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यूरोपीय बाजार में पहुंची त्रिपुरा के जैविक सुगंधित चावल की पहली खेप, 18.7 मीट्रिक टन अनाज रवानात्रिपुरा
2 सित॰ 2026, 9:52 pm (55 दिन पहले)· 5

यूरोपीय बाजार में पहुंची त्रिपुरा के जैविक सुगंधित चावल की पहली खेप, 18.7 मीट्रिक टन अनाज रवाना

त्रिपुरा ने यूरोप को 18.7 मीट्रिक टन प्रमाणित जैविक सुगंधित चावल की अपनी पहली वाणिज्यिक खेप भेजी है, जिसमें कालिखासा, काला चावल, स्टिकी राइस और हरिनारायण जैसी स्वदेशी किस्मों का निर्यात किया गया है।

पूर्वोत्तर के कृषि क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज करते हुए त्रिपुरा से प्रमाणित जैविक सुगंधित चावल की पहली वाणिज्यिक खेप यूरोपीय बाजार के लिए रवाना की गई है। कुल 18.7 मीट्रिक टन वजनी इस निर्यात खेप में राज्य की चार प्रमुख स्वदेशी किस्में शामिल हैं। प्रतिथि ऑर्गेनिक फूड्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा तैयार की गई यह डिलीवरी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रसायनों से मुक्त अनाज की बढ़ती मांग को पूरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

निर्यात किए गए चावल की किस्में और खेप का विवरण

यूरोप भेजी गई इस पहली खेप में राज्य के पारंपरिक और पोषक तत्वों से भरपूर चावल को प्राथमिकता दी गई है। इसमें सबसे बड़ी मात्रा हरिनारायण चावल की है, जो 10 मीट्रिक टन भेजा गया है। इसके अलावा 6 मीट्रिक टन ब्लैक राइस यानी काला चावल, 1.5 मीट्रिक टन स्टिकी राइस और 1.2 मीट्रिक टन सुगंधित कालिखासा चावल शामिल है। यह विविधीकरण विदेशी खरीदारों के बीच पूर्वोत्तर के कृषि उत्पादों की मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने में मदद करेगा।

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अगरतला स्थित प्रज्ञा भवन में बुधवार को राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम (NPOP) पर आयोजित एक संवेदीकरण कार्यक्रम के दौरान इस खेप को औपचारिक रूप से हरी झंडी दिखाई गई। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री रतन लाल नाथ ने झंडी दिखाकर इस वाहन को रवाना किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा, "यह आयोजन त्रिपुरा के जैविक कृषि पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने और हमारे किसानों को वैश्विक बाजारों से जोड़ने में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।" उन्होंने आगे बताया कि त्रिपुरा की उपजाऊ मिट्टी, प्रचुर वर्षा और समृद्ध जैव विविधता जैविक खेती के विकास के लिए अपार अवसर प्रदान करती है।

पारंपरिक कृषि पद्धतियां और आधुनिक प्रमाणीकरण

राज्य में जैविक कृषि को बढ़ावा देने के लिए स्थानीय किसान पीढ़ियों से चली आ रही प्राकृतिक तकनीकों का उपयोग कर रहे हैं। त्रिपुरा के कृषक फसल चक्र, मिश्रित खेती और जैविक खाद के नियमित उपयोग जैसी टिकाऊ पद्धतियों पर निर्भर रहते हैं। इन पारंपरिक तरीकों को अब आधुनिक जैविक प्रमाणीकरण प्रणालियों के साथ जोड़ा जा रहा है, ताकि उत्पाद अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों पर पूरी तरह खरे उतर सकें।

यूरोपीय संघ के देशों में इस चावल के प्रवेश से पहले भी त्रिपुरा के कृषि उत्पाद अंतरराष्ट्रीय पहचान बना चुके हैं। राज्य से उत्पादित सुगंधित चावल, अदरक, सुगंधित नींबू, बर्ड्स आई मिर्च और जीआई-टैग प्राप्त क्वीन अनानास को भारत के प्रमुख शहरों के साथ-साथ जर्मनी, यूएई, ओमान और बांग्लादेश के बाजारों में पहले ही भेजा जा चुका है।

जैविक खेती का दायरा और एफपीसी ढांचा

वर्तमान में त्रिपुरा में लगभग 26,600 हेक्टेयर कृषि भूमि को जैविक खेती के ढांचे के तहत लाया गया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इसमें से 14,411 हेक्टेयर क्षेत्र पूरी तरह से पंजीकृत जैविक भूमि है। वहीं 2,002 हेक्टेयर भूमि वर्तमान में परिवर्तन की प्रक्रिया से गुजर रही है, जबकि 10,189 हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र को जैविक मान्यता देने के लिए विचार किया जा रहा है।

किसानों को विपणन और व्यापारिक अवसर सुलभ कराने के उद्देश्य से राज्य में 53 किसान उत्पादक कंपनियां (FPCs) स्थापित की गई हैं। यह सामूहिक कृषि मॉडल छोटे किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त करने और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में सीधे भाग लेने में सहायता करता है।

सवाल-जवाब

यूरोप को त्रिपुरा से कुल कितना चावल निर्यात किया गया है?
त्रिपुरा से पहली खेप के तहत कुल 18.7 मीट्रिक टन प्रमाणित जैविक सुगंधित चावल यूरोप निर्यात किया गया है।
इस निर्यात खेप में चावल की कौन-कौन सी किस्में शामिल हैं?
इस खेप में 10 मीट्रिक टन हरिनारायण चावल, 6 मीट्रिक टन काला चावल (ब्लैक राइस), 1.5 मीट्रिक टन स्टिकी राइस और 1.2 मीट्रिक टन कालिखासा चावल शामिल हैं।
किस कंपनी ने इस निर्यात खेप को तैयार और फ्लैग ऑफ कराया?
इस खेप को प्रतिथि ऑर्गेनिक फूड्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा निर्यात किया गया और कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री रतन लाल नाथ ने इसे अगरतला में हरी झंडी दिखाई।
त्रिपुरा में कितने क्षेत्र में जैविक खेती की जा रही है?
त्रिपुरा में लगभग 26,600 हेक्टेयर भूमि जैविक खेती के ढांचे के अंतर्गत है, जिसमें 14,411 हेक्टेयर पंजीकृत है और 53 एफपीसी गठित की गई हैं।
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