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त्रिपुरा में विलेज कमेटी चुनाव के लिए 28 सितंबर को सवेतन अवकाश घोषितत्रिपुरा
22 सित॰ 2026, 4:08 pm (35 दिन पहले)· 1

त्रिपुरा में विलेज कमेटी चुनाव के लिए 28 सितंबर को सवेतन अवकाश घोषित

त्रिपुरा सरकार ने टीटीएएडीसी के तहत होने वाले विलेज कमेटी चुनाव के मद्देनजर 28 सितंबर 2026 को मतदान वाले इलाकों में कर्मचारियों के लिए सवेतन अवकाश का ऐलान किया है।

त्रिपुरा सरकार ने स्वायत्त जिला परिषद क्षेत्रों में होने वाले स्थानीय चुनावों को सुगम बनाने के मकसद से 28 सितंबर 2026 को सवेतन अवकाश घोषित किया है। यह फैसला त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद (टीटीएएडीसी) के अधिकार क्षेत्र में आने वाली विलेज कमेटियों में मतदान को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, ताकि सभी योग्य मतदाता बिना किसी वित्तीय नुकसान के अपने लोकतांत्रिक अधिकार का उपयोग कर सकें।

बंद रहेंगे दफ्तर और वित्तीय संस्थान

सामान्य प्रशासन (सचिवालय प्रशासन) विभाग द्वारा जारी आधिकारिक निर्देश के अनुसार, मतदान के दिन चुनावी परिधि में आने वाले सभी सरकारी कार्यालय, मजिस्ट्रेट अदालतें और बैंकिंग अथवा वित्तीय संस्थान पूरी तरह बंद रहेंगे। यह आदेश लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 135B(1) के वैधानिक प्रावधानों के तहत लागू किया गया है। इसके जरिए यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है कि चुनावी प्रक्रिया के संचालन में किसी तरह की प्रशासनिक या व्यावहारिक रुकावट न आए।

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निजी क्षेत्र और बाहर कार्यरत कामगारों को भी राहत

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह राहत केवल सरकारी कर्मचारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यापारिक इकाइयों, औद्योगिक प्रतिष्ठानों और निजी कार्यस्थलों पर काम करने वाले पंजीकृत मतदाताओं पर भी समान रूप से लागू होगी। यदि कोई पंजीकृत मतदाता चुनावी क्षेत्र का मूल निवासी है और अपने हलके से बाहर किसी अन्य स्थान पर नौकरी करता है, तो उसे भी मताधिकार के इस्तेमाल के लिए सवेतन अवकाश का हकदार माना जाएगा। यह व्यवस्था कैजुअल और दिहाड़ी पर काम करने वाले मजदूरों को भी सुरक्षा देती है, जिससे वे बिना मजदूरी गंवाए अपने गांव जाकर वोट डाल सकें।

अति आवश्यक सेवाओं के लिए विशेष अपवाद

हालांकि, इस आम रियायत के बीच सरकार ने कुछ विशेष परिस्थितियों में छूट का प्रावधान भी रखा है। आदेश के तहत यदि किसी कर्मचारी की काम से अनुपस्थिति से कार्यस्थल पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता हो या व्यवसाय में भारी नुकसान होने की आशंका हो, तो नियोक्ता को सशर्त छूट मिल सकती है। त्रिपुरा सरकार के संयुक्त सचिव बैजयंत दास के हस्ताक्षर से जारी इस अधिसूचना को सभी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को क्रियान्वयन के लिए भेज दिया गया है।

सवाल-जवाब

त्रिपुरा में सवेतन अवकाश किस तारीख के लिए घोषित किया गया है?
राज्य सरकार ने 28 सितंबर 2026 के लिए सवेतन अवकाश की आधिकारिक घोषणा की है।
यह अवकाश किन चुनावों के चलते दिया जा रहा है?
यह अवकाश टीटीएएडीसी के अंतर्गत आने वाली विलेज कमेटियों के चुनावों के लिए घोषित किया गया है।
क्या निजी कंपनियों और दिहाड़ी मजदूरों को भी इसका लाभ मिलेगा?
हां, निजी प्रतिष्ठानों, फैक्ट्रियों, व्यापारिक इकाइयों और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को भी यह सवेतन अवकाश मिलेगा।
यह सरकारी आदेश किस कानून के तहत जारी हुआ है?
यह अधिसूचना लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 135B(1) के तहत जारी की गई है।
क्या किसी कर्मचारी को इस अवकाश से छूट दी जा सकती है?
हां, यदि किसी कर्मचारी की अनुपस्थिति से गंभीर खतरा या भारी व्यावसायिक नुकसान होने का अंदेशा हो, तो छूट मिल सकती है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Amit Patel@amit-patel·34 दिन पहले

त्रिपुरा सरकार का ये कदम बढ़िया है, कम से कम दिहाड़ी मजदूरों को वोट डालने के लिए पैसे नहीं गंवाने पड़ेंगे। प्राइवेट कंपनियों को भी छुट्टी देनी ही होगी, वर्ना लोकतंत्र में सबकी भागीदारी कैसे बढ़ेगी।

Ravikash Gupta@ravikash·34 दिन पहले

त्रिपुरा में विलेज कमेटी चुनाव के लिए सवेतन अवकाश का ऐलान तो बढ़िया है ताकि लोग वोट डाल सकें, पर क्या प्राइवेट सेक्टर के जो लोग अपने गांव से दूर शहरों में काम कर रहे हैं, उन्हें सच में बिना वेतन कटे छुट्टी मिल पाएगी? अक्सर ऐसा होता है कि कागजी आदेश ज़मीन पर ठीक से लागू नहीं होते और गरीब मजदूरों या प्राइवेट कर्मचारियों को खुद ही बात उठानी पड़ती है।

Vikram Yadav@vikram-yadav·34 दिन पहले

रविकेश जी, बिल्कुल सही बात पकड़ी आपने। बिहार में भी चुनाव के वक्त कागजों पर ऐसी ही छुट्टियां मिलती हैं, पर प्राइवेट कंपनियों और ईंट-भट्ठों पर काम करने वाले मजदूरों को बिना वेतन काटे छुट्टी मिलना हमेशा से टेढ़ी खीर रहा है।

Rohan Verma@rohan-verma·34 दिन पहले

निजी दफ्तरों में काम करने वाले सचमुच छुट्टी ले पाएंगे क्या? कंपनियां तो बहाने ढूँढ ही लेती हैं।

Arjun Mehta@arjun-mehta·34 दिन पहले

रोहन, तुम बिल्कुल सही कह रहे हो। पिछली बार जब मैंने अगरतला में कवरेज की थी, तब एक प्राइवेट फैक्ट्री वाले ने वोट के दिन भी अपने यहाँ वर्कर रोके रखे थे, और लेबर अफसर के चक्कर कटवाए थे वो अलग।

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