भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर देश भर में उन्हें याद किया जा रहा है। इस मौके पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच पर संदेश जारी कर पूर्व प्रधानमंत्री के व्यक्तित्व, उनके ऐतिहासिक योगदान और सादगी को नमन किया। उन्होंने रेखांकित किया कि शास्त्री जी का जीवन और उनका नेतृत्व आज भी देश के नागरिकों के अधिकारों तथा सम्मान की रक्षा के लिए एक मजबूत प्रेरणा बना हुआ है।
राहुल गांधी ने अपने संदेश में क्या कहा
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर पूर्व प्रधानमंत्री को श्रद्धांजलि देते हुए लिखा कि भारत के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री जी की जयंती पर उन्हें सादर नमन। उन्होंने आगे उल्लेख किया कि शास्त्री जी ने ‘जय जवान, जय किसान’ का नारा देकर देशवासियों के अधिकारों और सम्मान की रक्षा का दृढ़ संकल्प लिया था और भारत को एक नई राह दिखाई थी। राहुल गांधी के अनुसार, शास्त्री जी का सादा जीवन और देश के प्रति उनका अटूट समर्पण आने वाले समय में भी सभी का मार्गदर्शन करता रहेगा।
कौन थे लाल बहादुर शास्त्री
लाल बहादुर शास्त्री स्वतंत्र भारत के दूसरे प्रधानमंत्री थे, जिन्होंने 9 जून 1964 से लेकर 11 जनवरी 1966 को अपने निधन तक लगभग अठारह महीने तक देश का नेतृत्व किया। उच्च शिक्षा के दौरान उन्होंने काशी विद्यापीठ से शास्त्री की उपाधि प्राप्त की थी, जिसके बाद यह उपाधि उनके नाम का अभिन्न अंग बन गई। स्वतंत्रता के उपरांत उन्होंने उत्तर प्रदेश में संसदीय सचिव तथा बाद में गोविंद बल्लभ पंत के मंत्रिमंडल में पुलिस एवं परिवहन मंत्री के रूप में महत्वपूर्ण प्रशासनिक सुधार किए। उनके परिवहन मंत्री रहते हुए पहली बार सार्वजनिक परिवहन में महिला संवाहकों यानी कंडक्टरों की नियुक्ति की शुरुआत हुई थी, जबकि पुलिस मंत्री के तौर पर उन्होंने प्रदर्शनकारियों या भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज के स्थान पर पानी की बौछारों के इस्तेमाल की नई व्यवस्था बनाई थी।
संगठन और राष्ट्रीय राजनीति में बड़ा योगदान
प्रशासनिक जिम्मेदारियों के अलावा लाल बहादुर शास्त्री ने राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक संगठन को मजबूत करने में केंद्रीय भूमिका निभाई। वर्ष 1951 में जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में उन्हें अखिल भारत कांग्रेस कमेटी का महासचिव नियुक्त किया गया था। इस संगठनात्मक दायित्व के दौरान उन्होंने 1952, 1957 और 1962 के आम चुनावों में पार्टी की चुनावी रणनीति और व्यापक जीत सुनिश्चित करने के लिए जमीनी स्तर पर कड़ा परिश्रम किया। इसके अतिरिक्त, जब देश गंभीर खाद्य संकट के दौर से गुजर रहा था, तब उन्होंने पूरे देश से सप्ताह में एक दिन उपवास रखने का आह्वान करने से पहले स्वयं अपने परिवार के साथ इसका पालन कर मिसाल पेश की थी। देश के प्रति निष्ठा, सार्वजनिक जीवन में उच्च नैतिकता और ईमानदारी के कारण उन्हें मरणोपरांत भारत रत्न से भी सम्मानित किया गया।
जनता की प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया पर राहुल गांधी के इस संदेश के बाद आम लोगों की ओर से भी मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कई नागरिकों ने शास्त्री जी की सादगी, ईमानदारी और रेल दुर्घटना पर इस्तीफा देने जैसी नैतिक जवाबदेही को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी, जबकि कुछ उपयोगकर्ताओं ने आज की राजनीति में उस स्तर के नैतिक मूल्यों और आचरण की कमी पर सवाल उठाए।



























