनिल मिश्रा को हटाना नाकाफी बतायाउत्तर प्रदेश
26 जून 2026, 7:19 pm (33 दिन पहले)· 2

राम मंदिर फंड घोटाले में दो इस्तीफे, विपक्ष ने चंपत राय और अनिल मिश्रा को हटाना नाकाफी बताया

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे के बाद विपक्षी दलों ने पूरे ट्रस्ट को भंग करने की मांग की। शिवसेना (यूबीटी), कांग्रेस और राजद ने कहा कि इन इस्तीफों से सैकड़ों करोड़ रुपए के कथित फंड घोटाले के असली जिम्मेदार नहीं बच सकते।

राम मंदिर के दान फंड में करोड़ों रुपए की धांधली का मामला उजागर होने के कुछ ही दिनों बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। उत्तर प्रदेश सरकार के सूत्रों के मुताबिक दोनों ने नैतिक आधार पर यह कदम उठाया। बताया जा रहा है कि श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए सैकड़ों करोड़ रुपए में हेराफेरी हुई, जिसमें मंदिर के कुछ कर्मचारियों ने बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से यह कारनामा अंजाम दिया। विपक्षी दलों ने इन इस्तीफों को नाकाफी करार देते हुए पूरे ट्रस्ट को भंग करने और गहरी जांच की मांग उठाई।

संजय राउत: पूरा ट्रस्ट भंग करो

शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सदस्य संजय राउत ने साफ कहा कि ये इस्तीफे किसी काम के नहीं। उनके शब्दों में, "चंपत राय के इस्तीफे से क्या हासिल होगा? एक एसआईटी बनाई गई थी और उसने अपनी रिपोर्ट भी सौंप दी। उन्होंने कुछ छोटे-मोटे लोगों को गिरफ्तार किया, लेकिन पूरे ट्रस्ट को ही भंग कर देना चाहिए।" राउत ने यह भी बताया कि समाजवादी पार्टी के प्रमुख और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सबसे पहले यह मुद्दा उठाया था, तब जाकर यह पूरा मामला सार्वजनिक हो सका।

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राजीव शुक्ला: करोड़ों रुपए की पूरी जांच हो

कांग्रेस के राज्यसभा सांसद राजीव शुक्ला ने कहा कि दो इस्तीफों से इतने बड़े घोटाले को दबाया नहीं जा सकता। उन्होंने सीधा सवाल किया, "अगर सैकड़ों या हजारों करोड़ रुपए की लूट हुई है, तो क्या पूरा पैसा सिर्फ चंपत राय के पास गया? यह बहुत बड़ा मामला है और इसकी पूरी जांच होनी चाहिए।" जब तक हर रुपए का हिसाब नहीं होगा, यह विवाद खत्म नहीं होगा।

शक्ति यादव: बड़ी मछली को बचाया जा रहा है

राजद के प्रवक्ता शक्ति यादव ने भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पहले ही यह कह चुके हैं कि चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा बेहद गंभीर मामला है। शक्ति यादव के मुताबिक अभी तक केवल एफआईआर दर्ज हुई है और कुछ लोग इस प्रकरण की 'मुख्य मछली' को बचाने में जुटे हैं। उन्होंने आगाह किया कि अगर जांच बड़े लोगों तक पहुंची, तो कई प्रभावशाली नाम उजागर हो सकते हैं। शक्ति यादव ने कहा, "भगवान श्रीराम के नाम पर भी राजनीति और चंदे का खेल खेला गया। इन लोगों का धर्म और कर्म से कोई मतलब नहीं है। इनका एक ही काम है, 'चंदा खाओ और चंदा खिलाओ'।"

जांच की स्थिति

एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी और कुछ छोटे स्तर के लोगों को गिरफ्तार भी किया गया। विपक्षी दलों का आरोप है कि जांच जानबूझकर छोटे स्तर तक सीमित रखी गई है और असली दोषियों को बचाया जा रहा है। एफआईआर दर्ज हो चुकी है, पर विपक्ष का कहना है कि असली जांच अभी बाकी है।

सवाल-जवाब

चंपत राय और अनिल मिश्रा ने इस्तीफा क्यों दिया?
उत्तर प्रदेश सरकार के सूत्रों के मुताबिक दोनों ने नैतिक आधार पर इस्तीफा दिया, जब राम मंदिर के दान फंड में धांधली का मामला सामने आया।
राम मंदिर में कितने रुपए की धांधली का आरोप है?
आरोप है कि श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए सैकड़ों या हजारों करोड़ रुपए में हेराफेरी की गई।
एसआईटी ने इस मामले में क्या किया?
एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी और कुछ छोटे-मोटे लोगों को गिरफ्तार किया गया, लेकिन विपक्ष का कहना है कि बड़े दोषी अभी भी बाहर हैं।
विपक्षी दल क्या मांग कर रहे हैं?
शिवसेना (यूबीटी), कांग्रेस और राजद पूरे ट्रस्ट को भंग करने और धांधली की पूरी जांच की मांग कर रहे हैं।
इस मुद्दे को सबसे पहले किसने उठाया?
समाजवादी पार्टी के प्रमुख और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सबसे पहले यह मामला उठाया, जिससे यह सार्वजनिक हो सका।
घोटाले में किन पर मिलीभगत का आरोप है?
आरोप है कि मंदिर के कुछ कर्मचारियों ने बैंक अधिकारियों के साथ मिलकर यह धांधली की।
शक्ति यादव ने 'बड़ी मछली' से क्या मतलब निकाला?
शक्ति यादव का आरोप है कि इस घोटाले में प्रभावशाली लोग शामिल हैं जिन्हें जानबूझकर बचाया जा रहा है, हालांकि उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया।
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